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वी.पी. सिंह और अर्जुन सिंह: सामाजिक न्याय के दो योद्धा

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वी.पी. सिंह और अर्जुन सिंह: सामाजिक न्याय के दो योद्धा जिनका इतिहास मौन है

भारतीय राजनीति में वी.पी. सिंह और अर्जुन सिंह दो ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए। हालांकि, आज उनकी विरासत को बहुत कम याद किया जाता है, जबकि उनके निर्णयों ने भारतीय राजनीति और समाज की दिशा बदल दी।

  1. वी.पी. सिंह: मंडल आयोग और ओबीसी क्रांति

मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कर ओबीसी को हक दिलाया

वी.पी. सिंह, जो 1989 में भारत के प्रधानमंत्री बने, ने सबसे ऐतिहासिक निर्णय लिया— मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करना। इस आयोग की सिफारिशें 1979 में तैयार की गई थीं, लेकिन इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों ने इन्हें लागू करने से बचा।

मंडल आयोग क्या था?

1950 में संविधान लागू होने के बाद अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण मिला।

लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), जो भारत की एक बड़ी आबादी था, उनके लिए कोई ठोस आरक्षण नीति नहीं बनी थी।

1979 में मोरारजी देसाई सरकार ने बिन्देश्वरी प्रसाद मंडल की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया, जिसने 1980 में अपनी रिपोर्ट दी।

इस रिपोर्ट में बताया गया कि भारत की 52% जनसंख्या OBC श्रेणी में आती है और इनके लिए 27% आरक्षण की सिफारिश की गई।

वी.पी. सिंह का ऐतिहासिक फैसला (1990)

जब वी.पी. सिंह प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने 7 अगस्त 1990 को ऐतिहासिक घोषणा की कि सरकारी नौकरियों में OBC के लिए 27% आरक्षण लागू किया जाएगा।

इससे पिछड़े वर्गों को पहली बार सरकारी सेवाओं में प्रतिनिधित्व मिलने लगा।

हालांकि, इस फैसले के खिलाफ देशभर में भीषण विरोध हुआ।

सवर्ण छात्रों ने आरक्षण के खिलाफ प्रदर्शन किए, और कई जगह हिंसा हुई।

दिल्ली में एक राजपूत छात्र, राजीव गोस्वामी, ने आत्मदाह करने की कोशिश की, जिससे आंदोलन और तेज हो गया।

इसके बावजूद, वी.पी. सिंह अपने फैसले पर अडिग रहे।

वी.पी. सिंह को सत्ता से क्यों जाना पड़ा?

आरक्षण लागू होते ही सवर्ण वर्ग वी.पी. सिंह से नाराज हो गया।

भाजपा, जो तब वी.पी. सिंह सरकार को समर्थन दे रही थी, उसने अपना समर्थन वापस ले लिया।

इस कारण वी.पी. सिंह सरकार गिर गई, लेकिन उन्होंने इतिहास रच दिया।

आज सरकारी नौकरियों में OBC का जो भी प्रतिनिधित्व है, वह वी.पी. सिंह की वजह से है।

  1. अर्जुन सिंह: शिक्षा में आरक्षण का जनक

OBC को उच्च शिक्षा में 27% आरक्षण दिया

2004 में जब कांग्रेस सत्ता में आई, तो अर्जुन सिंह मानव संसाधन विकास मंत्री (HRD Minister) बने।

उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट के आधार पर IIT, IIM, मेडिकल कॉलेज और अन्य उच्च शिक्षण संस्थानों में भी OBC के लिए 27% आरक्षण लागू किया।

2006 में यह आरक्षण लागू हुआ, जिससे OBC छात्रों को उच्च शिक्षा में प्रवेश मिलने लगा।

विरोध और आंदोलन

जैसे ही यह निर्णय लिया गया, मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्रों (खासकर सवर्ण) ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए।

“Youth for Equality” नामक संगठन बना जिसने आरक्षण के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया।

डॉक्टरों और छात्रों ने हड़तालें कीं, लेकिन कांग्रेस सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला।

अर्जुन सिंह को भारी आलोचना झेलनी पड़ी, लेकिन उन्होंने सामाजिक न्याय की इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाया।

  1. इन दोनों नेताओं को आज कोई क्यों याद नहीं करता?
  2. भारतीय राजनीति की जातीय ध्रुवीकरण में OBC नेतृत्व कमजोर पड़ गया

वी.पी. सिंह और अर्जुन सिंह जाति के आधार पर राजनीति नहीं करते थे, बल्कि सामाजिक न्याय के सिद्धांत पर चलते थे।

OBC राजनीति ने बाद में खुद को क्षेत्रीय दलों तक सीमित कर लिया।

मुलायम सिंह, लालू यादव, नीतीश कुमार जैसे नेता OBC के नए प्रतीक बन गए, लेकिन उनकी राजनीति मंडल युग की तुलना में कमजोर रही।

  1. कांग्रेस और भाजपा ने इनकी विरासत को भुला दिया

कांग्रेस ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम गठजोड़ (Brahmin-Dalit-Muslim) की राजनीति पर केंद्रित रही, जिससे अर्जुन सिंह जैसे नेताओं को भुला दिया गया।

भाजपा ने हिंदुत्व के एजेंडे के तहत जाति-आधारित राजनीति से दूरी बना ली और OBC को हिंदुत्व की छतरी में लाने की कोशिश की।

  1. सवर्ण वर्ग ने हमेशा इनके योगदान को नकारा

OBC आरक्षण को लेकर अभी भी एक मानसिक विरोध है।

सवर्ण वर्ग का एक बड़ा तबका इन दोनों नेताओं को “जातिवादी” समझता है, जबकि इन्होंने केवल न्याय की बात की थी।

  1. सवर्णों का मीडिया नियंत्रण और सामाजिक धारणा

मुख्यधारा का मीडिया आरक्षण विरोधी नैरेटिव को बढ़ावा देता रहा है।

सोशल मीडिया पर भी आरक्षण विरोधी अभियान चलाए जाते हैं, जिससे नए युवा इन नेताओं के योगदान से अनजान रहते हैं।

निष्कर्ष: राजा साहब का न्याय और मौन इतिहास

वी.पी. सिंह और अर्जुन सिंह ने भारत में सामाजिक न्याय की नींव रखी, लेकिन भारतीय राजनीति की भूलने की आदत ने इन नेताओं को इतिहास के पन्नों में पीछे छोड़ दिया।

आज OBC आरक्षण के कारण लाखों युवा सरकारी नौकरी और उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह किन नेताओं की वजह से संभव हुआ।

आज जब कोई कहता है कि “सुप्रीम कोर्ट में ठाकुर नहीं हैं, क्योंकि उनमें न्याय की भावना होती है”, तो यह कटाक्ष केवल वर्तमान स्थिति पर नहीं, बल्कि उन ऐतिहासिक नेताओं की अनदेखी पर भी है, जिन्होंने जातीय अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी।

Ramswaroop Mantri

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