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स्कूल को लघु विश्व का रोल माॅडल तथा बच्चों को विश्व नागरिक बनाना चाहिए!

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डाॅ. जगदीश गाँधी, शिक्षाविद् एवं संस्थापक-प्रबन्धक,
सिटी मोन्टेसरी स्कूल (सीएमएस), लखनऊ
(1) शिक्षा द्वारा सारी वसुधा को कुटुम्ब बनाने का सीएमएस का अनूठा अभियान:
सीएमएस का 63 वर्षों के व्यापक शैक्षिक अनुभव के आधार पर मानना है कि मनुष्य की ओर से सर्वशक्तिमान परमेश्वर को अर्पित की जाने वाली समस्त सम्भव सेवाओं में से सर्वाधिक महान सेवा है- (अ) बच्चों की शिक्षा, (ब) उनके चरित्र का निर्माण तथा (स) उनके हृदय में परमात्मा के प्रति अटूट प्रेम उत्पन्न करना। दो शिक्षकांे के रूप में सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ की नींव मेरी पत्नी डाॅ. भारती गाँधी तथा मैंने मिलकर 1 जुलाई 1959 को किराये के मकान में पड़ोसी से 300/- रूपये उधार लेकर डाली थी। वर्ष 1959 में 5 बच्चों से शुरू हुए इस विद्यालय में आज लखनऊ शहर में स्थित 18 शाखाओं में 55,000 (पचपन हजार) से अधिक छात्र-छात्रायें मोन्टेसरी से लेकर इण्टरमीडिएट तक की चरित्र निर्माण तथा विश्व एकता की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। सीएमएस द्वारा अपनी स्थापना के समय से ही ‘जय जगत’ को ध्येय वाक्य के रूप में अपनाया गया है।
(2) शान्ति के विचार देने के लिए मनुष्य की सबसे श्रेष्ठ अवस्था बचपन है:-
युद्ध के विचार सबसे पहले मनुष्य के मस्तिष्क में पैदा होते हैं अतः दुनियाँ से युद्धों को समाप्त करने के लिये मनुष्य के मस्तिष्क में ही शान्ति के विचार उत्पन्न करने होंगे। शान्ति के विचार देने के लिए मनुष्य की सबसे श्रेष्ठ अवस्था बचपन है। स्कूल चार दीवारों वाला एक ऐसा भवन है जिसमें कल का भविष्य छिपा है। मनुष्य तथा मानव जाति का भाग्य क्लास रूम में गढ़ा जाता है। शिक्षकों को पूरे मनोयोग से विद्यालय को लघु विश्व का माॅडल तथा बच्चों को विश्व नागरिक बनाना चाहिए। चरित्र निर्माण एवं विश्व एकता की शिक्षा इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है! अभिभावकों को भी विद्यालय में मिल रहे इन विचारों के अनुकूल घरों में बाल्यावस्था ये विचार अपने बच्चों को बाल्यावस्था से देना चाहिए। विद्यालय तथा घर ही सबसे बड़े तीर्थधाम हैं।
(3) मनुष्य की भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक तीन वास्तविकतायें होती हैं:-

आज आधुनिक विद्यालयों के द्वारा बच्चों को एकांकी शिक्षा अर्थात केवल भौतिक शिक्षा ही दी जा रही है, जबकि मनुष्य की तीन वास्तविकतायें होती हैं। पहला- मनुष्य एक भौतिक प्राणी है, दूसरा- मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है तथा तीसरा मनुष्य- एक आध्यात्मिक प्राणी है। इस प्रकार मनुष्य के जीवन में भौतिकता, सामाजिकता तथा आध्यात्मिकता का संतुलन जरूरी है। सीएमएस में प्रत्येक बालक की तीनों वास्तविकताओं को ध्यान मंे रखते हुए भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक तीनों प्रकार की संतुलित शिक्षा देने के लिए 2000 से अधिक टीचर्स तथा 1000 से अधिक सहयोगी कार्यकर्ता पूरे मनोयोग तथा समर्पित भाव से रात-दिन संलग्न हैं।
(4) भौतिक शिक्षा के अन्तर्गत शिक्षकों को प्रत्येक बालक को सभी विषयों का उत्कृष्ट ज्ञान देना चाहिए:-
भौतिक शिक्षा के अन्तर्गत सी.एम.एस. अपने प्रत्येक बालक को सभी विषयों को उत्कृष्ट ज्ञान दे रहा है। प्रत्येक वर्ष की भांति ही इस वर्ष शैक्षिक सत्र 2020-2021 में हमारे शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन में छात्रों ने आई.एस.सी. (कक्षा 12) तथा आई.सी.एस.ई. (कक्षा 10) में पूरे देश में सर्वश्रेष्ठ रिजल्ट अर्जित करने का कीर्तिमान बनाया है। सीएमएस के सर्वाधिक छात्र प्रतिवर्ष अपनी उत्कृष्ट प्रतिभा के बलबुते संसार के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में स्काॅलरशिप सहित दाखिले के लिए चुने जाते हैं। इस वर्ष सिटी मोन्टेसरी स्कूल के 48 मेधावी छात्रों ने विश्व के प्रख्यात विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा हेतु 1,03,48,018 अमेरिकी डालर (एक करोड़ तीन लाख अड़तालीस हजार अठारह अमेरिकी डालर) की स्काॅलरशिप अर्जित कर लखनऊ का नाम अन्तर्राष्ट्रीय पटल पर गौरवान्वित किया है। साथ ही प्रतिवर्ष सीएमएस के सर्वाधिक छात्र इंजीनियरिंग, मेडिकल, आईआईटी, नीट, क्लैट आदि में चुने जाते हैं।
(5) सामाजिक शिक्षा के अन्तर्गत शिक्षकों को प्रत्येक छात्र का विश्वव्यापी दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए:-
सीएमएस वर्ष 2001 अर्थात विगत 22 वर्षों से भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 पर अन्तर्राष्ट्रीय मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन का आयोजन प्रतिवर्ष कर रहा है। प्रतिवर्ष आयोजित इन सम्मेलनों में विश्व के विभिन्न देशों से प्रतिभाग करने पधारे मुख्य न्यायाधीशों से सीएमएस के छात्र अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं तथा उनके समाधान खोजने पर चर्चा करते हैं। मेरे संयोजन में वर्ष 2001 से 2022 तक प्रतिवर्ष आयोजित विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अब तक 136 देशों के 1361 मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश, हेड आॅफ दि स्टेट/गवर्नमेन्ट, संसद के स्पीकरों ने प्रतिभाग किया है। इन सम्मेलनों में मुख्य न्यायाधीशों, न्यायाधीशों, कानूनविदों एवं शांति प्रचारकों ने प्रतिभाग करके विश्व संसद, विश्व सरकार तथा वल्र्ड कोर्ट आॅफ जस्टिस के गठन को अपना सर्वसम्मति से समर्थन दिया है। हमारे विद्यालय के शिक्षकों द्वारा विभिन्न शैक्षिक विषयों पर सर्वाधिक 23 अन्तर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन प्रत्येक बालक का विश्वव्यापी, वैज्ञानिक तथा मानवीय दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रतिवर्ष किया जाता है।
(6) आध्यात्मिक शिक्षा के अन्तर्गत छात्र को सभी धर्मों की मूल शिक्षाओं का ज्ञान देना चाहिए:-
आध्यात्मिक शिक्षा के अन्तर्गत सीएमएस में रोजाना स्कूल प्रेयर एसेम्बली में सर्व धर्म प्रार्थना से पढ़ाई की शुरूआत होती है। तथापि वल्र्ड यूनिटी प्रेयर के द्वारा ‘सारे विश्व में शान्ति हो’ की प्रार्थना की जाती है। प्रत्येक बालक को एक ही परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में अपने संदेशवाहकों के द्वारा भेजी गई पवित्र ग्रन्थों- गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान शरीफ, गुरू ग्रन्थ साहिब, किताबे अकदस में संकलित परमात्मा की एक जैसी मूल शिक्षाओं का ज्ञान कराया जा रहा है तथा परमात्मा की शिक्षाओं पर चलने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। बच्चों को बताया जा रहा है कि सभी संदेशवाहक राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, ईशु, मोहम्मद, मोजज, अब्राहम, जोरस्टर, नानक, बहाउल्लाह एक ही परमात्मा की ओर से युग-युग में प्रगतिशील श्रृंखला के अन्तर्गत धरती पर अवतरित हुए हैं। अब एक ही छत के नीचे अब सब धर्मों की प्रार्थना होनी चाहिए।
(7) मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य अपनी आत्मा का विकास करना है:
प्रार्थना परमपिता परमात्मा से जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है। झांकी के चारों ओर बच्चों को हाथ जोड़कर प्रभु की प्रार्थना करते हुए दिखाया गया है। प्रभु की प्रार्थना आत्मा के विकास में सहायक हैं। बच्चों को बाल्यावस्था से घर में माता-पिता तथा विद्यालय में टीचर्स द्वारा यह ज्ञान कराना चाहिए कि परमपिता परमात्मा द्वारा दिव्य लोक से भेजी गई पवित्र पुस्तकों गीता, त्रिपटक, बाईबिल, कुरान, गुरू ग्रंथ साहिब व किताबे अकदस आदि की शिक्षाओं को जानकर उसके अनुसार जीवन पर्यन्त अपनी नौकरी या व्यवसाय करके अपनी आत्मा का विकास करना चाहिये। रोजाना किये जाने वाले हमारे सभी कार्य प्रभु की सुन्दर प्रार्थना बने। जो लोग प्रभु की इच्छा तथा आज्ञा को पहचान लेते हैं फिर उन्हें धरती तथा आकाश की कोई भी शक्ति प्रभु का कार्य करने से रोक नहीं सकती। मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य अपनी आत्मा का विकास करना है।
(8) मानव जीवन का एकमात्र उद्देश्य अपनी आत्मा का विकास करना है:-
परमपिता परमात्मा की ओर से युग-युग में भेजे गये महान अवतारों राम (7500 वर्ष पूर्व), कृष्ण (5000 वर्ष पूर्व), बुद्ध (2500 वर्ष पूर्व), ईसा मसीह (2000 वर्ष पूर्व), मोहम्मद साहब (1400 वर्ष पूर्व), गुरू नानक देव (500 वर्ष पूर्व) तथा बहाउल्लाह (200 वर्ष पूर्व) धरती पर अवतरित हुए हैं। स्कूलों के माध्यम से संसार के प्रत्येक बालक को राम की मर्यादा, कृष्ण की न्याय, बुद्ध की सम्यक ज्ञान, ईशु की करूणा, मोहम्मद साहेब की भाईचारा, गुरू नानक की त्याग और बहाल्लाह की हृदय की एकता की शिक्षाओं का ज्ञान कराया जाना चाहिए।
(9) सीएमएस की विश्वव्यापी स्तर की अनूठी शिक्षा को शीर्ष अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने मान्यता दी है:-
हमारे विद्यालय की कठोर परिश्रमी प्रधानाचार्याओं के आत्मीयतापूर्ण कुशल मार्गदर्शन में शिक्षकांे के निरन्तर प्रयासों से सीएमएस गिनीज बुक आॅफ वल्र्ड रिकार्ड में एक ही शहर में विश्व एकता की शिक्षा ग्रहण कर रहे सबसे अधिक 55,000 बच्चों वाले विश्व के सबसे बड़े विद्यालय के रूप में दर्ज है। सीएमएस को यूनेस्को द्वारा ‘अंतर्राष्ट्रीय शांति शिक्षा पुरस्कार-2002’ से सम्मानित किया गया है। यूनेस्को का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार भारत को अभी तक केवल दो बार मिला है, जिसमें पहली बार यह पुरस्कार वर्ष 1992 में मदर टेरेसा को व दूसरी बार वर्ष 2002 में विश्व एकता एवं विश्व शान्ति की शिक्षा देने के लिए सिटी मोन्टेसरी स्कूल, लखनऊ को मिला है। सीएमएस विश्व का एकमात्र ऐसा विद्यालय है जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने अपने अधिकृत एनजीओ के रूप में मान्यता भी दी है।
(10) विश्व के बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए एक वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था का गठन हो:-
हमें विश्व के लगभग दो अरब 40 करोड़ बच्चों सहित मानव जाति के भविष्य को वैश्विक महामारी कोरोना, अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद, घातक शस्त्रों की होड़ तथा तृतीय विश्व युद्ध की आशंका सुरक्षित करने के लिए एक वैश्विक लोकतांत्रिक व्यवस्था के अन्तर्गत विश्व संसद का समय रहते गठन करना होगा। इसके पश्चात मानव सभ्यता की गुफाओं से शुरू हुई यात्रा का अन्तिम लक्ष्य संसार में आध्यात्मिक सभ्यता की स्थापना का मार्ग प्रशस्त होगा। विगत 63 वर्षों में सीएमएस के लाखों छात्र विश्व के विभिन्न देशों में उच्च तथा महत्वपूर्ण पदों पर असीन होकर भारतीय संस्कृति के आदर्श वसुधैव कुटुम्बकम् को साकार करने में यथाशक्ति योगदान दे रहे हैं।

Ramswaroop Mantri

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