–निर्मल कुमार शर्मा
कथित भारतीय लोकतंत्र में केवल गवाह आधारित भारतीय न्यायिक व्यवस्था की बीते शुक्रवार दिनांक 24-9-2021 को इस देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हाई सिक्योरिटी वाली रोहिणी कोर्ट में दिन-दहाड़े 1बजे कोर्ट परिसर जिस समय वकीलों और पुलिसकर्मियों से खचाखच भरा रहता है,उस समय कोर्ट रूम में पेशी पर आए एक 6.5 लाख रूपयों के ईनामी बदमाश को भरी अदालत में जज साहबान के सामने ही वकीलों की ड्रेस पहने दो बदमाशों ने तड़ातड़ गोली मार कर हत्या कर दिए,वैसे उसके तुरंत बाद ही उस कोर्ट रूम में उपस्थित सुरक्षाकर्मी भी उन दोनों बदमाशों को गोली मारकर उन्हें वहीं ढेर कर दिए,कोर्टरूम में लोकतंत्र के मुँह पर कालिख पोतकर रख दिया तथा राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली की कथित चाक-चौबंद सुरक्षाव्यवस्था की पूरी तरह हवा निकाल दिया ! यह पूरी घटना पूरे दस या पन्द्रह मिनट तक जारी रहते हुए करीब 30 से 35 राऊंड गोली चलती रही,ये समूची घटना बाकायदा जज साहबान के आँखों के सामने घटित हुई ! प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जज साहबान से मात्र कुछ फीट की दूरी पर पेशी पर आए बदमाश को कोर्ट रूम में पहले से इंतजार कर रहे बदमाशों ने गोली मार दिए ! खुद जज साहब को बाद में भारी सुरक्षाव्यवस्था के साथ पिछले गेट से बाहर निकाला जा सका !
भारत के अन्य साधारण नगरों और शहरों की तुलना में इस देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली बहुत ज्यादा संवेदनशील है,सबसे बड़ी चीज यह है कि नई दिल्ली की सुरक्षा और इसके महत्व को विशेष ध्यान रखते हुए और इसकी सुरक्षाव्यवस्था को और अधिक चुस्त बनाने के लिए यहाँ की संपूर्ण पुलिस व्यवस्था सीधे भारत के केन्द्रीय सरकार के गृहमंत्री के अधीन रखा गया है। दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता अक्सर ये दावा करते रहते हैं कि वे दिल्ली को पूर्णतः अपराध मुक्त बना देंगे,लेकिन वास्तविकता यह है कि दिल्ली और उसके आस-पास बसे गाजियाबाद और गुड़गांव आदि जैसे शहर देश के अन्य शहरों की तुलना में आज बहुत ज्यादे असुरक्षित होकर रह गए हैं ! इन शहरों में अपराधियों का मनोबल इतना बढ़ा हुआ है कि अगर किसी की जमीन पर जबरन कब्जा करना हो या किसी की भी हत्या करनी हो,इसके लिए बाकायदा लाखों रूपयों की एडवांस में सुपारी लेकर इन कामों को वे बड़े आराम से कर देते हैं। इसीलिए इन शहरों में छेड़खानी,बलात्कार और फिरौती या रंगदारी वसूलने वाली जैसी घटनाओं की बाढ़ सी आई हुई है !
इस कोर्ट के वकीलों के अनुसार सुबह में कोर्ट में प्रवेश करने वालों का सुरक्षाकर्मियों द्वारा ठीक से चेकिंग ही नहीं हो पाती ! वैसे कहने को इस कोर्ट के प्रवेशद्वार पर चेकिंग के लिए कंप्यूटरीकृत उपकरण लगाए गये हैं,लेकिन मिडिया के अनुसार इस कंप्यूटरीकृत उपकरण का मेटेल डिटेक्टर बहुत दिनों से खराब पड़े हुए हैं। दुःखद और विस्मित करनेवाली बात है कि राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली स्थित न्यायालय की सुरक्षाव्यवस्था जो सीधे इस देश के गृहमंत्री के हाथों में है,वहां भी इतनी भयंकर लापरवाही और कर्त्तव्य हीनता है ! मिडिया के अनुसार इस कोर्ट में काले कोट-पैंट धारी वकीलों के प्रवेश के लिए एक अलग गेट है,जहाँ वकीलों को प्रवेश करते समय उनकी कोई चेकिंग ही नहीं होती,जाहिर है गोली मारनेवाले बदमाशों ने इसी बात का फायदा उठाए, क्योंकि वे कोर्ट के परिसर और जज साहबान के कक्ष में जमानत पर लाए जानेवाले दुर्दांत अपराधी को भारी पुलिस व्यवस्था के बीच आने से आधे घंटे पहले ही वकीलों के काले कोट और पेंट वाले ड्रेस में कोर्ट रूम में बैठकर बाकायदा उसका इंतजार कर रहे थे !
पुलिस के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार इस दुःखद घटना के दो दिनों पूर्व से ही वे अपने इस कुकृत्य को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहे थे ! यक्षप्रश्न है कि क्या मोदी ऐंड कंपनी की सरकार के राज में गुँडों और बदमाशों का दुःस्साहस एक सीमा से भी ज्यादे बढ़ गई है ! आखिर इस तरह के दुर्दांत आतंकवादी और गुँडागर्दी वाले कुकृत्यों को कौन प्रश्रय दे रहा है ? पिछले सालों में गुँडों द्वारा अंजाम दी गई बहुत सी अत्यंत घृणित कुकृत्यों में यथा किसानों को बदनाम करने के लिए लाल किले पर कुछ उग्रवादी संगठनों द्वारा झंडा फहराने की घटना हो,या जवाहर लाल यूनिवर्सिटी की महिला प्रोफेसरों सहित वहाँ की छात्र यूनियन की अध्यक्षा पर गुँडों द्वारा अकर्यमण्य और नपुंसक दिल्ली पुलिस के सामने हमला हो,या राजघाट पर शाहीन बाग के शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों पर एक गुँडे द्वारा सरेआम पिस्तौल से धमकाने की बात हो या दिल्ली में हुए दंगे कराने में बीजेपी के कुछ असामाजिक व गुँडेटाईप नेताओं द्वारा दिल्ली पुलिस के सामने धार्मिक वैमनस्यता भरे अमर्यादित व उत्तेजक भाषण देकर दंगे भड़काए गये,जिसमें अरबों की संपत्ति को लूट लिया गया या उसमें आग लगा दी गई, इस दंगे में सैकड़ों निरपराध लोगों की जलाकर या छुरा घोंपकर नृशंस हत्या कर दी गई,गृहमंत्री के सीधे आनेवाली दिल्ली पुलिस का व्यवहार बहुत ही शर्मनाक,अशोभनीय, अलोकतांत्रिक,नपुंसकता और कर्तव्यहीनता का ही रहा है ! दिल्ली दंगों के अपराधियों के खिलाफ दिल्ली पुलिस का कोई कार्यवाही न करना उसके कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ी करता है ! रोहिणी कोर्ट में हुई इस अत्यंत शर्मनाक घटना में कई और प्रश्न उठ खड़े हुए हैं मसलन कोर्ट में बदमाश कोर्ट की सुरक्षाव्यवस्था को धत्ता बताकर कैसे घुस गए ? बदमाश की पेशी की सटीक दिन और समय की सूचना हत्या करने वाले बदमाशों तक कैसे पहुंच गई ?पेशी पर आए बदमाश की कोर्ट में पेशी प्रातःकाल 10 बजे होनी थी,वह समय से आ भी गया था,लेकिन कोर्ट में उसकी पेशी बहुत विलम्ब से दोपहर 1 बजे क्यों की गई वह भी तब पेशी की गई जब उसके हत्यारे बदमाश हथियारों सहित कोर्ट रूम में आकर पूरी तरह से अपनी पोजीशन लेकर बैठ गये थे ! यह भी कि तिहाड़ जेल में बंद एक बड़े गुँडे द्वारा जेल के अन्दर से अपने मोबाइल फोन से बाकायदा इस त्रासद और अमर्यादित कुकृत्य को अपने गुर्गों को निर्देशित किया गया ! क्या दिल्ली के तिहाड़ जैसे जेल में अपराधियों और असामाजिक तत्वों तथा गुँडों को जेल के अंदर से भी गुँडागर्दी करने के लिए मोबाईल फोन उपलब्ध करा दी जाती है ? ये सभी संशयात्मक और अनुत्तरित प्रश्न बहुत-बहुत से प्रश्नचिन्ह पैदा कर रहे हैं ! एक और प्रश्न उठ रहा है कि गवाह आधारित भारतीय न्याय व्यवस्था में ये सारी घटनाएं माननीय जज साहबान के सामने घटित हुई है,तो क्या इस स्थिति में इस कुकृत्य होने देने के दोषियों की सजा तय करने में फिर गवाहों की जरूरत पड़ेगी या जज साहबान स्वयं अपनी आँखों के सामने हुई हत्याओं और सरेआम लोकतंत्र सहित न्यायालय के चीरहरण के लिए अपने स्वविवेक से दोषियों को दंड देंगे !
सबसे दुःख,शर्म और विक्षुब्ध करनेवाली बात यह भी है कि राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार केवल 2020 में इस देश में सबसे ज्यादे अपराध होनेवाले राज्यों में 88388 अपराधों के साथ चेन्नई दूसरे स्थान पर है,लेकिन इस देश की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली अपने आसपास के गाजियाबाद, फरीदाबाद, गुड़गांव आदि उपनगरों के साथ 245844 अपराधिक मामलों के साथ प्रथम स्थान पर विराजमान है ! आश्चर्य की बात यह है कि रोहिणी कोर्ट में गुँडों द्वारा गोली चलाने और हत्या करने का लम्बा इतिहास रहा है यथा 2015 में एक बदमाश ने जेल वैन में ही 2 कैदियों की हत्या कर दिया था,2015 में ही एक बलात्कारी पर पेशी के दौरान ही हमला हुआ था,2017 में रोहिणी न्यायालय परिसर में ही एक कैदी और एक बदमाश की हत्या हुई थी। प्रश्न है कि इस देश के गृहमंत्री जी का कार्यक्षेत्र केवल अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार तक ही सीमित है ! क्या राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में न्यायपालिका परिसर ही नहीं,अपितु न्यायालय के उस कक्ष में जहाँ कथित न्याय देनेवाले जज के सामने हुई इस बेहद शर्मनाक घटना के बारे में हमारे वर्तमानकाल के कथित सबसे काबिल गृहमंत्री अपने मुँह से दो शब्द बोलना भी उचित नहीं समझते ! किसी भी देश का गृहमंत्री इसीलिए बनाया जाता है, जो पूरे देश में अमन-चैन की सतर्कता से और चैतन्य होकर लगातार समीक्षाकर असामाजिक, असंवैधानिक कुकृत्य करनेवाले अपराधिक व गुँडे तत्वों पर सतर्क निगाह रखे व उनपर नकेल कसने,न्यायोचित व कठोरतम् दंड दिलवाने में अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाए,अगर कोई गृहमंत्री अपने कार्य को ईमानदारी, कर्मठता और प्रतिबद्धता से अपना कर्तव्य नहीं निभाता फिर उस स्थिति में ऐसे कर्तव्यविहीन व लोकतंत्र के प्रति असंवेदनशील व्यक्ति को भारतीय राष्ट्र राज्य का एक मिनट भी गृहमंत्री बने रहने का कतई अधिकार नहीं है !
–निर्मल कुमार शर्मा,गाजियाबाद, उ





