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*भाजपा के घुसपैठियों अब तुम्हारी खैर नहीं!* 

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-सुसंस्कृति परिहार 

उम्मीद है शायद भाजपा में आए घुसपैठिए इस बात को भली-भांति समझ गए होंगे कि संघनीत भाजपा में रहकर अब किसी महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचना टेढ़ी खीर होगी।

यह तो भाजपा ने जब कांग्रेस समाप्ति का उद्घोष किया था, तब की बात थी कि दागियों और सत्ता लोलुप लोगों के लिए उसने अपने खोल रखे थे केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पद उन्हें मिल गए इनमें कई लोग ईडी, सीबीआई आदि से डरे हुए थे।उनके भ्रष्टाचारों की जिस तरह भाजपा ने सफाई कर दी उससे  प्रभावित होकर चोरों की जमात यहां पहुंच गई। इस तरह भाजपा ने कांग्रेस में घुसे चोरों की हकीकत सामने ला दी। दूसरे शब्दों में कहें कि इसने कांग्रेस को चोर उचक्के लोगों से मुक्त  कर दिया।आज बचे उन्हीं बब्बर शेरों की वजह से वह दहाड़ रही है जिसकी गूंज दुनिया में पहुंची है। इस पार्टी ने आजकल भाजपा की सांसें उखाड़ रखी हैं।

बहरहाल, कांग्रेस और अन्य पार्टियों से गए घुसपैठियों की फजीहत अब प्रारंभ हो चुकी है।प्रारंभ हुआ  है पूर्व

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के त्यागपत्र से। सर्वविदित है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से होते हुए वे भाजपा के राज्यपाल और फिर उपराष्ट्रपति पद तक पहुंच गए। प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना खूब झुक झुक सलाम किया लेकिन उनकी अन्तर्रात्मा ने एक दिन उन्हें धिक्कारा वे कहां जा रहा है कि वह अंदरूनी तौर पर, मोदी सरकार गिराने का प्लान बनाते बनाते खुद गिर गए उनकी गुप्त योजना पकड़ी गई।आज वे मुंह छुपाए नदारद है। कुछ कहते नहीं बन रहा वरना सर्वनाश का ख़तरा सामने है ही।

ये एक ऐसी घटना है जिससे घुसपैठिए आतंकित हैं। सरकार में बैसाखी बने नायडू और नीतेश को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें कम से कम उपराष्ट्रपति पद तो सरकार बनाने के एवज में मिल ही जाएगा। लेकिन जबसे सीपी राधाकृष्णन को एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है सब के होश गुम हैं।यह इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि भाजपा ने संघ के समक्ष सरेंन्डर कर दिया है इसलिए उन्होंने संघी व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया है। संभावित है इसी दबाव में अतिशीघ्र भाजपाध्यक्ष पद पर भी कोई संघी ही शोभायमान हो जाए।

ऐसी परिस्थितियों में जहां भाजपा से पद छीनने के प्रयास में संघ हो। वहां घुसपैठियों का हश्र क्या होने वाला धनखड़ जी मामले और नए उपराष्ट्रपति उम्मीदवार से समझा जा सकता है।

मोदी शाह की जोड़ी जो अपनी सत्ता की हिफाज़त के लिए इस समय पूर्ण रूप से संघ की शरण में हैं। इसलिए तो मोदीजी बेझिझक संघ का यशगान लालकिले से कर दिया।मरता क्या नहीं करता।वे अब चारों तरफ मुसीबतों से घिर गए हैं। संघ का अपना इतिहास है,वह काम निकालने अपने विचार के ख़िलाफ़ जब तब वक्तव्य दे देता है अडवाणी, मुरलीधर जोशी स्वयं सेवक को घर बिठा देता है।अब बारी मोदी शाह की है।इस सबका असर भाजपा सरकार पर पड़ेगा।यदि भगदड़ होती है वैशाखियां टूटती हैं तो सरकार बची रहेगी  कहना मुश्किल होगा।

 इसीलिए,दूसरी ओर संघ सुप्रीमो मोहन भागवत राहुल गांधी को भविष्य का नेता बताने लगे हैं। हो सकता है,वे समझ गए हैं कि आने वाला कल राहुल का होगा। उनकी कोशिश होगी कि संघ का अस्तित्व बचा रहे।अब ये बात और है राहुलगांधी पुरानी कांग्रेस की तरह शिथिलता बरतते हैं या नहीं। हालांकि उम्मीद कम है क्योंकि अपने लंबे राजनैतिक संघर्ष में उन्होंने बहुत कुछ जाना समझा है।वहीं पहले नेता हैं जिसने संघ के खिलाफ खुलकर बोला है। दूसरी बात भाजपा में गए घुसपैठियों की है उनकी स्थिति विकट है उनके लिए खरगे कांग्रेस ने दरवाजे बंद करने का बहुत पहले निर्णय लिया हुआ है। भाजपा में तो उनकी हालत और बदतर होने जा रही है।संघ भी घुसपैठिए मुक्त पार्टी पर जोर दे रहा है। यकीनन बहुत कठिन है डगर पनघट की। सावधान हो जाओ, घुसपैठियो।

Ramswaroop Mantri

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