अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

मैं ‘यूपी में का बा’ वाली नेहा हूं; BJP की IT सेल की अश्लीलता से डरूंगी नहीं, ट्रोलर्स के अंगूठे में घाव कर दूंगी

Share

नेहा सिंह राठौर

लोगों को लगता है कि नेहा सिंह राठौर कोई हउआ है, लेकिन बहुत दर्द भरी कहानी है मेरी। हर पांचवें दिन मेरे सामने कोई न कोई समस्या खड़ी हो जाती है। मां-बाप को मेरा गाना बजाना कभी पसंद नहीं रहा। मां चाहती थी कि मैं बीएड करके मास्टरनी बन जाऊं या चुल्हा चौका करूं। किसी सरकारी नौकरी करने वाले से मेरी शादी हो जाए। पिता आज भी कहते हैं कि ये गाना-बजाना छोड़ो, नहीं चाहिए पैसा, हमें समाज में इज्जत चाहिए, लेकिन मैं जानती हूं कि मैं जो कर रही हूं ठीक कर रही हूं, वे लोग भी एक न एक दिन समझ ही जाएंगे। बस मेरे लिए एक जंग घर से बाहर है ट्रोलर्स की तो दूसरी घर के अंदर है।

मैं बिहार के कैमूर-भभुआ की रहने वाली हूं। पापा लखनऊ में प्राइवेट नौकरी करते थे। गांव में मैं भाई-बहन और अपनी मां के साथ रहती थी। पापा तो सीधे थे, लेकिन मां मुझमें और भाई में फर्क करती थी। इसको लेकर मेरा उनसे झगड़ा भी हुआ करता था। दादी भी भाई के खाने में घी डाल देती थीं और मुझे मना कर देती थी। वो कहती थी कि तुम्हें ससुराल जाना है, घी खाकर यहां अखाड़ा लड़ना है क्या..? मुझे उस वक्त बहुत बुरा लगता था। हालांकि, अब चीजें बदल गई हैं, लेकिन स्वभाव तो वैसा ही है।

शुरुआती पढ़ाई करने के बाद मैं बिहार से कानपुर आ गई, क्योंकि वहां ग्रेजुएशन करने में 6 साल लग जाते थे। पढ़ने लिखने में शुरू से ही तेज थी। मेरी टीचर कहती थी कि तुम कलेक्टर बनोगी। मुझे बचपन से गाने का शौक था। मां के साथ शादियों में जाया करती थी। वहां मां भोजपुरी में शादियों वाले गाने गाया करती थी। मैं भी उनके साथ गाती। लोगों को मेरा गाना पसंद था। कुछ सोहर मेरी ज़ुबान पर हमेशा रहते।

साल 2017 की बात है। मैंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी कर ली थी और गांव में थी। मेरा भाई फेसबुक चलाता था। उसकी ही आईडी से मैं देखती थी कि लोग सोशल मीडिया पर उल्टे सुल्टे गाने पोस्ट करते हैं और उन्हें लाइक भी कम ही मिलते हैं। मुझे लगता था कि इससे अच्छा तो मैं गा लेती हूं, लेकिन मेरे पास फोन नहीं था।

मां और भाई मुझे फोन देने के सख्त खिलाफ थे। मैं अपने कजिन या चाचा के फोन में गाने रिकॉर्ड करती थी, लेकिन फेसबुक पर नहीं पोस्ट कर पाती थी। इसके बाद जिद करके मामा से फेसबुक पर अपना अकाउंट बनवा लिया।

2018 की बात है। मैं अपनी बुआ के यहां कोलकाता गई थी। इसी तरह गुनगुना रही थी तो बुआ बोली कि क्या सिर दुखाती हो, गाना है तो ढंग से गाया करो। बस उनकी बात लग गई और तय किया कि अब मैं भी फेसबुक पर अपने गाने पोस्ट करूंगी। फिर क्या था धीरे-धीरे एक-एक करके अपने गाने फेसबुक पर पोस्ट करने लगी।

शुरुआत में कम ही लाइक्स मिलते थे। 300-400 लोग देखते थे, लेकिन मेरी कोशिश जारी रही। मुझे याद है कि मेरा लिखा एक गीत था ‘हमरा प्रेम की निसानी दिखाई द, पिया शौचालय बनाई द..।’ इसे लोगों ने पसंद किया और ठीक-ठाक लाइक्स मिले।

अब मुझे एक फोन की जरूरत थी। मैं मां के पीछे पड़ गई कि मुझे मोबाइल दिला दो, लेकिन उन्हें लगता था कि मैं लड़कों से बात करने के लिए फोन मांग रही हूं। वो कहती थीं कि जब बतियाना ही है तो शादी हो जाए तो अपने पति से बतियाना। मैं उन्हें समझा कर थक गई थी कि मैं क्यों फोन मांग रही हूं। इस बीच मेरा काम जारी रहा। जब भी किसी का फोन हाथ लगता वीडियो बनाकर फेसबुक पर पोस्ट कर देती थी।

एक बार भाई ने नया फोन लिया। उसका पुराना फोन ऐसे ही रखा रहता था, लेकिन मुझे नहीं देता था। खैर मैं इधर-उधर करके उसका पुराना फोन यूज करने लगी। हालांकि मेरे परिवार वाले हमेशा मुझ पर नजर गड़ाए रहते थे।

2019 में मैं दिल्ली के प्रगति मैदान में बुक फेयर में गई। वहां एक बुक स्टॉल पर एक लड़का मिला। उसका नाम हिमांशु है। उससे बातचीत हुई और हमने अपने नंबर एक दूसरे को शेयर कर दिए। फिर उससे फोन पर बातें होने लगी। एक दिन उसने प्रपोज किया, लेकिन मैंने तब मना कर दिया। हालांकि हमारी दोस्ती बरकरार रही। जब मां को यह बात मालूम हुई कि मैं एक लड़के से बात करती हूं तो उन्होंने और भाई ने मिलकर मेरा फोन तोड़ दिया।

मेरे भाई ने फोन पर हिमांशु को गालियां दीं। फिर हिमांशु ने मेरी मौसी की बेटी को फोन किया कि नेहा के घरवालों ने उसका फोन तोड़ दिया है। आप किसी तरह उसके घर जाकर उसके परिवार को समझाओ। मैं नेहा से बात नहीं करूंगा, लेकिन उसे उसका फोन मिलना चाहिए। कम से कम वो अपना काम कर सके। मेरी मौसी की बेटी ने मेरे भाई को समझाया कि देखो उसे फोन दे दो, यह सब बदमाशी न करो।

उस दिन मैं बहुत बहुत रोई, लेकिन मैं भी एक नंबर की जिद्दी थी। तय कर लिया था कि चाहे कुछ हो जाए अपना काम नहीं छोड़ूंगी। एक दिन बहुत बड़ा करूंगी, अपना कमाऊंगी और बहुत सारे फोन खरीदूंगी। लड़कियों की तरह-तरह की इच्छाएं होती हैं, मेकअप करके सुंदर दिखना वगैरह-वगैरह, लेकिन मेरी इच्छा सिर्फ एक फोन की थी। फोन ही सब कुछ था मेरे लिए।

फिर बिहार में विधानसभा चुनाव का वक्त आया। मेरा एक मीडिया से कॉन्ट्रैक्ट हो गया। मुझे उसके लिए डेढ़ लाख रुपए मिले। मैंने सबसे पहले अपने लिए एक फोन खरीदा। सच कहूं तो मैं उसे फोन को देखती ही रह गई, मत पूछो कि उस वक्त मुझे कितनी खुशी हुई थी। अभी कुछ दिन पहले मैंने अपने उसी भाई को एपल का फोन गिफ्ट किया है, जिसने मेरा मोबाइल तोड़ दिया था।

चुनाव के दौरान मैंने ‘बिहार में का बा ‘ गाया जिससे मुझे काफी शोहरत मिली। इस गीत के जवाब में बिहार सरकार को भी गाना बनाना पड़ा। सब लोग जानना चाहते थे कि कौन है वो लड़की, जिसके गाने का जवाब सरकार को देना पड़ गया। मीडिया में भी खूब आया कि एक छोटी सी लड़की है जिसने ‘बिहार में का बा ‘ गाया है और सरकार को उस लड़की को जवाब देना पड़ रहा है।

हालांकि मैं खूब ट्रोल भी हुई। किसी ने मुझे दलाल कहा तो किसी ने आरजेडी की एजेंट। पार्टी विशेष के लोगों ने मुझे बहुत भद्दी और अश्लील गालियां दी। मेरे साथ यह सब पहली दफा हुआ था। मैं बुरी तरह से डर गई थी, घबरा थी कि यह क्या हो गया है। चौतरफा हमला देख मैं खूब रोई, लेकिन हिमांशु ने मुझे खूब हिम्मत दी। बिहार के कई पत्रकारों और इंटेलेक्चुअल्स ने भी हौसला दिया।

ट्रोलिंग के बाद घर और बाहर दोनों तरफ से गालियां पड़नी शुरू हो गई। रिश्तेदारों ने मेरे मां-बाप के खूब कान भरे। पापा को लोग फोन करके कहने लगे कि देखो रमेश लड़की क्या गा रही है, लोग गंदा-गंदा लिख रहे हैं। पापा बहुत नाराज हुए, उन्होंने कहा कि अगर गाना है तो परंपरागत गाओ, यह पॉलिटिकल सटायर नहीं, लेकिन मैं उनकी सुनती कहां हूं। मैं जानती हूं कि मैं सही काम कर रही हूं।

इसके बाद हिमांशु को लेकर घर में कलह रहने लगी। मां का कहना था कि मैं किसी सरकारी नौकरी वाले से ही शादी करूं। हिमांशु में सबसे बड़ी कमी थी कि उसकी सरकारी नौकरी नहीं थी, लेकिन प्रेम सरकारी और प्राइवेट नौकरी नहीं देखता। घर वालों को लगता था कि हिमांशु उनकी बेटी को फंसा रहा है, उल्लू बना रहा है।

हिमांशु ने मेरे भाई से मेरी शादी को लेकर बात की, लेकिन भाई ने मना कर दिया। फिर उसके पापा ने मेरे पापा से बात की। कुल मिलाकर कलह-क्लेश और न-न करते मेरी और हिमांशु की सगाई हो गई। आज भी मां इसे लेकर बहुत नाराज हैं।

मैं कोई नेता-विधायक की बेटी नहीं हूं। गरीब की बेटी हूं और गरीबी में ही बचपन बीता है। इसलिए मेरे गानों में जनता का दुख-दर्द भरा होता है। भोजपुरी ने मुझे जन्म दिया है, माटी का एहसान है मुझ पर। इसलिए गाऊंगी तो हमेशा भोजपुरी ही, लेकिन कभी फूहड़ नहीं गाऊंगी।

कई लोग पूछते हैं कि आप क्या करते हो कि वायरल हो जाते हो। कुछ नहीं करती मैं। मेरे पास फोन है 18,000 का, उससे वीडियो बनाती हूं, खुद रिकॉर्ड करती हूं। यूटयूब और फेसबुक से इतने पैसे आ जाते हैं कि मकान का किराया और खाने का खर्च निकल जाता है।

मैंने पहली दफा ‘यूपी में का बा’ गाया तो उसकी आखिरी लाइन थी जिंदगी झंड बा, फिर भी घमंड बा…। यह एक्टर और सांसद रवि किशन की एक फिल्म में उनका डायलॉग है। बिहार के युवा इसे खूब बोलते हैं। रवि किशन जैसी बातें करते हैं तो मैंने उनके ही डायलॉग से उन्हें जवाब दिया है।

आप देखिए कि उत्तर प्रदेश सरकार को मेरे गाने के जवाब में तीन-तीन गाने बनाने पड़ गए। भाजपा का आईटी सेल तो बहुत अश्लील हो चुका है। मेरे लिए ऐसे ऐसे शब्द इस्तेमाल किए गए हैं, मैं उनका नाम भी नहीं ले सकती हूं। हालांकि अब मुझे फर्क भी नहीं पड़ता। मैने पार्ट -1 गाया खूब ट्रोल हुई, जवाब में सेकेंड पार्ट गाया। मैंने तय कर लिया है कि अब मैं रुकने वाली नहीं हूं। ट्रोलर्स के अंगूठे में घाव कर दूंगी। बिहार डायरीज वेबसीरीज में भी मेरा एक गीत है ‘हथिया हथिया शोर कइले, गधहो न ले अइले रे…।’

नेहा सिंह राठौर भोजपुरी को मशहूर सिंगर हैं। पिछले कुछ साल से अपने गानों की वजह से राजनीति में भी खूब सुर्खियां और लोकप्रियता बटोर रही हैं। 

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें