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मंत्रालय का नवीनीकरण

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“नित नए मंत्रालय बनातें चलों, और जनता पर बोझ बढाते चलो।”

शशिकांत गुप्ते

आश्चर्यजनक मुद्दा है,नया मंत्रालय बनेगा,वो भी तो सहयोग मंत्रालय?योग मंत्रालय भी बना दो, इस मंत्रालय के लिए तो लालाराम उद्योगपति उपलब्ध ही हैं।एक प्रवक्ता मंत्रालय भी बनना चाहिए?प्रवक्ता मंत्रालय में जो प्रवक्ता नियुक्त होंगे उन्हें पूर्व की सरकारों की आलोचना करने का आधिकारिक हक़ प्राप्त होगा।देश के प्रथम प्रधानमंत्री के धर्म को लेकर मनगढ़ंत वक्तव्य देने की स्वतंत्रता होगी?बुनियादी मुद्दों से बहस को किस तरह गुमराह करना,यह योग्यता रखने वालें व्यक्ति को ही प्रवक्ता बनने की पात्रता होगी?मुद्दा है, सहयोग मंत्रालय बनाने का इस मंत्रालय के अंतर्गत सहकारिता विभाग भी समाहित होगा।इस मंत्रालय का सर्वेसर्वा अ…न..धा बांटे रेवड़ी अपने अपनो….. को ही दे।इस कहावत को चरितार्थ करने वाला होगा।

सहयोग की पराकाष्ठा तो सभी प्रत्यक्ष देख चूके हैं।एक अबला की अस्मत लूटने का जंघन्य कांड होने पर उसके परिवार को स्थानीय पुलिस प्रशासन ने सहयोग करते हुए अबला के शव का अर्धरात्रि अंतिम संस्कार कर दिया।इससे बड़ा सहयोग और क्या हो सकता है?इस पर कुछ आलोचकों का मत है कि, हिन्दू नाम के धर्म में सर्यास्त के बाद दाह संस्कार वर्जित है।ये आलोचक,यह भूल जातें हैं कि जिस सूबे में यह घटना घटित हुई है,उस सूबे के कर्ताधर्ता महान योगी ही है?सहयोग मंत्रालय से सहयोग प्राप्त करने की पात्रता के लिए जाति के प्रमाण पत्र के साथ धर्म का प्रमाण पत्र भी जरूरी हो सकता है?सहयोग प्राप्त करने की पात्रता आरक्षण वालों को होगी अथवा नहीं, यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है।इस पर कुछ टिकाटिप्पणी करना जोख़िम का काम हो सकता है?इस मुद्दे को छेड़ना मतलब मधुमखियों के छत्ते की छेड़खानी करने जैसा हो सकता है?इसीलिए इस मुद्दे को समय पर छोड़ना ही समझदारी होगी?

सहकारिता क्षेत्र की साख संस्थाओं की स्थिति सर्वविदित है।मध्यप्रदेश की व्यापारिक राजधानी अहिल्या की नगरी में एक विप्रवर्ण के समूह की सहकारी बैंक डूब गई।इस बैंक के डूबने में बहुत से रसूखदारों का सहयोग रहा है,ऐसा आलोचना करने वालों का आरोप है?इस के बैंक डूबने पर जिन लोगों अपनी मेहनत से की गाढ़ी कमाई को अपनी आँखों से डूबते देखा उनके मुँह से आह निकलने के साथ यह उदगार भी निकले कि,

*हमें अपनो ही लुटा,गैरो में कहाँ दम था**हमारी कश्ती वहीँ डूबी जहाँ पानी कम था*

एक मंत्रालय आई.टी.का भी होना चाहिए।यह मंत्रालय टेक्नोलॉजी के जरिए सत्ता की सिर्फ और सिर्फ उपलब्धियों की इम्फार्मेशन आमजन को देते रहेगा।यह मंत्रालय,सबसे प्रथम यह सूचना प्रसारित करेगा कि,सन 1947 से 2014 तक का इतिहास शून्य है।2014 के पूर्व,महंगाई डायन थी।अब वही महंगाई प्रिय सखी हो गई है।विकास के लिए इतनी कुर्बानी तो आम जनता को देनी ही चाहिए।विदेशी नागरिकता प्राप्त अभिनेता इस मंत्रायल के प्रमुख हो सकतें हैं।ये अभिनेता टेक्नोलॉजी के माध्यम से आमजन को यह सूचना प्रसारित करेंगे कि,आम को चूस कर या काट कर खाना चाहिए?एक  महान अभीनेता आमजन को महंगा पेट्रोल क्रय करने के लिए बैंक से ऋण उपलब्ध करवाएंगे।इस तरह मंत्रिमंडल का विस्तार होना चाहिए

।इसे कहतें हैं *Minimum government and maximum governance*

Ramswaroop Mantri

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