1950 में ही भारत के राजदूत
कर चुके हैं अध्यक्षता
★ अल्फ़ाबेटिक ऑर्डर में हर ग़ैर स्थायी
सदस्य देश को मिलता है अवसर।
★ आयरलैंड, ट्यूनीशिया, नायज़र जैसे छुटकू छुटकू देश भी करेंगे अध्यक्षता।
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद UNSC की अध्यक्षता कर रहे हैं। हल्ला मचा हुआ है कि ऐसा पहली बार हो रहा है। दावा है कि ‘आज से दुनिया की कमान भारत के हाथ में’ आ गयी है।
लेकिन हक़ीक़त ये है कि भारत 1950 में ही अध्यक्षता कर चुका है।
आइये इस दावे की पड़ताल करते हैं।
०हर ग़ैर स्थायी सदस्य करता है अध्यक्षता
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों के अलावा अन्य देशों को ग़ैर स्थायी सदस्य के रूप में शामिल होने का अवसर मिलता है। इन्हें Non Permanent मेंबर कहा जाता है। इस तरह के सदस्यों का कार्यकाल दो साल होता है।अपना क्रम आने पर उंस देश का प्रतिनिधि सुरक्षा परिषद के विमर्श(डिबेट) की अध्यक्षता करता है।
इन देशों के राष्ट्राध्यक्ष या राजदूत अपना क्रम आने पर सुरक्षा परिषद की मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हैं। यह क्रम अल्फाबेटिक आधार पर तय होता है।यह कैलेंडर साल शुरू होने से पहले जारी हो जाता है।
इस साल के लिये जो क्रम और माह तय हैं उनमें आयरलैंड, ट्यूनीनिशिया,वियतनाम, एस्टोनिया, केन्या, मेक्सिको,नाइजर के नाम तय हैं। अमेरिका,चीन, ब्रिटेन तो हैं हैं।
इसी क्रमानुसार अगस्त का महीना भारत की अध्यक्षता के लिये तय हुआ।
० सात बार अध्यक्षता कर चुका है भारत
आज़ादी के बाद भारत अब तक कुल सात बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता कर चुका है। सबसे पहले यह अवसर 1950-51 में आया था।
तब संयुक्त राष्ट्र में तत्कालीन राजदूत सर बेनेगल नरसिंहराव ने सुरक्षा परिषद की बैठक की अध्यक्षता की थी।
इसके बाद 1967-68, 1972-72, 1977-78, 1984-85 , 1991-92 और 2011-12 में भी ऐसा अवसर आ चुका है। आमतौर पर विदेश मंत्री या संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत यह दायित्व निभाते रहे हैं। कोई प्रधानमंत्री पहली बार यह दायित्व निभा रहा है।
इस बार की ग़ैर स्थायी सदस्यता पिछले साल ही तय हो गयी थी। यह सदस्यता दो साल के लिये है।
रोस्टर के हिसाब से अगले साल एक बार और अध्यक्षता का मौका आएगा।
स्पष्ट है कि अगर आज दुनिया की कमान भारत के हाथ में आ गयी है तो अगले महीने आयरलैंड के हाथ में होगी।
एक जिज्ञासा है…
क्या ट्यूनीशिया,नायज़र, केन्या जैसे छोटे छोटे देशों में इस औपचारिक अध्यक्षता पर ऐसा हल्ला मचा होगा जैसा अपने यहाँ मचा है??
बस जिज्ञासा है बाक़ी तो जो है सो हैइये है।
हरनाम सिंह की पोस्ट





