शशिकांत गुप्ते
देश के विपक्ष को सत्तापक्ष की आलोचना का कोई ना कोई मुद्दा चाहिए।
यह विपक्ष की कुण्ठाओं का ही नतीजा है?
सन 2014 के बाद देश के राजनैतिक मानचित्र से विपक्ष उसी तरह गायब है,जिस तरह सन 2014 के पूर्व देश का इतिहास शून्य है?
सन 1947 से लेकर 2014 तक देश में कुछ हुआ ही नहीं था, मतलब जो आज स्वयं विपक्षीदल होने का दावा करतें हैं, वे ही सत्ता में थे और उन्होंने कुछ भी किया ही नहीं। देश में सर्वत्र कचरा भरा हुआ था।
जिस तरह हीरा हीरे को काटता है। ज़हर ज़हर को मारता है,ठीक उसी तरह सच्चें राष्ट्रवादियों ने कचरा साफ करने के लिए सर्वत्र कीचड़ फैलाया।
कीचड़ में ही कमल खिलता है।
कमल नयनाभिराम फूल है। नयनाभिराम का मतलब सिर्फ नयनों को सुंदर और मनोहर लगने वाला।
कलम का फूल धन की देवी लक्ष्मीमाता को चढ़ाया जाता है।इसका मतलब कमल के फूल का लक्ष्मीजी के साथ तारतम्य स्थापित है। इसका प्रमाण है, विश्व की सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी और इसी पार्टी को अन्य पार्टियों से कईं गुना अधिक प्राप्त होने वाला चंदा।
बहरहाल चर्चा का मुख्य मुद्दा है, विपक्ष के द्वारा सत्ता पक्ष की आलोचना का।
देश की सुरक्षा के लिए जासूसी अनिवार्य है। जासूसी के लिए कोई तकनीक भी चाहिए।
सत्ता पक्ष को संयोग से Pegasus Spyware नामक एक Software मिल गया।
सामान्य ज्ञान की बात है,जासूसी करने के लिए यदि, कोई यंत्र खरीदा जाएगा तो,जाहिर सी बात है, ऐसा यंत्र गोपनीय तरीके से ही खरीदा जाएगा?
विपक्ष को चाहिए कि,ऐसे यंत्र के बारे में ढिंढोरा पीट कर ऐसे महत्वपूर्ण यंत्र की गोपनीयता को उजागर करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए?
जासूसी किसकी करना,किसे संदेहास्पद मानना यह सत्ता के विवेक पर निर्भर है। जो सत्ता यह दावा करती है कि, सबका साथ, सबका विकास,और सबका विश्वास,ऐसी सत्ता जासूसी यंत्र का दुरुपयोग कैसे करेगी?
भारत की जनता को सन 2014 में पहली बार एक सक्षम,मजबूत और ईमानदार और प्रभु रामजी पर आस्था रखने वाली सत्ता प्राप्त हुई है।
जो लोग भगवान पर आस्था रखतें हैं,वे कभी भी कोई ग़लत काम कर ही नहीं सकतें हैं। कारण वे लोग जानतें हैं, ईश्वर सब देखता है।
किसी शायर ने कहा है,
भलाई कर भला होगा
बुराई कर बुरा होगा
कोई देखें या न देखें
खुदा तो देखता होगा
आस्थावान लोग यह भी जानतें हैं कि, ऊपरवाले की लाठी में आवाज नहीं होता है।
विपक्ष को वर्तमान सत्ता की आलोचना करने के पूर्व सोचना चाहिए।
वर्तमान सत्ता में धार्मिक लोग विराजमान है। इसीकारण सत्ता के समर्थक भी धार्मिक ही होंगे?
धार्मिक लोग कभी भी किसी के लिए अपशब्दों का प्रयोग नहीं करतें हैं।
कुछ लोग धार्मिकता का स्वांग रच कर विधर्मियों के लिए कटुता पैदा करतें हैं, यह लोग सत्ता के समर्थक हो ही नहीं सकतें हैं?
कारण सच्चे धार्मिक लोग ऐसा कोई आचरण नहीं करेंगे जिससे आस्थावान लोगों की सत्ता कमजोर हो और विपक्ष को आलोचना का मुद्दा मिल जाए?
सबुरी का फल मीठा होता है।
सन 2014 में सौभाग्य से देश की जनता को जो सत्ता मिली है।यह सत्ता निश्चित ही सारे वादें पूरे करेगी है।
देश में कोई भी बेरोजगार नहीं रहेगा। कोई भी गरीब नहीं रहेगा।
सर्वत्र खुशहाली होगी।
रामजी का मंदिर निर्मित होने में ज्यादा देर नहीं है।
उपर्युक्त मुद्दों पर आमजन को गम्भीरता से सोचना चाहिए।
विपक्ष के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
सत्तापक्ष के लोगों ने रामजी की कसम खाई है।
इसीलिए पेगासस जैसे किसी जासूसी यंत्र से डरना नहीं चाहिए।
सत्ता सिर्फ आतंकी,देशद्रोही गतिविधियों के लिए ऐसे जासूसी यंत्र का उपयोग करेगी। यह विश्वास रखना चाहिए।
वैसे तो कहा जाता है कि, खेल,युध्द,प्रेम और राजनीति में सब जायज़ है।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





