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*सनातन का अपमान नहीं, संविधान का अपमान हुआ*

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सुसंस्कृति परिहार 

साथियों  एक कथित सनातनी ने जूता सीजेआई कोर्ट में फेंककर सनातन के अपमान का बदला लेने की कोशिश की लेकिन वह पूरी तरह असफल हो गई। क्योंकि ना तो वह जूता सीजेआई तक पहुंच पाया और ना ही इसे जस्टिस गवई ने प्रधानता दी।  वकील ने कोर्ट से बाहर जाते समय नारेबाजी करते हुए कहा, ‘सनातन धर्म का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान.’ हालांकि, सीजेआई गवई ने इस वाकिए पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया और वकीलों से उनकी दलीलें देने को कहा। उन्होंने वकीलों से कहा, ‘इन सब चीजों की वजह से ध्यान भटकाने की जरूरत नहीं है। हम इससे विचलित नहीं होते हैं. ऐसी चीजों का मुझ पर कोई असर नहीं होता है।’

इधर सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायधीश (CJI) बी आर गवई पर जूता फेंकने की कोशिश करने 

वाले वकील राकेश किशोर को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान उन्हें किसी भी न्यायालय, ट्रिब्यूनल या अधिकरण में पेश होने, वकालत करने या पैरवी करने की अनुमति नहीं होगी। BCI ने आरोपी वकील का लाइसेंस रद्द कर दिया है।  

वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट के अंदर मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई  पर जूता फेंकने वाले 71 वर्षीय वकील से पूछताछ के तीन घंटे बाद उसे रिहा कर दिया गया। इसकी वजह यह रही कि क्योंकि शीर्ष अदालत के रजिस्ट्रार जनरल ने उनके खिलाफ आरोप लगाने से इनकार कर दिया।दरअसल, सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल ने दिल्ली पुलिस से जूते और दस्तावेज वकील राकेश किशोर को सौंपने को भी कहा। एक सूत्र ने बताया, “उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से मंजूरी लेने के बाद दिल्ली पुलिस की सुरक्षा इकाई और नई दिल्ली जिला पुलिस के अधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। महान व्यक्ति ऐसे ही होते हैं। उसे माननीय  जस्टिस गवई ने क्षमा कर दिया। उनका ये कहना “हम ऐसी चीज़ों से विचलित नहीं होते, ऐसी चीज़ों का मुझ पर कोई असर नहीं पड़ता ।”यह कथन उनके अन्तर्मन की पीड़ा को अभिव्यक्त करता है।इस महत्वपूर्ण पद आते आते उन्होंने कथित सनातन समाज के मनुवादियों से कितनी पीड़ा पाई होगी जिसे उन्होंने बिना विचलित होते हुए सहा। धन्य है मनुवादियों  तुम्हारे दिमाग में कितना कचरा भरा गया है कि इंसानियत को भी दरकिनार कर रहे हो।क्या तुम्हें यह नहीं मालूम कि वे भी हिंदू सनातनी है।

इस दुखद घटना के पीछे यह कहा जा रहा है कि नसीजेआई बी.आर. गवई ने खजुराहो में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति को फिर से स्थापित करने की याचिका को खारिज करते हुए कहा था कि यह एक पुरातात्विक स्थल है जो भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है, और याचिकाकर्ता भगवान से खुद प्रार्थना करें।, क्योंकि आप विष्णु के भक्त हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि यह याचिका “पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका” है, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ था।

पता नहीं वकील साहिब कैसे सनातनी हैं जो खंडित मूर्ति के लिए इतने नाराज़ हो गए। हिंदु समाज में खंडित मूर्ति की पूजा निषेध है।लगता तो ये भी है ,ये प्रसंग सीजेआई की माताजी द्वारा संघ के शताब्दी समारोह  का आमंत्रण ठुकराने से भी जुड़ता है। क्योंकि संघ के आमंत्रण को प्रणव मुखर्जी जैसे पूर्व राष्ट्रपति भी ठुकरा नहीं पाए थे। अब तो संघ फुल पावर में है हमारे देश का प्रधानमंत्री जिसके आगे नतमस्तक है। 

‌तो कुछ भी हो सकता है।जनता का पावर ही है जो इस देश में बढ़ रही मनुवादी सोच से देश को बचा सकती है।सबका साथ सबका विकास और सबका डीएनए एक कहने वाली भाजपा और संघ एक थैली के चट्टे-बट्टे हैं। इनकी कथनी करनी हमने 12 सालों में बराबर महसूस कर ली है। ये जूता सीजेआई पर नहीं हमारे संविधान को मारा गया है।मनुस्मृति के दीवानों ज़रा उसे पढ़ भी लो।जो समाज में भेदभाव की जननी है।स्त्री,  दलित और पिछड़ों को गुलाम समझती है। मुसलमान म्लेच्छ है। सिर्फ दो जातियों की महत्ता है इसमें ब्राह्मण और क्षत्रिय। इसमें भी क्षत्रिय , ब्राह्मण गुरुओं के परामर्श पर युद्ध करते रहे।मरते कटते रहे।दक्षिणा के नाम पर अपनी सम्पत्ति इन पर लुटाते रहे। खुद कंगाल रहे और गुरु मालामाल होते रहे। इस बात का प्रमाण राजस्थान में देखने को मिलता है जहां राजा के महलों के मुकाबले इनके महल अंदर से राजमहलों से खूबसूरत हैं।आज भी यही कौम सबके अधिकार पर लंबे समय कब्जा किए हुए है। अम्बेडकर और ज्योतिबा फुले और संविधान में प्राप्त अधिकार से यदि एक गवई सीजेआई बन जाता है तो चुभन इस तरह निकालते हैं।

कुल मिलाकर ये घटनाएं हल्के में लेने की ज़रूरत नहीं दलित अत्याचार,स्त्री बलात्कार आज भी ऐसे लोगों के कारण चरम पर है। झूठ और हिंसा का जब तक बोलबाला रहेगा।ये व्याधियां बढ़ेंगी।इनसे राहत तभी मिलेगी जब आप मनुवादी तानाशाही को पढ़ेंगे और समझने की कोशिश करेंगे।आज ज़रूरत है हम अपने संविधान की रक्षा करें।  पुरातन सनातन विचारधारा को भी समझें वह वसुधैव कुटुम्बकम की बात कहती हैं।जो वसुधा के पशु-पक्षी जीव जंतुओं सभी को मानव को कुटुम्ब मानती है।सर्वे सुखना भवन्तु की बात कहती है उसे जीवन में अपनाएं।हमारा संविधान उसी सनातन की भावना से सम्पन्न है। शंकराचार्य जी भी कहते हैं धर्म की जय हो/ अधर्म का नाश हो। प्राणियों में सद्भावना हो/ विश्व का कल्याण हो। अधर्म है अन्याय।  कितनी महान  परम्परा के वाहक हैं हम और आज एक बिचौलिए संघ के कथित सनातन के दीवाने होते जा रहे हैं। सनातन धर्म बचाना है तो इन बातों को आत्मसात करके अंदर का कलुष निकालना होगा। संविधान सनातन का रक्षक है।ये ना भूलें और सनातन के नाम पर लड़ने वाले कथित सनातनियों को सबक सिखाएं।

Ramswaroop Mantri

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