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बजट में कारपोरेट को अमृत और गरीब को विष 

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सुसंस्कृति परिहार
आम बजट आता है तो आम लोग सबसे पहले उसमें मिलने वाले फायदों को देखते हैं लेकिन इस बार का बजट इस तरह का कोई भी  फायदा कहीं से नहीं दे रहा है । युवा वर्ग को नौकरी, 5 जी सुविधा और मोबाइल चार्जर सस्ते के फैसले पर युवाओं में हल्की खुशी देखी गई जबकि आत्मनिर्भर भारत में मात्र 16 लाख बेरोजगारों को रोजगार की योजना है इस घोषणा को नाकाफी बताया जा रहा है।उधर मनरेगा के बजट में 25.51 फीसदी की कमी कर दी गई जो भी रोजगार छीनेगी। 

व्यापारी वर्ग के हाथ भी निराशा ही लगी है। ऐसा लगता है वित्त मंत्री ने आम बजट से व्यापारी, शिक्षक और युवाओं को साधने की कोशिश की है। इसलिए पूरा बजट शिक्षा,डिजिटल करेंसी, एजुकेशनल चैनल आदि पर आधारित था। जिसे शिक्षा में आए व्यवधान से उबरने का डोज़ बताया जा रहा है ।शिक्षा जगत से जुड़े विद्वानों ने इस डोज़ पर भरोसा नहीं जताया है वे इसे बेतुका बताया रहे हैं।        इधर बजट आम आदमियों का संत्रास ही बढ़ा गया है। सबसे ज्यादा तो नौकरीपेशा वर्ग मायूस है जिस पर लगाए जाने वाले इनकम टैक्स की घोर उपेक्षा की गई है।यह वही वर्ग है जो सरकार बनाने और गिराने में अहम भूमिका का निर्वहन करता है।  पुरानी पेंशन वापसी का ख्वाब देखने वालोंं को निराशा ही हाथ लगी है  किसानों के एम एस पी के लिए बजट का प्रावधान है लेकिन कम है जबकि उत्पादन बढ़़ा है  । गृहणियों को स्टील के बर्तन सस्ते कर लुभाने का प्रयास किया गया है बर्तनों का क्या होगा जब बर्तनों की शोभा बढ़ाने वाले पकवान उन तक मंहगाई के कारण नहीं पहुंच पायेंगे।स्टील बर्तन लेने का कोई फायदा भी नहीं क्योंकि दरकने या टूट-फूट के बाद उनका कोई मूल्य और उपयोग नहीं बचता ।
हां फायदे में तो कारपोरेट के ही हिस्से में आए है जिसे आयकर में भारी छूट दी गई।हीरे के दाम कम किए गए ताकि कारपोरेट महारानी चप्पल जूतों में हीरे जड़ा कर पहन सकें हम गर्वित हों तथा देश का नाम दुनिया में ऊंचा कर सकें। 400 वंदेमातरम् ट्रेनें भी चलेंगी। भारतीय रेल्वे जनता के पैसे से इसे बनायेगी और चलाने बेच देगी अडानी जी को।हम अन्य ट्रेनों की तरह उन्हें भी देखते रह जाएंगे।
केन्द्र सरकार ने इस बार तय किया है कि इस साल RBI भी अपनी क्रिप्टो करेंसी ‘CBDC’ को निवेशकों के लिए बाज़ार में उतारेगी। जनता इसमें वैसे ही अपना पैसा लगा सकेगी जैसे कि गोल्ड बॉन्ड या स्वर्ण प्रतिभूतियों में लगाया जाता है। अलबत्ता, गोल्ड बॉन्ड के मामले में सरकारें गारंटी देती हैं कि जिस दिन हम इसे भुनाना चाहेंगे, उस दिन के सोने के बाज़ार भाव से हमें भुगतान किया जाएगा। फिर चाहे हम सोना लें या रुपया। लेकिन CBDC के मामले में ऐसा कुछ भी हो पाना नामुमकिन होगा।बजट-2022 के ज़रिये केन्द्र सरकार भले ही इस बात को लेकर गदगद हो कि उसने क्रिप्टो करेंसी की कमाई पर 30% इनकम टैक्स और 1% TDS  लगाकर उसे अपने आगोश में ले लिया।यह गैरकानूनी धंधा है जिसमें अब रिजर्व बैंक को भी डिजिटल करेंसी के बहाने शामिल किया गया है। इसमें ख़तरे भी हैं। इससे हालांकि आम आदमी को क्या लेना देना ? 
बजट पर ममता बनर्जी ने ट्वीट किया कि बेरोजगारी और महंगाई से पिस रहे आम लोगों के लिए बजट में कुछ नहीं है. बड़ी-बड़ी बाते हैं और हकीकत में कुछ नहीं है. ‘पेगासस स्पिन बजट’ है।राहुल गांधी ने भी इसे शून्य सम बजट माना है।र गांधी  ने कहा कि बजट में मध्य वर्ग, वेतनभोगी वर्ग, गरीब और वंचित वर्ग, युवाओं, किसानों और एमएसएमई के लिए कुछ नहीं है.  जबकि पीएम मोदी ने कहा कि ये बजट, अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ ही अनेक नए अवसर बनाएगा। इस बजट का एक महत्वपूर्ण पहलू है- गरीब का कल्याण. ये बजट 100 साल की भयंकर आपदा के बीच, विकास का नया विश्वास लेकर आया ।
आप खुद ही फैसला कीजिए कि बजट से आपको क्या मिला है ? जहां दस करोड़ बेरोजगार सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही है वहां देश भर में16लाख रोजगार ऊंट के मुंह में जीरा होगा । मनरेगा का बजट घटने के बाद क्या होगा बताने की ज़रूरत नहीं। यह बजट गरीब के कल्याण का नहीं कारपोरेट के कल्याण का ही बजट है।बजट मंथन के बाद सारा अमृत कारपोरेट ले गए मित्र जो ठहरे और गरीबों के हिस्से विष आया।एक परिचर्चा में मशहूर विद्वान जगदीश्वर चतुर्वेदी ने कहा कि “यह बजट घर घर मोदी की कामयाबी है।घर घर में युवा 5जी का आनंद लेता रहेगा।” मोबाइल चार्जर सस्ते होंगे और मुफ्त मिलता रहेगा मोबाइल। रोजगार, आंदोलन, प्रर्दशन सब बंद। इस गरल का सेवन बंद करें। सड़कों पर आवाज उठाएं तभी कुछ हासिल होगा।वरना कारपोरेट ही सत्ता संभाल ले तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।बजट से तो बिल्कुल यही साफ नज़र आता है।

Ramswaroop Mantri

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