मैं देख रहा था उसे
वह एक चिड़ा था
बहुत देर से
अपनी चोंच लड़ा रहा था
आईने से।
एकड़ा,
बरदाश्त नहीं कर पा रहा था
होना किसी दूसरे नर का
उसके आस पास
यहाँ तक कि
आईने में
खुद उसका
अपना प्रतिबिम्ब भी।
चिड़ियाएं कभी नही लड़ती
इस तरह
पाल लेती हैं
चूजों को
माँएं मौंसियाँ बन कर
उनके लिए तो
निमित्त मात्र होता है नर।
पुरुषों ने अपनी चालाकी से
बदल दिए
नैसर्गिक नियम
लड़ा दिया
स्त्रियों को आपस में
पुरुष पर
काल्पनिक
एकाधिकार के लिए
सौत
या फिर
सास बहू बना कर।
-रामकिशोर मेहता , संपर्क - 919408230881, ईमेल - ramkishoremehta9@gmail.com
संकलन -निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद,



