आरती शर्मा
_प्रेम, संभोग और सेहत के बारे में ~ वेद, उपनिषद, विश्व भर के स्वास्थ्य साहित्य और आधुनिक मेडिकल साइंस की थ्योरी का अध्ययन और प्रयोग करने वालों का अनुभव जो सच दिखाता है, वह यह है :_➡️ प्रेम
वास्तविक प्रेम के बिना घर, घर नहीं मरघट है और इंसान जिंदा लाश।
प्रेम का आधार मन-मस्तिष्क-रूह की समग्र स्वीकृति और संगम है, दैहिक उम्र, बाहरी सुंदरता और आर्थिक स्तर नहीं।
➡️संभोग (सेक्स)
संभोग बुरा नहीं, एक पुरूषार्थ है। यौन काम इंसान को राम तक पहुंचाने की क्षमता रखता है।
संभोग समाधि यानी परमानंद का द्वार बनता है. तभी सभी वैदिक संत काम से गुजरे। तभी कृष्ण ने गर्व से कहा- मैं कामाग्नि हूं।
सेक्स अगर रिश्तों में यानी संबंधियों यानी रक्तसंबंधियों के बीच होता है तो वह DNA, होर्मोन्स, ब्लड सर्कुलेशन को निगेटिव रूप से प्रभावित करता है. मन मस्तिष्क के रोग होते हैं; और मन मस्तिष्क रोगी हुआ तो तन भी एक दिन सड़ता है.
संभोग अगर मज़बूत नहीं होता तो स्त्री को रोगी बनता है. स्त्री को ऑर्गज्मिक तृप्ति से बेसुध करने वाला सेक्स मिलता है तो वह उसकी सेहत, ब्यूटी, सेक्सुअललिटी को डेवलप करता है.
➡️सेहत
मन, मस्तिष्क और तन की तभी ठीक रहेगी जब इंसान को प्रेम मिले. ज़ब इंसान को वास्तविक संभोग मिले। बिना इसके वह अवसाद, कुंठा, ग्लानि, क्षोभ से मनोरोगी बनेगा और इनसे दैहिक रोगी भी।
स्त्री के लिए माह में कम से कम एक बार, प्रेम आधारित पूर्णतृप्तिदायी संभोग जरूरी है।
मैडिकल साइंस के अनुसार ऐसा सेक्स तनाव, चिंता, दर्द, अतिरिक्त चर्बी, अनिद्रा, माइग्रेन, हिस्टीरिया आदि की कारगर दवा है।
संभोग में स्त्री के तृप्त नहीं होने पर निगेटिव हारमोन्स हाबी होते हैं, जो उसे मनोदैहिक दोनों पहलू पर रोगी बनाते हैं।
(हम मन, मस्तिष्क और तन की उपरोक्त से संबंधित सभी कमजोरियों और बीमारियों के निदान के लिए निःशुल्क सुलभ हैं. व्हाट्सप्प 9997741245 पर संपर्क किया जा सकता है.)
💞चेतना विकास मिशन :





