एस्ट्रोनॉमर्स ने एक ऐसी ‘स्टार फैक्ट्री’ की खोज की है, जो बिग बैंग के केवल 80 करोड़ साल बाद मौजूद थी. इस ‘स्टार फैक्ट्री’ को गैलेक्सी Y1 नाम दिया गया है. यह हमारे मिल्की वे (आकाशगंगा) की तुलना में 180 गुना ज्यादा तेजी से तारों को जन्म दे रही है. ब्रह्मांड के शुरुआती दौर में तारों के बनने वाले इस अत्यधिक गर्म और अज्ञात क्षेत्र की खोज से वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि शुरुआती ब्रह्मांड में आकाशगंगाएं इतनी तेजी से कैसे बढ़ीं. यह एक सनसनीखेज खोज है जो ब्रह्मांड के इतिहास के अनसुलझे रहस्यों पर से पर्दा उठा सकती है.
गर्म धूल ने खोला गैलेक्सी Y1 का राज
- खोज करने वाली टीम ने सबसे पहले इस अत्यधिक गर्म ब्रह्मांडीय धूल का तापमान मापा. उन्होंने इसी के जरिए Y1 की प्रकृति को समझा. इस रिसर्च के लिए एटाकामा लार्ज मिलिमीटर/सबमिलिमीटर ऐरे (ALMA) का उपयोग किया गया. रिसर्चर्स इस प्राचीन आकाशगंगा से निकलने वाले प्रकाश का एनालिसिस कर पाए. यह प्रकाश 13 अरब वर्षों से पृथ्वी की यात्रा कर रहा था.
- वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज ने ब्रह्मांडीय इतिहास के एक ऐसे युग को उजागर किया है जो पहले छिपा हुआ था. स्वीडन की चालमर्स यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी के टीम लीडर टॉम बैक्स ने एक बयान में कहा, ‘हम एक ऐसे समय को देख रहे हैं जब ब्रह्मांड आज की तुलना में बहुत तेजी से तारों का निर्माण कर रहा था.’ टीम की रिसर्च 12 नवंबर को मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसायटी नामक जर्नल में छपी.
सबसे दूर से मिली चमकती धूल की रोशनी
बैक्स ने बताया, ‘पहले के ऑब्जर्वेशंस से इस गैलेक्सी में धूल की उपस्थिति का पता चला था. यह सबसे दूर की गैलेक्सी है, जहां से हमने चमकती हुई धूल के प्रकाश का पता लगाया है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘इससे हमें संदेह हुआ कि यह गैलेक्सी एक अलग, अत्यधिक गर्म तरह की स्टार फैक्ट्री चला रही होगी. यह सुनिश्चित करने के लिए, हमने इसका तापमान मापने का फैसला किया.
कैसे बने ब्रह्मांड के शुरुआती तारे?
यह स्टडी एस्ट्रोनॉमर्स की उस कोशिश का हिस्सा है जिसके तहत वे तारों की पहली पीढ़ी, जिसे ‘पॉपुलेशन III (POP III)’ स्टार्स के रूप में जाना जाता है, के बनने की स्थितियों को समझना चाहते हैं. माना जाता है कि ये स्थितियां उन स्थितियों से बहुत अलग थीं जिनके तहत सूर्य जैसे आधुनिक या पीओपी I तारे पैदा हुए थे.
तारों का निर्माण घनी गैस और धूल के विशाल परिसरों में होता है, जैसे कि स्थानीय ब्रह्मांड में ओरियन नेबुला और कैरिना नेबुला. ये नेबुला इसलिए चमकीले होते हैं क्योंकि उनके भीतर मौजूद युवा, बड़े तारों से निकलने वाले प्रकाश से उनकी तारा-निर्माण गैस और धूल प्रकाशित होती है. यह रोशनी मानव आंख को दिखाई देने वाले प्रकाश और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के इंफ्रारेड और रेडियो क्षेत्रों में प्रकाश की लंबी तरंग दैर्ध्य दोनों को कवर करती है.
ALMA ने किया बड़ा खुलासा
बैक्स ने कहा, ‘इस तरह की तरंग दैर्ध्य पर, गैलेक्सी चमकती हुई धूल के बादलों से जगमगाती है.’ उन्होंने बताया, ‘जब हमने देखा कि यह गैलेक्सी अन्य तरंग दैर्ध्य की तुलना में कितनी चमकदार है, तो हम तुरंत समझ गए कि हम कुछ असाधारण देख रहे हैं.’
यह खुलासा ALMA की संवेदनशीलता के कारण संभव हुआ. इसमें उत्तरी चिली के अटाकामा रेगिस्तान क्षेत्र में स्थित 66 रेडियो एंटीना शामिल हैं. इसका बैंड 9 उपकरण प्रकाश की एक विशिष्ट तरंग दैर्ध्य के लिए ट्यून किया गया है. ALMA ने बैक्स और उनके सहयोगियों को यह निर्धारित करने में मदद की कि Y1 की धूल लगभग माइनस 356 डिग्री फ़ारेनहाइट (माइनस 180 डिग्री सेल्सियस) के तापमान पर चमक रही थी.
सामान्य से ज्यादा गर्म है यह गैलेक्सी
- जापान की नागोया यूनिवर्सिटी के टीम सदस्य योइची तमुरा ने कहा, ‘पृथ्वी पर घरेलू धूल की तुलना में यह तापमान निश्चित रूप से ठंडा है, लेकिन यह हमारे द्वारा देखी गई किसी भी तुलनीय गैलेक्सी की तुलना में बहुत गर्म है.’ उन्होंने कहा, ‘इसने पुष्टि की कि यह वास्तव में एक चरम स्टार फैक्ट्री है. भले ही हमने पहली बार इस तरह की गैलेक्सी देखी हो, लेकिन हमें लगता है कि ऐसी और भी गैलेक्सियां हो सकती हैं.’ तमुरा का मानना है कि Y1 जैसी स्टार फैक्ट्री शुरुआती ब्रह्मांड में आम रही होंगी.
- हालांकि, टीम ने 13 अरब साल पहले Y1 को देखा था, जब वह हर साल लगभग 180 सौर द्रव्यमान की अविश्वसनीय दर से तारों का निर्माण और वृद्धि कर रही थी. लेकिन, ब्रह्मांडीय दृष्टि से यह स्टारबर्स्ट अवधि ज्यादा देर तक नहीं चली होगी. हालांकि, वैज्ञानिकों का यह सिद्धांत है कि तीव्र तारा निर्माण या स्टारबर्स्ट की ये अवधियां शुरुआती आकाशगंगाओं में आम रही होंगी, लेकिन वर्तमान में हमारी दृष्टि से छिपी हुई हैं.
- बैक्स ने कहा, ‘हम नहीं जानते कि शुरुआती ब्रह्मांड में ऐसे चरण कितने आम हो सकते हैं, इसलिए भविष्य में हम इस तरह की स्टार फैक्ट्री के और उदाहरण खोजना चाहते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हम यह भी योजना बना रहे हैं कि यह गैलेक्सी कैसे काम करती है, इसे करीब से देखने के लिए ALMA की हाई-रेजोल्यूशन क्षमताओं का यूज करें.’
धूल का पहेली वाला सवाल
Y1 की आगे की जांच से शुरुआती ब्रह्मांड की आकाशगंगाओं के बारे में एक अनसुलझी पहेली का जवाब देने में मदद मिल सकती है. पिछले अध्ययनों से पता चला है कि आदिम आकाशगंगाएं इतनी धूल से भरी हुई हैं जितना उनके तारों की पुरानी आबादी नहीं बना सकती. Y1 का अपेक्षाकृत उच्च तापमान इस पहेली का जवाब दे सकता है, यह सुझाव देता है कि धूल की उच्च मात्रा वास्तव में एक भ्रम है.
फ्लैटिरॉन इंस्टीट्यूट और कोलंबिया यूनिवर्सिटी की टीम सदस्य लौरा सोमोविगो ने कहा, ‘शुरुआती ब्रह्मांड की गैलेक्सियां उनमें मौजूद धूल की मात्रा के लिए बहुत युवा लगती हैं. यह अजीब है, क्योंकि उनमें पर्याप्त पुराने तारे नहीं हैं, जिनके चारों ओर अधिकांश धूल के कण बनते हैं.’
सोमोविगो ने आगे कहा, ‘लेकिन थोड़ी मात्रा में गर्म धूल उतनी ही चमकदार हो सकती है जितनी कि बड़ी मात्रा में ठंडी धूल, और यही ठीक वही है जो हम Y1 में देख रहे हैं.’ उन्होंने निष्कर्ष निकाला, ‘भले ही ये गैलेक्सियां अभी भी युवा हैं और उनमें अभी तक ज्यादा भारी तत्व या धूल नहीं है, लेकिन उनमें जो कुछ भी है वह गर्म और चमकदार दोनों है.’
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