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*इंसानियत की लाश पर ‘निज़ामे-मुस्तफ़ा’ की तामीर*

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     नग़मा कुमारी अंसारी

    दुनियाँ के सभी मुस्लिमों का इस्लाम मज़हब के आविर्भाव काल के बाद से ही हमेशा एक ही सपना रहा है और वह है पूरे विश्व को “निज़ामे-मुस्तफ़ा” बनाना।

    एक मुसलमान दूसरे मुसलमान का कितना भी बड़ा जानी दुश्मन क्यों न हो। लेकिन जब बात किसी हिन्दू, ईसाई या यहूदी के खात्मे की आयेगी तो वे कट्टर दुश्मन सब कुछ भूल कर एक पल में ही पक्के दोस्त हो जायेंगे।

    दुनियाँ का एक-एक मुसलमान इस अमानवीय और कपटपूर्ण उद्देश्य को एक गुप्त एजेंडे की तरह से हमेशा अपने दिल में महफूज ही रखता है। यही कारण है कि कोई भी दो मुसलमान दुनियाँ के किसी भी कोने के क्यों न हों। 

    बिना परिचय और बिना जाने ही सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने इस मज़हबी राब्ते के नाते फैवीकोल की भाँति अभिन्न ही होते हैं।

    आपने समस्त विश्व के मुसलमानों के साथ-साथ अपने भारत देश में भी देखा होगा कि फिलीस्तीन के मुद्दे पर मुसलमान उसके कितने समर्थक और प्रचारक रहते हैं। जबकि यही मुसलमान अपने देश में भीषण से भीषणतम आतंकवादी घटना तक पर निन्दा में एक शब्द तक का उच्चारण नहीं करते। 

    कारण साफ़ है कि मुसलमान किसी भी सूरत में मुसलमान की निन्दा नहीं कर सकता। फिर वह ओसामा-बिन-लादेन ही क्यों न हो।

    यह इस्लाम मज़हब एक ऐसा मज़हब है। जिसमें पृथ्वी के एक छोर के मुसलमान के दूसरे छोर के मुसलमान से इतने अधिक आत्मीय सम्बन्ध हैं। जैसे अन्य धर्मों में लोगों के अपने सगे भाई से भी ऐसे सम्बन्ध नहीं होते। 

    विश्व के सभी के सभी मुस्लिमों का यही एकमात्र उद्देश्य है। इसमें पूरी दुनियाँ से सभी ग़ैर मुस्लिम को नेस्तनाबूद करके इसी “निज़ामे-मुस्तफ़ा” की स्थापना करना है। 

    इस उद्देश्य की पहली कड़ी काफ़िर और मुशरिक है। ये वे लोग हैं जो इस्लाम को नहीं मानते। इसीलिए इनके खात्मे के लिए क़ुरान ने उन्हें वाजिबुल-क़त्ल बनाया है। उस अमानवीय और शैतानी मंजिल की यह पहली पायदान है कि यदि कोई मुसलमान नहीं है तो उसका क़त्ल वाजिब है।

   सम्पूर्ण विश्व के मुस्लिम अपने इस मक़सद के लिए ये इतने कटिबद्ध हैं कि सारे विश्व के सभी ग़ैर मुस्लिमों का सफाया करना इनकी योजना में शामिल है। क्योंकि बिना इसके इनके “निज़ामे-मुस्तफ़ा” का सपना पूरा हो ही नहीं सकता। इन्होंने दुनियाँ में इसी सपने को पूरा करने के लिए ही तो 183 आतंकवादी गिरोह बनाये हुए हैं। 

    ज्ञातव्य है कि इस काल्पनिक इस्लामिक “निज़ामे-मुस्तफ़ा” का साम्राज्य सौ फीसदी मुसलमानों से ही आबाद होगा। जो सभी ग़ैर मुस्लिम लोगों की लाश के ऊपर तामीर होगा। इसमें न तो मेरी पीढ़ी के नौनिहाल होंगे और न ही आपकी पीढ़ी के।

    क्या यह इतना वीभत्स और डरावना होगा? जी हाँ! आप अब बिल्कुल सही समझ रहे हैं। 

    यदि वैश्विक जनमत अभी भी समय रहते नहीं जागा और इस इंसानियत की समूल विनाशक और संहारक आँधी की ओर ध्यान नहीं दिया तो इंसानियत के भविष्य का क़यामत के गाल में औंधे मुंह गिरना अवश्यम्भावी है।

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Ramswaroop Mantri

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