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प्रधानमंत्री जी, इन उट पटांग हरकतों को रोकिए

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चंचल भू,  जोनपुर

प्रिय  प्रधानमंत्री जी ! 

     जनाब यह खत संघ प्रचारक नरेंद्र दामोदर मोदी के नाम नही है , यह पत्र भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम है । आप के नाम से चलने वाले, अनेक ‘प्रचारी संगठन’ अक्सर ऊट पटांग लिखते,  बोलते रहते हैं और आप मजाक के विषय बनते हैं । अभी हाल में जब समूचा देश 9 अगस्त 1942 की याद में  ‘भारत छोड़ो ‘ आंदोलन का उत्सव मना रहा है,  ऐसे में एक संगठन (?) www.modiforpm.org  नाम से एक पोस्टर जारी किया है । ‘अगस्त क्रांति दिवस’ के नाम से।आप मेहरबानी करके इस पोस्टर को तत्काल प्रभाव से वापस करा लें  क्योँ  कि-  इस पोस्टर में  जबरदस्त ऐतिहासिक गलतियां हैं । तुर्रा यह कि जो  ‘लिखत सामग्री’  है , वह तो अगस्त क्रांति ( 9 अगस्त भारत छोड़ो )  की है,  लेकिन जो चित्र दिए गए हैं उनका अगस्त क्रांति से दूर दूर तक कोई लेना देना नही है हद तो तब हो गयी जब अगस्त क्रांति के खिलाफ , 1942 विद्रोह के खिलाफ जो अंग्रेजी हुकूमत का साथ दे रहे थे , उनका भी चित्र इस पोस्टर में है । मसलन हिन्दू महासभा के नेता सावरकर ।  हमे सावरकर से कोई मोह या लगाव नही है लेकिन ये जो  कथित तौर पर आपके शुभेक्षु बने,  इतिहास को तोड़ मरोड़ रहे हैं ये आपका ही नुकसान कर रहे हैं । अब इन चित्रों की बानगी देखिये – 

    सुभाषचंद बोस – जिस समय  9 अगस्त  42 का भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ और 46 तक चला उस समय  नेता जी जापान में हैं । इतना जरूर रहा कि कि सुभाषचंद बोस , महात्मा गांधी जो भारत छोड़ो आंदोलन के जनक  हैं  ,को पत्र लिखकर न केवल बापू की तारीफ करते है,  बल्कि अपने रेडियो प्रसारण में महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता कह कर संबोधित करते है ।  

       * बाल गंगाधर  तिलक – तिलक की मृत्यु अगस्त क्रांति से 22 साल पूर्व  1 अगस्त 1920 को  हो चुकी है ।  

        * सावरकर –  सावरकर न केवल अगस्त क्रांति से बाहर हैं , बल्कि अपनी भाषा और कर्म दोनो से

  क –  खुल कर अंग्रेजो का साथ दे रहे थे /

ख – कांग्रेस का नारा था – क्विट इंडिया यानी अंग्रेजो भारत छोड़ो , इस नारे के विरोध और अंग्रेजो के समर्थन में हिन्दू महा सभा की तरफ से सावरकर ने ‘ स्टिक योर पोस्ट ‘ 

यानी अपनी कुर्सी पर बने रहो का पोस्टर आता है । इस पोस्टर में  सावरकर का जिक्र करके ये कुपढ लोग आपको मजाक का विषय बना रहे  है।    

   * भगत सिंह ,  को अंग्रेजी सरकार ने 23 मार्च 1931 को ही फांसी पर लटका दिया था ।  

  * चंद्रशेखर आजाद  अंग्रेजी पुलिस के साथ एक मुठभेड़ में खुद को गोली मारकर शाहिद हो चुके थे , यह तारीख है 42 के अगस्त क्रांति के 11 साल पहले 27 फरवरी 1931 । 

       जनाब मोदी साहिब ! आप दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के  मुखिया है । आपके हर कदम को दुनिया टटोलती रहती है । आप के नाम पर , आपकी तस्वीर के साथ,  ऐसे पोस्टर  देश को , देश की ज्ञानपरिधि को और खुद आपके पद को लांछित करता है इसे रोकिए ।       शुक्रिया
चंचल भू,  जोनपुर

Ramswaroop Mantri

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