-निर्मल कुमार शर्मा
अभी पिछले दिनों मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से मात्र 40 किलोमीटर दूर बैरासिया नामक कस्बे के पास बसई नामक मुहल्ले में गोसेवा – भारती नामक गौशाला, जिसकी संचालिका एक स्थानीय बीजेपी नेत्री है,से इस भयंकरतम् ठंड में भूख,बीमारी और ठंड से सैकड़ों गायों के मरने की खबर इस देश के सभी दृश्य और प्रिंट मिडिया में प्रकाशित और प्रसारित हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वहाँ की भयावह मंजर को आँखों से नहीं देखा जा रहा है, ‘इतनी कड़कड़ाती ठंड में बगैर किसी पर्याप्त छत या शेड के गाएं भूख-प्यास से ठिठुर रही हैं ! चारों तरफ कंकाल मात्र गायों की लाशें इधर-उधर बिखरी पड़ीं हैं,सर्वत्र बुरी तरह दुर्गंध फैली हुई है ! उन मरी हुई गायों के कुत्ते और कौए नोच-नोचकर खा रहे हैं,वहीं एक तरभ मैदान में एक बड़ा सा गड्ढा दिख रहा है, जिसमें सैकड़ों गायों के शव उनके मरने पर उसमें फेंका गया है ! ‘ तो ये है बीजेपी के कथित गोप्रेम में पागल सत्ता के कर्णधारों के नीतियों के अनुसार कथित गौमाता की दुर्दशा का आँखों देखा हाल !
प्रश्न है कि ये कथित गोरक्षक और उनके आका अगर वास्तव में गायों के प्राणों की रक्षा करना चाहते हैं तो पिछले दिनों मध्यप्रदेश की उक्तवर्णित दुःखद घटना के अलावे देश भर से इन्हीं कथित गोभक्तों के संगठनों द्वारा संचालित गौशालाओं में कुव्यवस्था से हजारों की संख्या में गाएं भूखी-प्यासी क्यों मर गईं ? उन पर इनको तरस क्यों नहीं आई ? अगर मान भी लिया जाय कि मुसलमान गोमांस खाते हैं और वे उस हेतु गायों की हत्या करते हैं तो गोवा और पूर्वोत्तर के बीजेपी शाषित राज्यों में जिस बड़ी संख्या में गायों को बीफ के लिए उनकी हत्याएं क्यों की जातीं हैं ?इसके अतिरिक्त भारत आज दुनिया के सबसे बड़े माँस निर्यातक देश के रूप में ब्राजील को पीछे छोड़कर प्रथम स्थान पर विराजमान कराने में श्रीमान् मोदी जी को ही श्रेय जाता है,क्योंकि मोदीजी के कथित कुशल हाथों में चलती मोदीएंड कंपनी सरकार अपने प्रथम कार्य काल में यहाँ के हिन्दुओं द्वारा संचालित चारों गायों के बधशालाओं को अत्याधुनिक बनाने के लिए करोड़ों का अनुदान उपलब्ध कराया गया था ! उन पशु वधशालाओं में एक-दो,आठ-दस नहीं एक ही दिन में हजारों निरीह गायों की निर्ममता से हत्या करने वाले भारत के सबसे बड़े चारों वधस्थल या स्लॉटर हाउस हिन्दुओं के ही हैं । इन गोरक्षकों को वहाँ जाकर गायों की इतनी बड़ी संख्या में हो रही हत्या से उन्हें बचाने की कोशिश करनी चाहिए । सबसे पहले तो उन गायों के सबसे बड़े हत्यारों की निरपराध पहलू खां की तरह सड़क पर घसीट -घसीट कर,पीट-पीटकर हत्या करनी चाहिए,वहां इनकी गायों के प्रति करूणा,दया और गोमाता प्रेम कहाँ चला जाता है ? हक़ीक़त यह है कि इन्हें गाय से प्रेम नहीं है,अपितु वह तो एक बहाना मात्र है इनका मुख्य उद्देश्य है समाज में एक धार्मिक वैमनस्यता पैदाकर धर्मांध हिन्दुओं के वोटों की फसल काटनी है । वास्तविकता यह है कि सत्ताधारियों के लिए गोरक्षा करना इनका एक स्टंट मात्र है वे अपने पालतू बजरंग दल के गुँडों से अल्पसंख्यकों को एक दहशत में रखने की सुनियोजित चाल मात्र है । पिछले वर्षों में मॉब लिंचिंग के तहत कथित गोरक्षक बने गुँडों द्वारा पालतू और दुधारू पशुओं के गरीब व्यापारियों की जिस प्रकार सुनियोजित ढंग से सरेआम दिन में भीड़ भरी सड़कों पर हत्याएं की जा रहीं थीं,वे भी इसी सोची-समझी,कुटिल रणनीति का ही एक हिस्सा था कि भारतीय समाज में एक संदेश जाए कि हम किसी की,कहीं भी,हत्या कर सकते हैं यथा राजस्थान में पहलू खां की निर्मम हत्या और भारतीय पुलिसिया तंत्र के भ्रष्ट जाँच अधिकारी के कुकृत्यों को सारा देश देख चुका है और झारखण्ड तथा अन्य अनेक जगहों पर जै श्रीराम बोलने को बाध्य करके बजरंग दल के गुँडों द्वारा अल्पसंख्यकों की जा रही बर्बर और जघन्यतम् हत्याएं भी इस देश के वासियों,को डराने-धमकाने की रणनीति का ही एक हिस्सा है ।
आज वास्तव में इस देश में रहकर यह विश्वास करना कठिन होता जा रहा है कि हम भारत के लोग क्या वास्तव में इक्कीसवीं सदी के ज्ञान-विज्ञान के अंतरिक्ष युग में जी रहे हैं या हम आज से दस-बीस हजार साल पूर्व के बर्बर,आदिम प्रस्तर युग और कबीलाई समाज में जी रहे हैं ? इस देश में हर जगह जाहिलों,मूर्खों, मूढ़ों,अंधभक्तों और अंधविश्वासियों का वर्चस्व होता जा रहा है !भारतीय समाज आज इतना जाहिल,दब्बू और डरपोंक हो गया है कि यहाँ सार्वजनिक तौर पर सच को सच कहने को कोई राजी नहीं है ! भारतीय समाज के प्रोफेसर्स और डॉक्टर्स यथा प्रोफेसर एस.एम.कलबुर्गी,प्रखर पत्रकार गौरी लंकेश,डॉक्टर नरेन्द्र दाभोलकर और कामरेड गोविंद पानसारे जैसे प्रगतिशील और अंधविश्वास के खिलाफ सच बोलने और लिखने वाले इस देश के सपूतों को दिनदहाड़े दक्षिण पंथी अंधविश्वास समर्थक गुँडों द्वारा वर्तमान समय के सत्ता के अत्यंत क्रूर,निर्दयी,जालिम,फॉसिस्ट, अलोकतांत्रिक और तानाशाही प्रवृत्ति के सत्ता के कर्णधारों के गुप्त इशारे पर मौत के घाट उतारकर इस देश के प्रगतिशील और जागरूक लोगों को धमकाने और भयभीत करने की जोरदार और लगातार कोशिशें हो रहीं हैं,इसके अतिरिक्त इन हत्या करने वाले हत्यारों की आलोचना करने वालों को भी आजकल उन्हें सत्ताधारी वर्ग द्वारा वित्त पोषित आईटीसेल और बीजेपी के बड़े नेताओं द्वारा एक नई गाली अर्बन नक्सली,पाकिस्तानपरस्त, देशद्रोही आदि-आदि कहकर उन्हें अपमानित किया जाता रहा है । आज इस देश की वास्तविकता और कटुसच्चाई यह है कि आज इस देश को कुछ गिने-चुने दंगाफैलाने व करवाकर हत्या करने वाले सत्ता के उच्च शिखर पर पहुंच कर इस देश की अधिकतर मिडिया,यहाँ के समाचार पत्रों,पुलिस तंत्र,चुनाव आयोग,मिलिट्री के कुछ उच्च अधिकारियों, न्यायपालिका के कुछ जजों,फिल्म जगत के कुछ नामचीन हस्तियों आदि को डरा-धमकाकर,खरीद कर, प्रलोभन देकर सच पर पर्दा डालने के लिए पाल रखे हैं । एक तरह से आज यह पूरा देश ही इनका बंधक बनकर रह गया है । कुछ लोगों या उनके संगठनों द्वारा इस देश की हक़ीक़त या सच्चाई बताने की हिम्मत किया जाता है तो उक्त तरह के सरकार के पालतू लोगों और सत्तारूढ़ सरकार के कर्णधारों द्वारा गठित आईटीसेल के अशिष्ट गुँडों द्वारा उन लोगों पर जबर्दस्त अभद्र,अमर्यादित,अश्लील और गालीगलौज की भाषा में निर्मम तरीके से आक्रमण कर दिया जाता है,जिसमें सत्ता पक्ष का भरपूर समर्थन रहता है । उदारणार्थ अभी पिछले दिनों मॉबलिंचिंग मामले में देश के प्रधानमंत्री जी को संयुक्त रूप से एक चिट्ठी लिखने पर कुछ बुद्धिजीवियों के एक समूह की खूब छिछालेदर की चुकी है !
ये वर्तमान सरकार इस समाज में अशिक्षा,धर्मांधता,कूपमंडूकता और गरीबी की बैशाखी का प्रयोग कर भारतीय समाज को पुनः जातिआधारित,ऊँचनीच,भेदभावपूर्ण, दकियानूसी और अंधविश्वासी प्राचीन काल के मनुवादी संस्कृति में बदलना चाह रहे हैं,ताकि जन्म आधारित कथित उच्च जातियों को बगैर किसी प्रतिभा और मेहनत के इस समाज में,इस सरकार में प्रतिष्ठा,पद और पैसा आदि-आदि सब कुछ आसानी से सुलभ होता रहे,मोदी की सरकार ने इस दिशा में कार्य करना भी शुरू कर दिया है यथा बड़ी नौकरियों जैसे आईएएस,सुप्रीमकोर्ट में जजों आदि में कथित बड़ी जातियाँ पहले से ही कब्जा जमाए बैठीं हैं,अब सचिव स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति बगैर किसी परीक्षा और इंटरव्यू के रखने का सिलसिला भी मोदीराज में बेशर्मी से शुरू हो चुका है,उसमें निर्विवाद रूप से उन्हीं लोगों के मित्रों,परिजनों और रिश्तेदारों का चयन होता है जो सत्ता के शीर्ष पर बैठे हैं !
कितने आश्चर्य की बात है कि भारत का प्रधानमंत्री सार्वजनिक रूप से जानबूझकर अतार्किक और अंधविश्वास पूर्ण बातें मसलन हमारे देश में प्लास्टिक सर्जरी लाखों साल पहले से होती आई है मानव बच्चे के सिर कटी गर्दन पर हाथी के बच्चे का सिर जोड़ देने मतलब गणेश की परिकल्पित कल्पना का उदाहरण देना,बादलों के पीछे रॉडार का काम न करना आदि-आदि कहना !इसी प्रकार हाईकोर्ट के एक अंधभक्त जज का यह मूर्खतापूर्ण कथन कि मोर के आँसुओं से मोरनी गर्भवती हो जाती है ! जालंधर विज्ञान कांग्रेस में एक चमचा वैज्ञानिक का यह कथन कि रावण की सेना में कई आधुनिकतम विमानों के स्क्वाड्रन थे ! आदि-आदि ये बयान अनजाने में नहीं इस समाज को मूर्ख बनाने के लिए जानबूझकर दिए जा रहे हैं । आज देशहित में भारत के बेरोजगार नवयुवकों को रोजगार देना देश और इस सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए,परन्तु पिछले कुछ वर्षों से काँवड़ यात्रा के नाम पर भारत के धर्मभीरु नवयुवकों को गुमराह करने की जोरदार और सुनियोजित ढंग से इस सरकार और उनके कुछ शातिर बुद्धिजीवियों की तरफ से भरपूर प्रयास करके इस देश को उलटी दिशा में भ्रमित कर सफलतापूर्वक घुमाया जा रहा है । आज हम सभी प्रबुद्ध भारतीयों को यह जबर्दस्ती घूँट पिलाया जा रहा है कि प्राचीनकाल के लिखे वेदों,उपनिषदों,पुराणों आदि में बहुत वैज्ञानिक बातें लिखी हुईं हैं । कहा यह भी जा रहा है कि आज की वैज्ञानिक प्रगति हमारे प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा अविष्कृत उपकरणों से कतई बेहतर नहीं हैं अभी एक विडिओ वाइरल हुई है जिसमें कुछ गुँडे तत्व नारे लगा रहे हैं कि भारतीय संविधान हमारे अधिकार छीनने का काम किया है,इसलिए इस भारतीय संविधान को जला दो !भारतीय संविधान को नष्ट कर दो और माचिस से भारतीय संविधान को जलाते हुए वे गुँडे दिख भी रहे हैं । सबसे बड़ी हतप्रभ और दुःख की बात यह है कि मोदी एंड कंपनी सरकार को कुछ गुँडों के समूह द्वारा किए जा रहे इस जघन्यतम अपराधिक और देशद्रोही कुकृत्य में कहीं कुछ गलत नहीं दिख रहा है ! यह ऑकस्मिक नहीं हो रहा है यह जानबूझकर किया जा रहा है,ताकि जाति आधारित कथित मनुस्मृति नामक कथित संविधान को स्थापित कर इस देश में जातिगत् ऊँच-नीच,अश्पृश्यता,छूआ-छूत को लागू करने का घृणित व्यवस्था लागू हो सके, क्योंकि हिन्दू धर्म जातिगत् वैमनस्यता, छुआछूत,भेदभाव के दुराग्रह से ही अपनी सांस लेता है ! हमें अब सोचना ही होगा कि हमें भविष्य का कैसा भारत चाहिए,वैज्ञानिक सोच सम्पन्न प्रगतिशील भारत या अंधविश्वास और अधम और दुष्ट मनु के बनाए कथित मनुस्मृति के अनुसार जातिआधारित पाखण्डी भारत ?
-निर्मल कुमार शर्मा, ‘गौरैया एवम पर्यावरण संरक्षण तथा पत्र-पत्रिकाओं में सशक्त व निष्पृह लेखन ‘,प्रताप विहार,गाजियाबाद, उप्र,पिनकोड नंबर-201009,संपर्क -9910629632,ईमेल-nirmalkumarsharma3@gmail.com_*





