(डॉ. विकास मानव)
अब वालीवुड फिल्मों का जमाना लद रहा है. मारधाड़, ऐक्सन, रोमांस के नाम पर अप-संस्कृति का प्रसार, आइटम सांग के नाम पर नग्नता तक का अतिरेक : दर्शक ऊब चूका है ऐसी सतही सोच वाली विकृत परम्पराओं से. अब क्षेत्रीय फिल्मों को तवज्जो मिल रही है. खासकर उन फिल्मों को जो लोकजीवन से जुडी हों.
इसी श्रृंखला में गत दिवस ‘बनारस एक अनोखी प्रेमकथा ‘ फ़िल्म का मुहूर्त समरोह लखनऊ में तमाम अंतर्राज्यीय प्रतिभागियों के बीच संपन्ना हुआ. संयोग से मैंने भी अपनी प्रतिभागिता दी.
यह फ़िल्म एक कहानी ही नहीं, कुंवारी यानि शुद्धतम भावनाओं, लोक-परम्परा और आधुनिका का त्रिवेणी संगम भी है. कथावस्तु का आधार बनारस है. कथा सार्वजनिक करना अभी समीचीन नहीं है.
फ़िल्म निर्माण का दायित्व-निर्वहन कुमार पवन कर रहे हैं. आप कमला फिम्ल प्रोडक्शन के डायरेक्टर रह चुके हैं. निर्देशन की बागडोर अनुभवी किरदार जे.पी. राजकमल ने संभाली है, जो सृजनात्मक दृष्टिकोणयुक्त भावनात्मक कथा-सृजन के लिए भी जाने जाते हैं.
फिम्म के मुख्य अभिनेता और कास्टिंग डायरेक्टर रंजीत शर्मा ‘राज’ हैं, जिन्होंने दक्ष कलाकारों का चयन स्वयं किया है. आप एक बेहतर अभिनेता के रूप में लोकप्रिय हैं. मुहूर्त समारोह आपकी ही अकादमी में आयोजित हुआ.
अनिमेष जेटली मुंबइया फिल्मों से संबद्ध जानामाना नाम है. इन्हें गूगल से भी जाना जा सकता है. इस फ़िल्म में आपको विलेन की भूमिका देने का विचार किया गया है.
फ़िल्म को दृश्यात्मकता शिखर देने का जिम्मा राज धीमान और दीपक कश्यप नें लिया. ये महारथी-द्वय कैमरे से एक अलग ही दुनिया रचने में माहिर हैं.
अन्य प्रमुख सहयोगियों और मुख्य कलाकारों में प्रांजल, तेजस, सतबीर, पूजा साहनी, तनु, शालिनी चंद्रा, हरजीत, रवि शर्मा, कृष्णा, हर्षित आदि काम उल्लेखनीय है.





