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*चुनाव तक जिंदा रखना आसान नहीं पहलगाम मसले को*

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कुमार कृष्णन

पहलगाम कोई गुमनाम गांव नहीं है। ये जम्मू-कश्मीर का सबसे चौकस और सुरक्षा कर्मी-भरा अनौपचारिक माना जाता है। औरंगाबाद यात्रा हो या सैलानियों का जामवड़ा, यहां हर गली, हर मोड़ पर सुरक्षा बल होते हैं। ताकतवर, पुलिस और सेना फिर कैसे हुआ ये हमला? जिसने सुरक्षा की सारी नजरें चकमा देकर शूटिंग कर दी? या फिर सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ दिखावे की थी? ये सारे सवाल हैं। जिसका जवाब आम जनमानस जानना चाहती है। ढाई दशक के बाद यह सबसे बड़ा आतंकी हमला है।


पहलगांव हमले के जख्में के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बिहार दौरा रहा। जब पूरे देश से आतंकवादियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उसका लाभ लेने की कवायद प्रारम्भ कर दी। बिहार के मधुबनी के झंझारपुर की लोहना पंचायत में ‘पंचायती राज दिवस’ पर आयोजित आम सभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने आतंकियों को यह कहकर ‘मिट्टी में मिलाने’ की धमकी दी कि ‘उन्होंने सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं वरन भारत पर हमला किया है।’ प्रधानमंत्री ने कहा -22 अप्रैल को, जम्मू कश्मीर के पहलगाम में, आतंकियों ने मासूम देशवासियों को जिस बेरहमी से मारा है, उससे पूरा देश व्यथित है, कोटि-कोटि देशवासी दुखी है। सभी पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ खड़ा है। जिन परिवारजनों का अभी इलाज चल रहा है, वे जल्द स्वस्थ हों, इसके लिए भी सरकार हर प्रयास कर रही है।


इस आतंकी हमले में किसी ने अपना बेटा खोया, किसी ने अपना भाई खोया, किसी ने अपना जीवन-साथी खोया है। उनमें से कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ा बोलता था, कोई मराठी था, कोई ओड़िया था, कोई गुजराती था, कोई यहां बिहार का लाल था। आज उन सभी की मृत्यु पर करगिल से कन्याकुमारी तक हमारा दुख एक जैसा है, हमारा आक्रोश एक जैसा है। ये हमला सिर्फ निहत्थे पर्यटकों पर नहीं हुआ है, देश के दुश्मनों ने भारत की आत्मा पर हमला करने का दुस्साहस किया है। मैं बहुत स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूं, जिन्होंने ये हमला किया है, उन आतंकियों को, और इस हमले की साजिश रचने वालों को उनकी कल्पना से भी बड़ी सजा मिलेगी, सजा मिल करके रहेगी। अब आतंकियों की बची-खुची जमीन को भी मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। 140 करोड़ भारतीयों की इच्छा-शक्ति अब आतंक के आकाओं की कमर तोड़कर रहेगी।


इस राज्य में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसलिये मोदी की इस सभा को चुनावी प्रचार का आगाज़ भी माना जा रहा है।प्रधानमंत्री मोदी ने इस सभा से बिहार की 13,480 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।प्रधानमंत्री ने बिहार के मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर पर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को मान्यता प्रदान करते हुए राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार भी प्रदान किए। वहीं


प्रधानमंत्री ने बिहार के गोपालगंज जिले के हथुआ में लगभग 340 करोड़ रुपये की लागत से रेल अनलोडिंग सुविधा वाले एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की आधारशिला रखी। इससे आपूर्ति श्रृंखला को सुव्यवस्थित करने और थोक एलपीजी परिवहन की दक्षता में सुधार करने में मदद मिलेगी।क्षेत्र में बिजली के आधारभूत संरचना को बढ़ावा देते हुए प्रधानमंत्री ने 1,170 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं की आधारशिला रखी और पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के तहत बिहार में बिजली क्षेत्र में 5,030 करोड़ रुपये से अधिक की कई परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया।देश भर में रेल संपर्क बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप प्रधानमंत्री ने सहरसा और मुंबई के बीच अमृत भारत एक्सप्रेस, जयनगर और पटना के बीच नमो भारत रैपिड रेल और पिपरा और सहरसा तथा सहरसा और समस्तीपुर के बीच ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने सुपौल पिपरा रेल लाइन, हसनपुर बिथान रेल लाइन और छपरा और बगहा में 2-लेन वाले दो रेल ओवर ब्रिज का भी उद्घाटन किया। उन्होंने खगड़िया-अलौली रेल लाइन को राष्ट्र को समर्पित किया। इन परियोजनाओं से संपर्क में सुधार होगा और क्षेत्र का समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।प्रधानमंत्री ने दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के अंतर्गत बिहार के 2 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों को सामुदायिक निवेश निधि के अंतर्गत लगभग 930 करोड़ रुपये का लाभ वितरित किया।


प्रधानमंत्री ने पीएमएवाई-ग्रामीण के 15 लाख नए लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र सौंपे और देश भर के 10 लाख पीएमएवाई-जी लाभार्थियों को किस्तें जारी कीं। उन्होंने बिहार में 1 लाख पीएमएवाई-जी और 54,000 पीएमएवाई-यू घरों में गृह प्रवेश के अवसर पर कुछ लाभार्थियों को चाबियां भी सौंपीं।


बेशक यह सभा विकास कार्यों के शिलान्यास-उद्घाटन के लिये आयोजित की गयी थी परन्तु पहलगाम हादसे के बाद भी इसे रद्द न करने से बात साफ़ हो गयी थी कि इसका लाभ लेने की कोशिश होगी। सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर लौटे प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली हवाईअड्डे पर ही बैठक की और पाकिस्तान के खिलाफ़ कई फ़ैसले लिये लेकिन इसे लेकर न तो कोई अधिकृत बयान दिया, न कोई जनता को संदेश। सत्ता समर्थक मीडिया तथा सोशल मीडिया में बुधवार से ही यह बात घूमने लगी थी कि ‘प्रधानमंत्री पाकिस्तान को कड़ा संदेश बिहार की धरती से देंगे।’ यह सचमुच आश्चर्यजनक था कि अंतरराष्ट्रीय महत्व की इस बड़ी घटना के बारे में कुछ कहने के लिये उन्होंने देश की राजधानी दिल्ली को नहीं चुना, न ही संसद में या सर्वदलीय बैठक में चेतावनी देना पसंद किया। जबकि रेडियो- टीवी पर वे देशवासियों को सम्बोधित कर सकते थे। साफ़ है कि वे इसका लाभ लेने की पहले से ठान चुके थे।


इन अनुमानों को मोदीजी ने गलत साबित नहीं होने दिया। सभा में उन्होंने आतंकियों के हाथों मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिये सभी से दो मिनट का मौन धारण कराया तथा उनके परिजनों को यह कहकर सांत्वना दी कि ‘देश उनके साथ है।’ फिर इस घटना का ज़िक्र करते हुए आतंकियों को चेतावनी दी कि ‘उनकी बची-खुची ज़मीन भी ख़त्म कर दी जायेगी।’ उन्होंने ऐलान किया कि ‘अब उन्हें मिट्टी में मिलाने का समय आ गया है। जिन आतंकियों ने देश की आत्मा को चोट पहुंचाई है उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा।’


देश भर से इस घटना को लेकर समर्थन मांगने की कोशिश में मोदीजी ने इस बात को रेखांकित किया कि ‘हमले में किसी ने बेटा खोया, तो किसी ने भाई। किसी ने अपना जीवन साथी खोया है। उनमें कोई बांग्ला बोलता था, कोई कन्नड़ बोलता था, कोई मराठी था, कोई ओड़िया था, कोई गुजराती था तो कोई यहां बिहार का लाल था।’ भावुकता की रौ में बहे मोदीजी दुख और गुस्सा दोनों का इज़हार करते नज़र आये। उन्होंने कहा कि ‘पहलगाम में आतंकियों ने मासूम लोगों को जिस बेरहमी से मारा है उससे करोड़ों देशवासी दुखी हैं। सभी पीड़ित परिवारों के इस दुख में पूरा देश उनके साथ है। उन्होंने कहा-‘मैं बिहार की धरती से पूरी दुनिया को कहना चाहता हूं कि भारत सभी आतंकियों की पहचान कर उन्हें सजा देगी। इस तरह के हमले से आतंकी देश के मनोबल को नहीं तोड़ सकेंगे। आतंकी हमले के बाद अब न्याय दिलाने के लिए भारत सब कुछ करेगा। जो लोग मानवता में विश्वास करते हैं वे हमारे साथ हैं।’


मोदीजी ने आतंकी घटना के लिये सीधे-सीधे पाकिस्तान का नाम तो नहीं लिया लेकिन यह ज़रूर कहा कि ‘140 करोड़ भारतीयों की इच्छा शक्ति ‘आतंक के आकाओं’ की कमर तोड़ देगी।’ फिर भी, उनकी रैली में ‘पाकिस्तान मुर्दाबाद’ के नारे लगाए गए जो इस बात का इशारा है कि हमलावरों का मददगार कौन है; या कम से कम किसे समझा जा रहा है। यह समझ से परे हैं कि आखिर पाकिस्तान का नाम लेने में दिक्कत क्या है जबकि वे सिंधु जल बंटवारा संधि तोड़ चुके हैं, पाक उच्चायुक्त के कुछ लोगों को वापस जाने के लिये कह चुके हैं, पाकिस्तान से अपने कुछ अधिकारियों को बुला रहे हैं तथा देश में रहने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को 48 घंटे में लौट जाने का हुक्म दे चुके हैं।मधुबनी की सभा से यह संकेत निकला है कि भारतीय जनता पार्टी को बिहार चुनाव के लिये एक मुद्दा मिल गया है।


भाजपा प्रवक्ता सैयद शाहनवाज हुसैन ने कहा, प्रधानमंत्री ने आज बिहार से एक कड़ा संदेश दिया है। सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने सख्त कदम उठाया है। उन्होंने पाकिस्तान की पानी तक पहुंच बंद कर दी है। पाकिस्तान अब प्यासा रहेगा और परेशान रहेगा, जिस तरह से उन्होंने हमारे लोगों के साथ खूनी खेल खेला है। उसी तरह हम पाकिस्तानियों को पानी न देकर उन्हें तड़पाएंगे। सीमा सील कर दी गई है और पाकिस्तानियों को भारत छोड़ने के लिए कहा गया है। आज बिहार से जो बात निकली है, वो दूर तक जाएगी।


उन्होंने आगे कहा, प्रधानमंत्री ने साफ कहा है कि ऐसी सजा देंगे, जिसकी उन्होंने कल्पना भी नहीं की होगी। साथ ही आतंकवादियों को नेस्तनाबूद किया जाएगा और प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान से इस बात को साफ कर दिया है।कश्मीर आतंकी हमले को भारतीय मुसलमानों से जोड़ना एक गंभीर साजिश है। पहलगाम में जिन्होंने ये हमला किया है, वो पाकिस्तानी थे और भारत के अंदर 140 करोड़ देशवासी इस हमले के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हैं। पाकिस्तान ने संदेश दिया कि वो हमें धर्म के नाम पर बांट देगा, लेकिन मैं बता देना चाहता हूं कि हम धर्म के नाम पर न बंटे हैं और न बंटेंगे।शाहनवाज हुसैन ने कहा, हमारी पूजा पद्धति भले ही अलग-अलग हो, लेकिन हम सभी एक साथ खड़े हैं।


यदि वह विकास की बात करेगी तो श्रेय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ले जायेंगे। वैसे यह मुद्दा इसके बाद होने वाले पश्चिम बंगाल चुनाव के लिये कारगर होगा या नहीं, कहना मुश्किल है क्योंकि तब तक यह पुराना पड़ चुका होगा और वहां के मतदाता इससे शायद ही प्रभावित हों। बिहार में इसका असर पड़ा तो ख़तरा भाजपा के सहयोगी दल तथा नीतीश बाबू की पार्टी जनता दल यूनाइटेड को होगा।

वहां भाजपा अगली बार अपना मुख्यमंत्री देखना चाहती है। राज्य इकाई कह चुकी है कि ‘ऐसा होने पर ही अटल बिहारी वाजपेयी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।’ नीतीश कुमार के कथित सुशासन के मुकाबले भाजपा इस मुद्दे को आगे बढ़ाती है तो वह कोशिश करेगी कि जेडीयू से ज़्यादा सीटें या बेहतर प्रदर्शन कर मुख्य मंत्री पद पर दावा करे। हालांकि सीट बंटवारे पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। पहलगाम के मसले बहीं बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पहलगाम आतंकी हमले में इंटेलिजेंस को असफल बताया। उन्होंने सरकार से सवाल पूछा कि पहलगाम हाई सिक्योरिटी जोन में है और अगर हाई सिक्योरिटी जोन में आतंकवादी 20 म‍िनट रहते हैं तो पर्यटकों की सुरक्षा का इंतजाम क्यों नहीं क‍िए गए? वह हाई सिक्योरिटी जोन है। अब तक कई आतंकी घटनाएं हुई हैं, कई लोगों की जानें गई हैं, इस लापरवाही की जिम्मेदारी कौन लेगा?


उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की सभी विपक्षी पार्टियों के खिलाफ जांच एजेंसियां लगाई जाती हैं, इन आतंकियों के खिलाफ कोई एजेंसी क्यों नहीं लगती? इंटेलिजेंस फेल है। इस बड़ी लापरवाही की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। सरहद पार से आतंकी आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों ने बिहार के श्रमिकों की हत्या की घटनाओं को अंजाम दिए, उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सरहद पार से आतंकी देश में आ रहे हैं, यह देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है और बहुत बड़ा सिक्योरिटी लैप्स है।


तेजस्वी यादव ने कहा कि पहलगाम की घटना को लेकर भाजपा और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से देश, लोकतंत्र और मानवता के लिए घातक है, जिसकी महागठबंधन निंदा करता है।ऐसे में फिर, पहलगाम के मसले को छह महीने तक जीवित रखना आसान नहीं रहेगा।


2019 के लोक चुनाव में पुलवामा और बालाकोट पर छाया रहा। अब जब 2025 का चुनाव नजदीक आएगा तो पहलगाम हमला एक ज्वालामुखी बन सकता है लेकिन इस बार जनता पहले से ही प्रमुख सलाहकार है। वे सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि ठोस सबूतों से सरकार को अडाना चाहते हैं।

Ramswaroop Mantri

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