भोपाल)। ग्वालियर-चंबल संभाग के अपने आपको कद्दावर नगता मानने वाले नरेंद्र सिंह तोमर की मध्यप्रदेश के भाजपा अध्यक्ष होने की क्षमता को देखते हुए और ग्वालियर-चंबल संभाग के तत्कालीन कांग्रेसी नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के वर्चस्व को कम करने के उद्देश्य से ही नहीं बल्कि मोदी मंत्रीमण्डल में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के राजपूतों में प्रभाव कम करके अपना वर्चस्व बनाने के साथ-साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली को परखने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेताओं ने उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में पार्टी की साख बनाने के उद्देश्य से सबसे महत्वपूर्ण विभाग ग्रामीण विकास विभाग सौंपकर उन्हें मंत्रिमण्डल में शामिल किया लेकिन नरेंद्र सिंह तोमर अपनी कार्यशैली के चलते न तो भाजपा के नेताओं पर प्रभाव जमा पाये और न ही ग्वालियर-चंबल संभाग के तत्कालीन नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के वर्चस्व को कम कर पाये और न ही राजनाथ सिंह के प्रभाव पर कोई असर डालने का काम में असफल तो रहे ही हैं तो वहीं शिवराज सिंह चौहान के शासन की कार्यशैली को बदलने में वह खरे नहीं उतरे
यही वजह है कि हाल ही में मोदी मंत्रिमण्डल के विस्तार के दौरान प्रहलाद पटेल और अन्य मंत्रियों की तरह भी इनसे भी वह विभाग छीनकर दूसरों को दे दिये गये जिन विभागों में नरेंद्र सिंह तोमर की कार्यशैली के चलते प्रधानमंत्री मोदी की साख पर वह खरे उतरे और न ही पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग जिसके प्रभाव क्षेत्र में देश की ७० प्रतिशत आबादी आती है उस ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से जहां पंचायतों का विकास होता ही है साथ ही पंचायत विभाग के अंतर्गत चलाये जाने वाले ग्रामीणों के लिये रोजगार के लिये मनरेगा में वह भ्रष्टाचार कम कर सके, हालांकि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री पद से उन्हें शुरू से ही नवाजा गया था लेकिन समय-समय पर मंत्रियों द्वारा त्यागपत्र दिये जाने से उन्हें कृषि विभाग जैसा महत्वपूर्ण विभाग मिला जो इस समय वर्तमान मंत्रिमण्डल विस्तार के दौरान नरेंद्र सिंह तोमर से इसलिये नहीं छीना गया क्योंकि इसे हटाने से देश के किसान व उनके समर्थन करने वाले लोगों को यह मैसेज जाता कि शायद सरकार किसानों से संबंधित तीन विधेयक वापस ले रही है या संशोधन करने की बात सोच रही है इसी के चलते उनके पास कृषि विभाग बना रहा। कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी मंत्रिमण्डल के विस्तार के बाद कई मंत्रियों के पर करते गए और कईयों को बहाल किया गया यदि भाजपा के सूत्रों पर भरोसा करें तो नरेंद्र सिंह तोमर को अन्य शक्तिशाली रविशंकर प्रसाद व प्रकाश जावड़ेकर जैसे प्रभावशाली नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने की तरह नरेंद्र सिंह तोमर को भी बाहर करने की चर्चा चली थीं लेकिन कृषि विभाग इनके पास होने के कारण इन्हें मंत्री पद से हटाया गया और न ही इन्हें बदला गया क्योंकि नरेंद्र सिंह तोमर के साथ की जाने वाली इस तरह की कार्रवाई से नरेंद्र मोदी की सरकार व भाजपा की सरकार की छवि खराब होगी,
यह सोचकर इन्हें मंत्रिमण्डल से बाहर का रास्ता नहीं दिखाया गया कुल मिलाकर भाजपा नेताओं में इन दिनों जो चर्चा का दौर चल रहा है उसे यदि सही माना जाये तो नरेंद्र तोमर से नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेताओं में कुछ असंतोष पनप रहा है उसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जिन नरेंद्र तोमर के लंबे समय तक प्रदेशाध्यक्ष की कार्यशैली में निपुण समझते हुए उन्हें पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का दायित्व सौंपा गया था लेकिन एक लंबे समय तक यह विभाग नरेंद्र सिंह तोमर के पास रहने के बाद वह अपनी कार्यशैली के चलते नरेंद्र मोदी सरकार की और भाजपा की साख ग्रामीण क्षेत्र में नहीं बना पाये इसी की वजह यह माना जा रहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले किसानों में असंतोष पनपा और वह असंतोष हालांकि किसानों के लाये गये तीन कृषि विधेयकों के कारण आज यह स्थिति है कि लंबे समय तक यह आंदोलन जारी है और इसे कृषि मंत्री की जिम्मेदारी होने के नाते वह किसानों में फैले असंतोष को खत्म करने में सफल नहीं हो पाये। कुल मिलाकर भाजपा नेता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह मानते हैं कि नरेंद्र तोमर की कार्यशैली की बदौलत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में जो ७० प्रतिशत आबादी रहती है न तो तोमर अपने प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी की साख बना पाये और न ही भाजपा की यही वजह है कि इनसे मजबूरी में कृषि विभाग की जिम्मेदारी सौंपकर मंत्रिमण्डल में बनाये रखा क्योंकि इन्हें हटाने से किसानों में यह संदेश जाता कि सरकार ने हमारे अंादोलन से भयभीत होकर कृषि मंत्री को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। हालांकि भाजपा के नेताओं से जुड़े सूत्र बताते हैं कि नरेन्द्र सिंह तोमर की मध्यप्रदेश की कार्यक्षमता को देखकर इन पर भरोसा करके नरेंद्र मोदी और भाजपा के नेताओं ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का दायित्व सौंपा था उसमें वह खरे नहीं उतर सके।
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