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तेरे फूलों से भी प्यार, तेरे कांटों से प्यार

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शशिकांत गुप्ते

कॉलोनी की कुछ धर्म प्रेमी महिलाएं किसी भी महाराज का प्रवचन हो रहा हो,सुनने जाती ही है।यह नियम कभी टूटता नही है।घर के कामकाज महरियों के या बहूँओं के जिम्मे होता है।
एक दिन जब वह सभी महिलाएं प्रवचन सुनकर वापस आई।कॉलोनी के एक बुजुर्ग व्यक्ति ने पूछा आप प्रवचन सुनने गई थी,तो बताइए महाराज ने क्या बोला?
महिलाएं एक स्वर में बोली महाराज साहब बहुत अच्छा बोलते है आज भी बहुत अच्छा बोले। महाराज के हावभाव और उद्बोधन का तरीका बहुत ही अच्छा होता है। भाषा तो बहुत मधुर बोलतें हैं।महाराज की वेशभूषा भी बहुत आकर्षक होती है। महाराज के चेहरे पर सफेदझग दाढ़ी भी बहुत फबती है।
महिलाओं के द्वारा महाराज की स्तुति सुनने के बाद बुजुर्ग व्यक्ति पुनः पूछा महाराज ने जो प्रवचन दिया उस प्रवचन में महाराज क्या बोले?
उन महिलाओं के पास इस प्रश्न का एकही जवाब था बस महाराज साहब अच्छा बोलतें हैं।
ठीक इसी तरह हमारी सरकार अच्छे काम कर रही है।बहुत काम कर रही है।लोगों को इतना ही मालूम है? क्या काम किया है?क्या काम कर रही है,नहीं मालुम?
भक्तों द्वारा काम का गुणगान भाव विभोर होकर किया जा रहा है।
भक्त महाराज की भक्ति में इतने लीन हो गए हैं,कि,भक्त लोग खुशी से महंगी चीजे खरीद रहें हैं।
बगैर किसी शिकवा,शिकायत के महंगा ईंधन वाहनों में भरवा रहें हैं।
सम्भवतः भक्तों की “स्मृति” मलिन होगई है।पूर्व में तो महंगाई के विरोध में नांचते गाते शोर मचाते थे। शायद पूर्व में इनकी स्मृति मतलब याद में चूड़ियों को कमजोरी का प्रतीक माना जाता होगा। पूर्व में भक्तों की शारीरिक क्षमता इतनी थी कि, रिक्त गैस सिलेंडर उठा उठा कर नांचते गातें थे, इन्हें सिलेंडर में भरी गैस महंगी लगती थी।
वर्तमान में भक्ति में लीन होने से सिलेंडर वही है,सिलेंडर की क्षमता वही, सिलेंडर में भरी गैस भी वही है,अब भक्तों को सब कुछ सस्ता लगता है। यह सब देखकर विश्वास होने लगता है कि,भक्ति में कितनी शक्ति होती है।
भक्ति में लीन हो जाने से बेरोजगरों की कतार दिखाई नहीं देती है?
मंदिर की दिव्यभव्य आकृति और मंदिर निर्माण की लागत पढ़ सुन कर भक्त चरम सुख का अनुभव करतें हैं।
देश के पुण्यवान दानदाताओं के उदारता पर निर्भर रहने वाले देश के तमाम भिक्षुक इंतजार में है।कब मदिंर निर्माण हो,और कब भगवान की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा हो?जैसे यह पवित्र, और आस्था का कार्य सपंन्न होगा सभी भिक्षुक अयोध्या की ओर कूच करेंगे।
पुण्यवान लोग भगवान को प्रसन्न करने के लिए मंदिरों का निर्माण करतें हैं।मुक्तहस्त से दान करतें हैं।
मंदिर परिसर के बाहर भिक्षुकों की कतारें पुण्यवान लोगों से दान प्राप्त कर उन्हें आशीर्वाद देतीं हैं।
भिक्षुक इन पंक्तियों को अपनी आवाज में गातें रहतें हैं।
दूसरों के दुःख दूर करने वाले
तेरे दुःख करेंगें रे राम
किए जा किए जा तू भलाई के काम

केंद्र से ज्यादा भक्तिभाव को प्रधानता देने वाली देहली में स्थिति सरकार है। देहली सरकार तो जनता को देहली से अयोध्या मुफ्त यात्रा करवाने वाली है। सरकार को बहुत पुण्य मिलेगा।
भक्ति में लीन भक्त गण महाराज की वंदना में यह भजन भी गाएंगे।
तेरे फूलों से प्यार तेरे कांटों से भी प्यार
तू जो देना चाहे करतार
हमको दोनो है पसंद, तेरी धूप और छाँव,
दाता किसी भी दिशा में ले चल ज़िंदगी की नाव,
चाहे हमे लगादे पार या डुबो दे मझदार
,

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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