सुसंस्कृति परिहार
नेपाल के बाद हिमालय की गोद में बसे लद्दाख में भी युवा आक्रोशित हुए हैं उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार के ख़िलाफ़ हिंसक आंदोलन किए हैं।इस बर्फीले क्षेत्र में पहली बार युवाओं ने आगजनी कर भाजपा कार्यालय को जला दिया तथा प्रशासनिक सम्पत्ति को आग के हवाले कर दिया है।
ज्ञात हुआ है लद्दाख के लेह शहर में आंदोलन हिंसक होने के बाद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 15 दिन से जारी अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के विस्तार की मांग को लेकर अनशन कर रहे वांगचुक ने हिंसा रोकने और शांति बनाए रखने की भी अपील की। सूत्रों के मुताबिक, हिंसक घटनाओं में 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 30 से ज्यादा घायल हैं।
विदित हो ऐसी वादाखिलाफी से जम्मू-कश्मीर की अवाम में भी काफी दिनों से हलचल देखी जा रही वह विस्फोटक रुप ना ले इससे पहले भाजपा सरकार को जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा का दे देना चाहिए।वरना यह बढ़ती आग इस केंद्र शासित राज्य को भी अपनी चपेट में ले लिया है।
Choose ETV Bharatविदित हो,लेह एपेक्स बॉडी के नेता अनशन पर बैठे हुए थे। उन्होंने धमकी दी थी कि जब तक राज्य बहाली की मांगें नहीं मानी जाती हैं, तब तक उन लोगों की भूख हड़ताल जारी रहेगी। 10 सितंबर से वे भूख हड़ताल पर बैठे थे। मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी इसी संगठन के तहत अनशन पर थे। अब जबकि आंदोलनकारियों ने हिंसा का सहारा लिया है, तो वांगचुक ने शांति बरतने की अपील की। वांगचुक ने इन घटनाओं से दुखित होकर 15 दिनों से चल रहे अपना उपवास को तोड़ने का भी ऐलान कर दिया।

अफ़सोसनाक है कि लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस पिछले चार सालों से केंद्रीय गृह मंत्रालय से बात कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई भी समाधान नहीं निकला है। लेह अपेक्स बॉडी ने केंद्र सरकार के साथ बातचीत की मांग की है। गृह मंत्रालय ने छह अक्टूबर को बातचीत की तारीख भी रखी है। इससे पहले मई महीने में भी होम मिनिस्ट्री के साथ बैठक हुई थी।
लेह एपेक्स बॉडी की मांग है कि जब भी सरकार बैठक की तारीख तय करती है, तो पहले उससे संपर्क साधा जाए, उसके बाद तिथि का निर्धारण हो। उनका आरोप है कि सरकार अपनी ओर से बातचीत की तारीख का ऐलान कर देती है और उन्हें इसके बारे में जानकारी नहीं मिल पाती है
लेह एपेक्स बॉडी के को-चेयरमैन छेरिंग दोरजे ने कहा, “हमारा विरोध शांतिपूर्ण है, लेकिन लोगों का धैर्य टूट रहा है। स्थिति हमारे हाथ से निकल सकती है, बातचीत पहले ही टल चुकी है।”
सोनम वांगचुक चाहते हैं कि आने वाले हिल काउंसिल के चुनाव से पहले सरकार लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग मान ले। उन्होंने कहा कि अगर सरकार इस मांग को मान लेती है तो लद्दाख के लोग वोट में भाग लेंगे और उन्हें इसका फायदा भी मिलेगा।
जम्मू और कश्मीर राज्य को इंदिरा गांधी की शहादत दिवस 31 अक्टूबर, 2019 को भारत की संसद द्वारा पारित जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर, और लद्दाख में विभाजित किया गया था. इस विभाजन का मुख्य कारण अनुच्छेद 370 के तहत राज्य को प्राप्त विशेष दर्जे को समाप्त करना था, जिसके कारण राज्य को एक राज्य से दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदला गया।
हालांकि इस विभाजन से लद्दाख खुश हुआ था क्योंकि लेह और श्रीनगर की दूरी आसान नहीं थी। मूलतः लद्दाख में बौद्ध धर्मावलंबी हैं। लेकिन भाजपा सरकार ने केंद्र शासित बनाने के साथ ही यह घोषणा की थी कि शीध्र ही जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को स्वतंत्र राज्य बना दिया जायेगा। किंतु झूठी और मक्कार सरकार ने दोनों राज्यों के साथ वादाखिलाफी की इसे ही लद्दाख में ऐसी स्थितियां जन्मी है। सोनम वांगचुक के पर्यावरण सुरक्षा के शांति पूर्ण अनशन और लेह से दिल्ली तक पदयात्रा की भी सरकार ने उपेक्षा की ।अभी भी सोनम वांगचुक ने गांधीवादी आंदोलन का रास्ता चुनते हुए 10 सितंबर से फिर पूर्ण राज्य का दर्जा देने अनशन शुरू किया किंतु ठीक 15 दिन बाद यह आंदोलन हिंसक हो गया। दुखित होकर उन्होंने अनशन त्याग दिया और शांति लाने तत्पर हुए हैं।
ये अच्छा हुआ कि सोनम वांगचुक आवाज सुनी गई और आंदोलन थम गया है ऐसा बताया जा रहा है। किंतु भाजपा सरकार कब तक झूठ और वायदाखिलाफी से जनता को भरमाएगी। ये घटनाएं भाजपा को सचेत कर रहीं हैं यदि नहीं सुधरे और वायदे पूरे नहीं किए तो अंजाम बुरा होगा।जिसकी बानगी लेह में देखने मिली।




