एस. ज़ेड.मलिक (पत्रकार)
चंडीगढ़ – कांग्रेस की आला कमान ने शयेद 1994 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की हत्या के बाद यानी 22 वर्षों को राजनीतिक जीवन में पहली बार राजनीतिक तजुर्बा का इस्तेमाल राजनीतिक अखाड़े में राजनीतिक दाव मार कर पंजाब के अन्य दलों को चित करने की कोशिश की है।जैसा कि इस समय पंजाब के राजनीतिक अखाड़े में कांग्रेस के दिग्गजों में हल-चल, ऊहा-पोहा, असमंजसता की बे तरतीब अस्थिरता की स्थिति पैदा हो गई थी उन तमाम स्थिति पर पहली बार दलित समुदाय के एक ऐसे नेता को चुन कर राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी सौंप कर 0विराम लगा दिया।
पंजाब कांग्रेस में अचानक सा यह बदलाव देख कर सारे पंजाब यहां कांग्रेस के दिल्ली दरबार मे भी हत्त-परत हैं। कांग्रेस की अला कमान ने दलित समुदाय से एक नेता चरणजीत सिंह चन्नी को निकाल कर सभी को अचंभित कर दिया है। जबकि कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफ़े के बाद कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के लिए नवजोत सिंह सिद्धू, सुनील जाखड़, अंबिका सोनी और सुखजिंदर सिंह रंधावा के नामों पर अफवाहों का बाज़ार गर्म था, लेकिन कांग्रस हाई कमान ने पंजाब के नए मुख्यमंत्री के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी के नाम का एलान करके सबको चौंका दिया।
जिसे हाँथ पकड़ कर घर मे लाया – आज उसी के हाँथ में घर का ज़िम्मीदार बन गया ? दरअसल चमकौर साहिब विधानसभा से तीसरी बार विधायक बने चरणजीत सिंह चन्नी पहली पीढ़ी के राजनेता हैं।
साल 2007 में चन्नी ने पहली बार स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में विधानसभा का चुनाव जीता था, तब कैप्टन ने शयेद कांग्रेस में अपनी शाख मज़बूत करने के विचार से उन्हें कांग्रेस में शामिल करा लिया, उसके बाद उन्हें साल 2012 कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया कर विधानसभा चुनाव लड़वाया और उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर पहलीबार जीत हासिल कर कांग्रेसी विधायक कहलाये। तब पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को यह पता नहीं था कि जिसे मैं घर मे जगह दे रहा हूँ वही उस घर एक एक दिन मालिक बन जायेगा?
लेकिन अब इसका असर कांग्रेस पर क्या पड़ेगा ? यह एक विचारणीय मुद्दा है । सवाल है कि क्या चन्नी पंजाब कांग्रेस को या पंजाब साशन सम्भाल पायेंगे ? क्या पंजाब की जनता चन्नी को अपना नेता या अपना मुख्यमंत्री स्वीकार करेगी ?
कांग्रेस का कमाल – इशारों को अगर समझो , जान कर राज़ रहने दो





