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*कैसे एक विवाद ने चौपट कर दिया आईएएस पूजा खेडकर का पूरा करियर*

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 यह कहानी एक ऐसी महिला की है जो पहले एमबीबीएस डॉक्‍टर बनी. उसके बाद उसे प्रशासनिक सेवा में जाने का शौक हुआ तो उसने संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी की और आईएएस अधिकारी बन गई, लेकिन ट्रेनिंग के दौरान ही जिंदगी में ऐसा भूचाल आया कि पूरा करियर चौपट हो गया. यूपीएससी ने न केवल बर्खास्‍त किया बल्कि केस भी कर दिया. अब वह एक बार फ‍िर सुर्खियों में हैं.पूजा खेडकर की कहानी एक ऐसी युवा महिला की है, जिसने डॉक्टर बनने से लेकर IAS बनने तक का सपना देखा, लेकिन फर्जी दस्तावेजों और नियमों के उल्लंघन के आरोपों ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया. महाराष्ट्र की ये पूर्व IAS प्रोबेशनर अब फर्जीवाड़े के केस में फंसी हैं और हाल ही में उनके पुणे वाले घर में एक अजीबोगरीब चोरी की घटना ने उन्हें फिर सुर्खियों में ला दिया है. ये स्टोरी करियर के उतार-चढ़ाव, महत्वाकांक्षा और गलतियों से भरी है.यह कहानी उन युवाओं के लिए एक वॉर्निंग भी है जो सपने पूरा करने के चक्‍कर में शॉर्टकट के चक्‍कर में पड़ जाते हैं.आइए आपको बताते हैं पूजा खेडकर के आईएएस बनने से उनके बर्खास्‍त होने तक की कहानी

MBBS से UPSC की तैयारी तक

पूजा खेडकर महाराष्ट्र से ताल्लुक रखती हैं. उनका परिवार काफी प्रभावशाली है.उनके पिता दिलीप खेडकर रिटायर्ड अधिकारी हैं और मां मनोरमा खेडकर भी सरकारी सेवा से जुड़ी रही हैं. पूजा ने पहले MBBS किया और डॉक्टर बनीं, लेकिन जांच में ये खुलासा हुआ कि उनका MBBS भी फर्जी दस्तावेजों पर आधारित था. उन्होंने 2012 से UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी शुरू की. इस दौरान उन्होंने कई बार नाम, फोटो, सिग्नेचर, ईमेल, मोबाइल नंबर और यहां तक कि माता-पिता के नाम भी बदले. जांच में खुलासा हुआ कि पूजा ने वर्ष 2012 से 2023 तक कुल 7 बार नाम बदले.ये बदलाव UPSC जांच में सामने आए, जो दिखाता है कि पूजा ने सिस्टम को चकमा देने की कोशिश की.उनका दावा था कि घुटने में दिक्कत की वजह से 47% दिव्यांगता है, लेकिन वो जनरल कैटेगरी से एग्जाम दीं. ये सब इसलिए क्योंकि PwBD (Persons with Benchmark Disabilities) कैटेगरी वालों को यूपीएससी सिविल सर्विसेज परीक्षा में एक्स्ट्रा अटेम्प्ट मिलते हैं. पूजा ने कुल 12 अटेम्प्ट दिए, लेकिन कोर्ट में अपील की कि 7 अटेम्प्ट को नजरअंदाज किया जाए. ये दिखाता है कि उनकी महत्वाकांक्षा कितनी मजबूत थी, लेकिन तरीका गलत साबित हुआ.

UPSC में सफलता: 2022 का रिजल्ट और IAS बनना

2022 में पूजा ने UPSC CSE पास की. पूजा खेडकर ने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 841 हासिल की और उन्हें महाराष्ट्र कैडर में 2023 बैच का IAS बनाया गया.उन्‍होंने मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में ट्रेनिंग पूरी की. पहली पोस्टिंग पुणे में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर मिली.यहां से उनका करियर शुरू हुआ, लेकिन यही वो पॉइंट था जहां सब कुछ बिगड़ना शुरू हो गया.इस सफलता के पीछे कई राज छिपे थे जैसे OBC नॉन-क्रीमी लेयर और डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट में गड़बड़ी. पूजा ने एड्रेस, फोटो और अन्य डिटेल्स बदलकर एग्जाम दिए जो UPSC की जांच में साफ हो गया. ये स्टेज दिखाती है कि कैसे एक MBBS बैकग्राउंड वाली मेधावी स्टूडेंट सिविल सर्विसेज में एंट्री लेती है, लेकिन फर्जीवाड़े की वजह से सब कुछ दांव पर लग जाता है.

पुणे पोस्टिंग में विवाद: पावर का मिसयूज और तबादला

पुणे में असिस्टेंट कलेक्टर बनते ही पूजा पर आरोप लगे कि उन्होंने स्पेशल सुविधाएं मांगीं.उन्‍होंने अलग चेंबर, सरकारी आवास, कार और स्टाफ की मांग कर डाली.उनकी निजी कार पर लाल-नीली बत्ती और महाराष्ट्र सरकार का स्टिकर लगाकर घूमने के मामले ने भी तूल पकड़ लिया.इन सब बातों को लेकर उनका स्‍थानीय कलेक्टर से झगड़ा भी हुआ जिसके बाद डीएम ने उनकी शिकायत मुख्यमंत्री के सचिव से की.नतीजा यह हुआ कि पूजा का तबादला पुणे से वाशिम कर दिया गया.ये घटना करियर के शुरुआती दिनों में आई जो दिखाती है कि प्रोबेशन पीरियड में अथॉरिटी का गलत इस्तेमाल कितना महंगा पड़ सकता है. पूजा की ये हरकतें मीडिया में आईं और यहीं से उनके पिछले रेकॉर्ड्स की जांच शुरू हुई.

फर्जी सर्टिफिकेट स्कैंडल: UPSC जांच और बर्खास्तगी

महाराष्ट्र सरकार की जांच में पूजा पर कई आरोप साबित हुए.UPSC CSE-2022 में पर्सनल इंफॉर्मेशन छिपाना, फेक डिसएबिलिटी सर्टिफिकेट लगाना और OBC/PwBD कैटेगरी का गलत फायदा उठाना. UPSC ने अपनी जांच की जिसमें नाम बदलने, माता-पिता के नामों में हेरफेर और अन्य बदलावों का खुलासा हुआ. नतीजा यह हुआ कि UPSC ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया और लाइफटाइम बैन लगा दिया.वह कभी UPSC एग्जाम नहीं दे सकतीं और केंद्र सरकार ने सितंबर 2024 में IAS से बर्खास्त कर दिया.इसके अलावा परिवार के पुराने केस भी सामने आए जैसे नवी मुंबई में रोड रेज का मामला, जहां दिलीप और मनोरमा खेडकर पर ट्रक ड्राइवर के अपहरण का केस दर्ज हुआ. ये सब मिलाकर पूजा की इमेज को और खराब किया. ये चैप्टर करियर में एक बड़ा सबक है.ईमानदारी की कमी से कितनी जल्दी सब कुछ खत्म हो सकता है.

FIR, जमानत और सुप्रीम कोर्ट की राहत

UPSC ने दिल्ली में पूजा के खिलाफ FIR दर्ज कराई. दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी और कहा कि ये UPSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था और समाज के खिलाफ बड़ा धोखा है.दिल्ली पुलिस ने 4 सितंबर को स्टेटस रिपोर्ट दी जिसमें पूजा खेडकर के गिरफ्तारी की मांग की गई. पूजा पर आरोप थे कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया, लेकिन मई 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने पूजा को राहत दी और अग्रिम जमानत मंजूर करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगा दी.कोर्ट ने कहा कि ये कोई हत्या या बड़ा अपराध नहीं है. जांच तेजी से पूरी हो और पूजा सहयोग करें.अभी इस मामले में जांच चल रही है और गिरफ्तारी नहीं हुई है.पूजा की तरफ से कोई नया बयान नहीं आया. ये दिखाता है कि लीगल सिस्टम में कैसे एक व्यक्ति लड़ सकता है, लेकिन करियर पर दाग हमेशा रह जाता है.

पुणे बंगले में चोरी और परिवार को बांधने का आरोप

जनवरी 2026 में पूजा फिर चर्चा में आईं, लेकिन इस बार वजह UPSC केस से अलग थी.11 जनवरी की रात पुणे के बनर रोड स्‍थित नेशनल हाउसिंग सोसाइटी वाले बंगले में घटना हुई. पूजा ने चतुःश्रृंगी पुलिस को बताया कि हाल ही में हायर की गई नेपाल मूल की घरेलू नौकरानी ने खाने-पीने में बेहोशी की दवा मिलाई. इससे पूजा, माता-पिता दिलीप और मनोरमा, ड्राइवर, वॉचमैन और कुक बेहोश हो गए.नौकरानी ने उन्हें बांधा, मोबाइल फोन और अन्य कीमती सामान चुराकर भाग गई.पूजा खुद को छुड़ाकर दूसरे फोन से पुलिस को सूचना दी.पुलिस मौके पर पहुंची बेहोश लोगों को अस्पताल ले गई, और जांच शुरू की, लेकिन अभी तक लिखित FIR नहीं दर्ज हुई.सिर्फ मौखिक शिकायत की गई. पुलिस CCTV चेक कर रही है और नेपाल से आए 7 संदिग्धों की तलाश में है. ये घटना काफी संदेहास्पद लगती है, क्योंकि पूरे परिवार और स्टाफ को एक साथ बेहोश करना आसान नहीं.

करियर सबक: महत्वाकांक्षा vs ईमानदारी-क्या सीखें?

पूजा खेडकर की कहानी ये दिखाती है कि UPSC जैसी परीक्षाओं में सफलता के लिए कड़ी मेहनत जरूरी है, लेकिन शॉर्टकट जैसे फर्जी सर्टिफिकेट से सब कुछ बर्बाद हो सकता है. उनकी जर्नी से सीख ये मिलती है कि
– नियमों का पालन करें, चाहे कितनी भी चुनौतियां हों.
– दिव्यांगता या आरक्षण का गलत फायदा न लें.ये सिस्टम को कमजोर करता है.
– प्रोबेशन पीरियड में अथॉरिटी का सही इस्तेमाल करें.
– लीगल लड़ाई से राहत मिल सकती है, लेकिन रेपुटेशन हमेशा दागदार रह जाता है.

अगर आप UPSC या सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं, तो पूजा की गलतियां से बचें.ये स्टोरी एक वॉर्निंग है कि सपने पूरे करने में ईमानदारी सबसे बड़ा हथियार है.

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Ramswaroop Mantri

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