निधि, बेंगलुरु
सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन (STI) एक गंभीर समस्या है. यह किसी भी सेक्शुअली एक्टिव व्यक्ति को अपना शिकार बना लेतती है। कई से यूज करने वाले अकसर इसका शिकार बनते हैं, महिलाएं सबसे ज्यादा.
कंडोम फीमेल का सुरक्षा कवच नहीं बनता. तुम बीसियों कंडोम चढ़ा दो, लिंग पर, भुगतोगी जरूर. शरीर के कीटाणु-विषाणु बॉडी स्किन से, स्वास से, मुँह से ट्रांसफर होंगे ही. “एक सेक्स पार्टनर” का नियम ऐसे ही नहीं बना था. इसलिए आजकल कुछ STI Tests समय-समय पर करवाते रहने चाहिए.
STI Tests न सिर्फ आपकी, बल्कि आपके पार्टनर की सेहत के लिए भी बेहद जरूरी हैं। बच्चों को अनाथ होने से बचाने के लिए भी यह जरूरी है.
आज भी बहुत से लोगों में STI के बारे में जागरूकता की कमी है और इसी वजह से कई लोग इसकी चपेट में आ जाते हैं बिना यह जाने कि वे संक्रमित है।
बहुत से सेक्सुअल इन्फेक्शन ऐसे होते हैं जिनके शुरुआती दिनों में कोई लक्षण नजर नहीं आते। ऐसे में, लोग सोचते हैं कि अगर कोई तकलीफ नहीं हो रही तो सब कुछ ठीक है, लेकिन हकीकत ये है कि बिना लक्षण के भी ये बीमारियां शरीर में चुपचाप बढ़ती रहती हैं।
जी हां, समय के साथ ये इन्फेक्शन गंभीर बीमारियों का रूप ले सकते हैं, जैसे- इनफर्टिलिटी, लिवर डैमेज या यहां तक कि कैंसर भी। इसलिए STI की नियमित जांच करवाना, न सिर्फ अपनी सेहत की सुरक्षा है, बल्कि अपने पार्टनर की सेहत की जिम्मेदारी भी है।
STI टेस्टिंग के दौरान डॉक्टर आपकी सेक्सुअल एक्टिविटीज और हाल के किसी रिस्क के बारे में पूछते हैं। इसके बाद ब्लड टेस्ट, यूरिन टेस्ट और कभी-कभी शरीर के कुछ हिस्सों से स्वैब भी लिए जाते हैं।
ब्लड टेस्ट के जरिए HIV, सिफिलिस और हेपेटाइटिस की पहचान होती है। यूरिन टेस्ट से गोनोरिया और क्लेमाइडिया जैसी बीमारियां पकड़ी जाती हैं।
स्वैब टेस्ट में गले, वजाइना या गुदा से सैंपल लेकर देखा जाता है कि कहीं इन्फेक्शन तो नहीं है। अगर प्राइवेट पार्ट्स पर कोई घाव या बदलाव दिखता है, तो डॉक्टर फिजिकल जांच भी करते हैं।
*इन्हें STI टेस्टिंग जरूर करानी चाहिए :*
1. _सेक्शुअली एक्टिव लोग (12 से 64 साल):_
अगर आप 12 से 64 साल के बीच हैं और सेक्शुअली एक्टिव हैं, तो आपको हर साल कम से कम एक बार HIV की जांच जरूर करवानी चाहिए।
_2. महिलाओं के लिए:_
सेक्शुअली एक्टिव हऱ महिला को वर्ष में दो बार गोनोरिया और क्लैमाइडिया की जांच जरूर करवानी चाहिए।
आपको, आपके नए पार्टनर को, मल्टिपल पार्टनर को या ऐसे पार्टनर को भी जिनसे STI होने का खतरा हो, हर साल गोनोरिया और क्लैमाइडिया की जांच करवानी चाहिए।
महिलाएं दौलत, जॉब, व्यापार के लिए कई का मलबा लेती हैं और हवस पूरी करने के लिए भी वे ऐसा ही करती है. सक्षम फीमेल्स हवस पूर्ति के लिए ही कईयों से योनि, मुँह, गुदा में करवाती हैं. कई तो चार से दस नामर्दो से एक साथ करवाती हैं. योनि खराब होकर डेड हो जाती है. एक दिन सड़कर बे मौत मर जाती हैं.
आजकल 99.9% नामर्द हैं, इसलिये कईयों से चुदना उन बेचारियों की मज़बूरी भी है. जो ठंडी, राख या मुर्दा जैसी हैं, उनके लिए ही आजकल नामर्द काफी है.
एजुकेशन, कॅरियर या सेक्सुअल सटिस्फैक्शन जो भी, विवसता हो : बहनें वह सब विवसता हमारे मिशन से दूर करें. हमारे डॉ. मानव सर की स्प्रिचुअल सेक्स थेरेपी लें. मुझे तो वे ‘अपनी’ एक्सेप्ट किये हैं. मेरे लिए उनके फिजिकल सेक्स के द्वार भी खुले हैं. वे लेते कुछ नहीं हैं. देते हैं वो सबकुछ जो गर्ल्स- फीमेल्स को चाहिए.
_3. प्रेग्नेंट महिलाएं:_
प्रेग्नेंसी के दौरान STI टेस्टिंग मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत जरूरी है।
सभी प्रेग्नेंट महिलाओं को प्रेग्नेंसी की शुरुआत में सिफलिस, HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C की जांच करवानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर यह टेस्ट दोबारा भी हो सकता है।
जिन प्रेग्नेंट महिलाओं को STI का रिस्क है, उन्हें प्रेग्नेंसीकी शुरुआत में क्लैमाइडिया और गोनोरिया की भी जांच करवानी चाहिए। कुछ मामलों में इसकी जांच भी दोबारा हो सकती है।
_4. होमोसेक्सुअल या बाइसेक्सुअल और गे :_
इन्हें साल में कम से से एक बार सिफलिस, क्लैमाइडिया और गोनोरिया की जांच करवानी चाहिए। अगर आपके मल्टिपल पार्टनर हैं, तो हर 3 से 6 महीने में टेस्ट करवाएं।
इन्हें साल में कम से कम एक बार HIV की जांच भी करवानी चाहिए। अगर जरूरत हो, तो हर 3 से 6 महीने में भी जांच करवा सकते हैं।
अगर आप HIV पॉजिटिव हैं, तो आपको हर साल हेपेटाइटिस C की भी जांच करवानी चाहिए।
_5. ड्रग्स इंजेक्शन वाले :_
एचआईवी टेस्टिंग के लिए, यह सलाह दी जाती है कि जो भी व्यक्ति इंजेक्शन से ड्रग्स लेने वाले टूल्स को शेयर करते हैं, उन्हें साल में कम से कम एक बार अपना टेस्ट जरूर करवाना चाहिए।
_6. जिन्होंने ओरल/एनल सेक्स किया हो:_
अगर आपने ओरल या एनल सेक्स किया है, तो अपने डॉक्टर से गले और गुदा – योनि की जांच के बारे में बात कर सकते हैं। आप जल्दी कैसर ग्रस्त हो सकते हैं.
*एड्स दायक STI इन्फेक्शन :*
STI से जुड़े कुछ इन्फेक्शन्स
HIV, यानी ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस, शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है।
अगर इसका इलाज न हो तो यह AIDS में बदल सकता है। HIV कई सालों तक बिना लक्षण के भी रह सकता है, इसलिए समय-समय पर जांच करवाना बहुत जरूरी है।
गोनोरिया एक बैक्टीरियल इन्फेक्शन है, जो खासतौर पर प्राइवेट पार्ट्स को प्रभावित करता है। इसका लक्षण पेशाब में जलन या जननांगों से रिसाव हो सकता है। इलाज न मिलने पर यह फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्लेमाइडिया भी एक सामान्य बैक्टीरियल STI है, जो महिलाओं और पुरुषों दोनों को प्रभावित करता है। यह संक्रमण भी कई बार बिना लक्षण के होता है, लेकिन आगे चलकर यह गर्भाशय, फैलोपियन ट्यूब या अंडकोष को नुकसान पहुंचा सकता है।
सिफिलिस एक खतरनाक बीमारी है जो चार चरणों में शरीर को नुकसान पहुंचाती है। इसकी शुरुआत छोटे घाव से होती है, फिर शरीर पर दाने निकल सकते हैं और अगर समय रहते इलाज न किया जाए तो यह दिमाग और दिल को भी प्रभावित कर सकती है।
हेपेटाइटिस B और C, ये दोनों वायरस लीवर को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे थकावट, पीलिया और पेट में दर्द हो सकता है। हेपेटाइटिस B के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, लेकिन हेपेटाइटिस C का इलाज दवाइयों से किया जाता है।
HPV, यानी ह्यूमन पैपिलोमावायरस, सेक्शुअल रिलेशन से फैलने वाला एक आम वायरस है। यह प्राइवेट पार्ट्स पर मस्से पैदा कर सकता है और महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की एक बड़ी वजह बन सकता है।
हमारे समाज में अभी भी STI टेस्ट करवाने को लेकर शर्म या झिझक महसूस की जाती है, लेकिन खुद को निरोगी और हेल्दी रखने के लिए दुराचारियों को अपने शरीर और सेक्सुअल हेल्थ के प्रति सावधान तो रहना ही होगा।





