शशिकांत गुप्ते
नोकरशाह Bureaucrats अर्थात पढेलिखे प्रशासनिक अधिकारी होतें है।एक धार्मिक आस्थावान स्त्री ने इनकी औक़ात की तुलना पाँव में पहनने वाले स्त्रीलिंगी आभूषण से कर दी?
यह समाचार सूत्रों से ज्ञात नहीं हुआ।धार्मिक स्त्री के स्वयं के मुखारबिंद निकले उदगार हैं।लेखक इससे सहमत नहीं हैं।एक धार्मिक स्त्री जिसने राजनीति में सक्रिय होकर महत्वपूर्ण मंत्री पदों को सुशोभित किया हो, वह विवादास्पद और अपरिपक्वतापूर्ण बयान दे नहीं सकती है?
इनदिनों सामाचारों की विश्वसनीयता पर प्रश्न उपस्थिति होता है।इनदिनों समाचार खोज खबर करके प्राप्त नहीं किए जातें हैं,बल्कि गढ़े जातें हैं।सूत्रों का हवाला देकर समाचार प्रस्तुत किए जातें हैं।सूत्र को अंग्रेजी में कहतें है Formula.
गणित में सूत्रों के माध्यम से कठिन सवालों को हल किया जाता है,और विज्ञान में सूत्रों के आधार पर अनुसंधान में मदद मिलती है।
सूत्रों के आधार पर सामाचारों को प्रस्तुत करने का प्रचलन मतलब सूत्रों (फार्मूला) को माध्यम बनाकर पत्रकारिता के नाम पर Formality अर्थात औपचारिकता का निर्वाह किया जा रहा है।
उक्त आचरण लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ को कमजोर करने की साज़िश जैसा प्रतीत होता है?
पत्रकारिता का इतिहास स्वर्ण अक्षरों में लिखने जैसा है।स्वतन्त्रता संग्राम में पत्रकारिता की अहम भूमिका रही है।स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तात्कालिक नेता या मंत्री पत्रकारों से चर्चा करतें समय बहुत ही सजग रहतें थे।ऐसा भी कह सकतें हैं कि, पत्रकारों से डरतें थे।
सत्तर और अस्सी के दशक में सामाचार माध्यमो द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर विपक्ष सत्ता को घेरता था।सत्ता को अपने मंत्रियों पर जांच बैठाने को बाध्य होना पड़ता था।
अब तो समाचार माध्यम धनकुबेरों की निजी सम्पत्ति हो गएं हैं।
सत्ता के साथ धनकुबेरों की सांठगांठ का आरोप लगता है?
यह आरोप भी सूत्रों के माध्यम से लगता है?सूत्र अपने आप में सवाल हैं?
सूत्र और औपचारिकता के परिणाम के कारण पत्रकारिता का आचरण सामंती युग के एक राजा के द्वारपाल के विनोदी किस्से जैसा प्रतीत होता है?
एक राजा के द्वारपाल मतलब चौकीदार (इनदिनों चौकीदार शब्द प्रयोग भी जोखिम भरा है) ने राजा से निवेदन कर आगाह किया कि, महाराज आज आप शिकार करने मत जाइए। मैंने सपने में देखा है कि, आज आप शिकार करने जाएंगे तो आप के साथ कोई अनिष्ठ होने की सम्भवना है।राज ने द्वारपाल की बात अनसुनी कर दी राजा शिकार करने गया।राजा के साथ अनिष्ठ घटित हुआ भी।राजा की सतर्कता से राजा अनिष्ठ से बच गया।द्वारपाल का सपना सच साबित होने पर भी राजा ने द्वारपाल को तात्काल प्रभाव से नोकरी से हटा दिया।राजा ने अपने विवेक से निर्णय लिया।राजा ने द्वारपाल को नोकरी से निकाल बाहर करने कारण बताया कि, तुम्हें सपना दिखाई दिया मतलब तुम अपनी ड्यूटी के समय सो रहे थे?यह एक काल्पनिक विनिदो किस्सा हो सकता है?हमे सिर्फ आशय समझना चाहिए।
वातुकुलकक्ष में बैठ कर सारे भौतिकसूखों का उपभोग करतें हुए समाचार प्रसारित,प्रकाशित किए जाएंगे तो महंगाई कैसे दिखाई देगी?बेरोजगरों की वास्तविक संख्या कैसे ज्ञात होगी?चिकित्सा क्षेत्र की दुर्दशा कैसे दृष्टिगोचर होगी?
उक्त सारी जानकारी सूत्रों से ज्ञात हुई है।कौन से सूत्र कैसे सूत्र?इन प्रश्नों का उत्तर तो सदी के नायक के कौन बनेगा करोड़पति के कंप्यूटर में भी नहीं मिलेगा?
यह बहुत सामान्यज्ञान का प्रश्न है? इस प्रश्न का जवाब करोड़ रुपयों के धन से भी नहीं मिलेगा? कारण यह सवाल देश के करोड़ो की संख्या में हर तरह के आभाव को सहन कर रही जनता का है?
शशिकांत गुप्ते इंदौर





