-सुसंस्कृति परिहार
उफ़ भारत देश की राजधानी को क्या हो गया है वह व्यंग्यकार शरद जोशी जी के लापतागंज की तरह पेश आ रही है। यहां वे सब सुविधाएं तो लापता नज़र आ ही रही हैं जिनकी बातें चुनावी घोषणापत्र में की गई थीं।लोग उन्हें ढ़ूढ रहे हैं।हताश और परेशान हैं। कभी सरकार ने बेड़ी में जकड़े हुए अमेरिका से आए लोगों के लापता होने की जानकारी भी नहीं दी।जाने कितनी युवतियां और बच्चे लापता होते जा रहे हैं। सरकार बेखबर है। आश्चर्यजनक तो यह है कि कोरोना महामारी और हाल के प्रयागराज कुंभ में लापता लोगों की कोई जानकारी भी नहीं दी गई।खैर,बकौल अमित शाह ये तो घटनाएं हैं होती रहती हैं। इन्हें रोका नहीं जिस सकता। सही है गरीब गुरबों की ख़बर कौन रखता है।यह तो सदियों से चला रहा है।
लेकिन यह तो हद ही हो गई कि चुनाव आयोग की वेबसाइट से कुछ राज्यों की वोटर लिस्टें अचानक गायब हों गई, पूर्व चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के लापता होने की भी ख़बर आई है। ज्ञानेश जी भी कहीं लापता ना हो जाएं।ये तब हो रहा है जब प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी ने चुनाव आयोग और भारत-सरकार पर वोट चोरी का इल्ज़ाम सरेआम प्रमाणों सहित सार्वजनिक तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किया। इतना ही नहीं पिछले बीस दिन पहले स्वास्थ्य खराब होने को कारण बताते हुए त्यागपत्र देने वाले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी लापता हो गए हैं। वे कहां हैं कैसे हैं किसी को पता नहीं! अभी तो सिर्फ एक बम फोड़ा गया है। लगता है,धनखड़ जी को हटाने वाला बम ना फूट जाए इसलिए वे लापता किए गए।या बंधक बना लिए गए हैं। ठहरिए, आहिस्ता आहिस्ता बहुत सलीके से बमबारी होना है।यह तमाम चोरों लुटेरों, देशद्रोहियों पर होगी।आम जनता सुरक्षित रहेगी।तब कितने लापता होंगे गणना कठिन होगी।
मुझे तो डर है , कल को भारत के गुजरात से दिल्ली आई मशहूर मोदी शाह जोड़ी भी लापता ना हो जाए हम उन्हें हम ढ़ूंढते रह जाएं। आखिरकार देश में जो कुछ हुआ है उनके ही संरक्षण में तो संभव हुआ है।
अभी तो सिर्फ एक बम गिरा है और हालात ये हैं कि लापता सिर्फ़ फाईलें ही नहीं लोग लापता होने लगे हैं।ऐसा तो बैंकों को लूटने वालों ने शुरू किया। लगातार कई लोग लूटकर लापता हो गए हैं। जिन्होंने विदेशी धरती पर अपना मुकाम बना लिया है लेकिन वे लापता की सूची में हैं ।
मुसीबत तो यह है कि यहां तो, जिनके लिए अपना राजनैतिक जीवन मोदीजी ने अर्पित कर दिया उसके ऊपर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है यानि की लूट का धन लापता होने ही वाला है। हम दो हमारे दो बकौल राहुल वे भारी मुसीबत में हैं। इनका लापता होना तो तय माना जा रहा है।
हमारे पड़ोसी बांग्लादेश में भी इसी तरह वोट की लूट हुई थी आज वह चुनाव अधिकारी जूतों से कुट रहा है और लूट की नायिका शेख हसीना भारत की शरण में हैं। वहां जेल उनका इंतज़ार कर रही है। जहां तक हमारे देश का सवाल है,यदि कोई सुप्रीमो नेता लापता होता है तो यकीन मानिए उसे कोई शरणागत बनाने तैयार नहीं होगा।हां छोटे-छोटे देशों में से कोई उन्हें शरण दे दे तो बात बन जाएगी।जिनके द्वारा प्रदत्त सम्मान से वे पिछले दिनों गदगद नज़र आए।
बहरहाल लापता गंज बनता दिल्ली पहली बार देख रहा है कि नंबर दो पद पर आरुढ़ रहे भारत सरकार के माननीय पूर्व उपराष्ट्रपति जी लापता हैं।जो सर्वाधिक चर्चा में हैं। राज्यसभा सांसद प्रतिष्ठित अधिवक्ता कपिल सिब्बल इस मामले को अदालत में रखने जा रहे हैं।बेशक यह एक चिंताजनक मसला है।इस पर इसीलिए और ज़ोर दिया जा रहा है कि हाल ही में पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के साथ जो असंसदीय व्यवहार हुआ।बीमारी के दौरान सीबीआई जांच बैठाई गई। उनके अंतिम संस्कार को राजकीय सम्मान नहीं मिला क्योंकि उन्होंने पुलवामा का सच खोला था।
पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ यदि अस्वस्थ है और उनके साथ भी यदि बदले की भावना से कुछ नहीं हो रहा है तो सरकार को ये जानकारी देनी चाहिए।लगता तो ऐसा है वे इस लुटेरी सरकार की पोल खोल सच ज़ाहिर ना कर दें इसलिए यह स्थिति बनी हुई है।
कुल मिलाकर देश के हालात पूरी तरह तानाशाह होते कथित प्रजातंत्र में दिख रहे हैं।आगे क्या होने वाला है,कितने अपहरण,कितनी मौतें सामने आएंगी।कहां नहीं जा सकता। फिर भी सावधानी बरतें।
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