विविधता को देखिए कई वेश में
कुछ दिन गुजारिए भारत देश में
स्वास्थ्य व आध्यात्म के लिए हो या आनंद के लिए या चिकित्सा-उपचार के लिए, पर्यटन का कोई भी स्वरूप जीवन में नई
ऊर्जा और राष्ट्र की गौरवशाली पहचान का परिचायक होता है। जिसके लिए जरूरी है- आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर। चाहे रेल,
रोड, एयरवेज, वॉटरवेज हो या उसके साथ-साथ होटल-हॉस्पिटल और इंटरनेट-मोबाइल कनेक्टिविटी, स्वच्छता सफाई
व्यवस्था और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की समुचित व्यवस्था हो या अब कोविड के नए दौर में वैक्सीनेशन का सुरक्षा चक्र। विश्व
में आज पर्यटन बहुत तेज गति से आगे बढ़ने वाला व्यावसायिक क्षेत्र है और 21वीं सदी का भारत इसी दृष्टिकोण के साथ तेज
गति से प्रगति कर पर्यटन के क्षेत्र में देश और दुनिया में पैदा कर रहा है नया विश्वास। साथ ही, इस वर्ष में 25 जनवरी को
राष्ट्रीय पर्यटन दिवस पर दुनिया को दे रहा है संदेश- महान विरासत संजोए हजारों साल की गाथा वाले हिंदुस्तान के पर्यटन
को अब कोई रोक नहीं सकता……

उड़ान योजना के जरिए विजयवाड़ा से कडप्पा की दूरी एक घंटे में तय करने वाले आंध्र प्रदेश के नागेंद्र भारती कहते हैं…
कडप्पा से विजयवाड़ा की यात्रा वो भी बच्चों के साथ, पहले यह बहुत मुश्किल भरी होती थी। सड़क मार्ग से इसमें 8 से 11
घंटे तक लग जाते थे, लेकिन अब उड़ान योजना के बाद मैं यहां अपनों के साथ कनक दुर्गा माता के दर्शन करने आया हूं। इस
बेहतरीन योजना के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद।
संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन ने बीते दिसंबर में ही तेलंगाना के पोचमपल्ली गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव के रूप में चुना
और पुरस्कृत किया है। यह पुरस्कार 2 दिसंबर 2021 को स्पेन के मैड्रिड में संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ)
महासभा के 24वें सत्र के अवसर पर प्रदान किया गया। पोचमपल्ली की अनूठी बुनाई शैलियों और पैटर्न को प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र से आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के एक भाग के रूप में विशेष रूप से पहचान
मिली है। इस वर्ष राष्ट्रीय पर्यटन दिवस का मुख्य समारोह 25 जनवरी को इसी पोचमपल्ली गांव में आयोजित हो रहा है।
वर्ष 2021 के दिसंबर के शुरुआती दिनों में अमेरिका के शिकागो के 69 वर्षीय वोल्टर साइमन मिलियो और 80 वर्षीय जॉन
मध्य प्रदेश के खजुराहो का मंदिर देखने आए। मार्च 2020 के कोविड लॉकडाउन के बाद पहली बार पर्यटक वीजा पर 18
दिनों के लिए भारत पहुंचे दोनों अतिथियों ने मौजूदा परिस्थितियों में यहां के पर्यटन स्थल को सुरक्षित और उपयुक्त बताया।
वैक्सीनेशन अभियान को दुनिया के अन्य देशों की तुलना में बेहतर बताया। उम्र के इस पड़ाव में भ्रमण को लेकर उनका
कहना था…पर्यटन के लिए उम्र कोई बंधन नहीं है। जब तक आप फिट हैं दुनिया देखनी चाहिए। दरअसल वोल्टर और जॉन
भारत सरकार की पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 5 लाख मुफ्त वीजा देने की पहल के तहत भारत आए थे और कोविड के दौर
में उन्हें वातावरण इतना अच्छा लगा कि उन्होंने सबसे पर्यटन के लिए भारत आने की अपील भी की।

अनुभव से संतुष्टि मिलती है और पर्यटन से ही अनुभव मिल पाता है। इसी पर्यटन से जब आधुनिकता जुड़ती है तो उसके कैसे
परिणाम आते हैं, भारत का पर्यटन इसका साक्षी बन रहा है। उपरोक्त तीनों उदाहरण यह बताते हैं कि पर्यटन पुनर्जीवन की
पहल से बेहतर सुविधा, माहौल, कनेक्टिविटी और राष्ट्र के प्रति समर्पित भाव से कुछ करने का संकल्प हो, तो गौरवशाली
इतिहास समेटे और आधुनिकतम इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करते भारत को दुनिया में छाने से कोई रोक नहीं सकता। कोविड
महामारी ने जीवन के हर क्षेत्र को प्रभावित किया। लेकिन ‘न्यू-नॉर्मल’ के इस दौर में टीकाकरण में भारत की तेज गति
आर्थिक से लेकर पर्यटन तक, हर क्षेत्र में नए बदलावों के साथ नई दिशा दे रहा है। इसी का परिणाम है कि आधुनिक
इंफ्रास्ट्रक्चर और समग्रता की सोच के साथ इस क्षेत्र का भी विकास भारत के पर्यटन को उम्मीदों की रफ्तार दे रहा है।
दुनिया के 160 से अधिक देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की पहल ने भारतीय पर्यटन को नया आयाम दिया है। विभिन्न
एजेंसियों के आकलन को देखें तो बीते सात वर्षों में विश्व पर्यटन रैंकिंग में भारत 2009 से 2013 तक 62 से 65वें पायदान पर
ही रुका पड़ा था, लेकिन अब चंद वर्षों में ही लगभग दोगुनी छलांग के साथ 34वें स्थान पर आ गया है। इतना ही नहीं, पर्यटन
के लिहाज से भारत दुनिया की 7वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तो हेल्थ टूरिज्म के मामले में दुनिया का तीसरा सर्वश्रेष्ठ देश बन
चुका है। पर्यटन के क्षेत्र में विकास की समग्र सोच का परिचायक केवड़िया है जो आज पर्यटन क्षेत्र के लिए अध्ययन का विषय
बन गया है।
आस्था-आध्यात्म-अध्ययन का टूरिज्म हो या हेल्थ-वेलनेस टूरिज्म, सांस्कृतिक टूरिज्म हो या हेरीटेज टूरिज्म या इको टूरिज्म,
युवा टूरिज्म हो या व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ा टूरिज्म, भारत दुनिया का सबसे आकर्षक पर्यटन केंद्र (टूरिस्ट
डेस्टिनेशन) बन रहा है। कोविड के समय सूने पर्यटक स्थल अब वैक्सीनेशन और भारत सरकार की महामारी के खिलाफ
अभूतपूर्व कदम की वजह से एक बार फिर चहल-पहल से आबाद दिख रहे हैं। पर्यटन पुनर्जीवन की पहल से यह क्षेत्र वैश्विक
महामारी के बाद तेजी से उबरने की क्षमता रखता है,क्योंकि केंद्र सरकार ने इस महामारी से प्रभावित आर्थिक-सामाजिक
क्षेत्रों के साथ-साथ पर्यटन को भी प्राथमिकता दी है। बीते वर्ष जून में केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2022 तक के लिए 5 लाख
विदेशी पर्यटकों को मुफ्त वीजा जैसे कदम उठाए हैं तो ट्रैवल और टूरिज्म से जुड़े हितधारकों को 10 लाख रुपए तक का लोन
शत-प्रतिशत सरकारी गारंटी के साथ पर्यटन मंत्रालय की ओर से दिया जा रहा है। पंजीकृत टूरिस्ट गाइड को भी 1 लाख
रुपए तक के लोन की व्यवस्था की गई है। हालांकि कोविड के नए वेरिएंट को देखते हुए मुफ्त वीजा की अवधि को बढ़ाने पर
भी विचार किया जा रहा है। केंद्र सरकार लगातार अपने कदमों से यह संदेश दे रही है कि आगे भी हर वो कदम उठाने के
लिए प्रतिबद्ध है, जो देश के टूरिज्म सेक्टर को तेजी से आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध हों। हालांकि कोविड के नए वैरियंट के
सामने आने से इस थोड़ा असर पड़ सकता है, लेकिन समावेशी समृद्धि के लिए पर्यटन एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
इसके लिए हो रहे प्रयासों की वजह से दुनिया के पर्यटन मानचित्र में भारत चमकता सितारा बनकर उभर रहा है। ई-वीजा,
कनेक्टिविटी, उड़ान जैसी योजना, सड़कों का जाल, पर्यटक स्थलों पर आधुनिक बुनियादी सुविधाओं का निर्माण और दुनिया
में सर्वाधिक लोकप्रिय राजनेता के तौर पर स्थापित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भरोसेमंद छवि पर्यटकों के लिए ब्रांड एंबेसडर
जैसी है। उनकी छवि और पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल का ही परिणाम है कि विरासत स्थलों (हेरीटेज साइट) को गोद लेने
की ‘Adopt a Heritage’ की 2017 में की गई अपील से कॉरपोरेट जगत के लोग न सिर्फ उत्साहित हैं, बल्कि अभी तक 29
विरासत स्थलों के लिए समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर हो चुके हैं और कई स्थलों पर अत्याधुनिक सुविधाओं का निर्माण भी हो
चुका है। अपने विदेश दौरे में प्रधानमंत्री मोदी कई बार भारतीय मूल के लोगों को संबोधित करते हुए आह्वान करते आ रहे
हैं कि साल में कम से कम पांच गैर भारतीय परिवारों को भारत आने के लिए प्रेरित करें, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।
कोविड के दौर में सुरक्षा चक्र को मजबूत करते हुए भारत ने जिस गति से काम किया है, उसकी सराहना दुनिया कर रही है।
इसी का लाभ उठाते हुए भारत सरकार ने ब्रांड इंडिया को बढ़ावा देने के लिए 20 से अधिक दूतावासों में पर्यटन अधिकारी
नियुक्त किए हैं। अमृत महोत्सव वर्ष में केंद्र सरकार ने 75 पर्यटन स्थलों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने की
पहल शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री ने घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अपने मन की बात प्रोग्राम के जरिए लोगों से अपील
की थी कि साल में 15 जगहों पर पर्यटन के लिए जाएं और उसके बारे में लिखकर जागरूकता पैदा करें। महात्मा गांधी,
लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानंद और पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम जैसी शख्सियत ने जब भारत भ्रमण किया तो
तब उनको भारत को देखने-समझने में और उसके लिए जीने-मरने के लिए एक नई प्रेरणा मिली। ऐसे में ‘एक भारत-श्रेष्ठ
भारत’ का नारा देकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की विविधता को एक सूत्र में पिरोया। भारत में सामान्य तौर से
अक्टूबर से मार्च तक का समय पर्यटन का रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार की पहल से पर्यटन स्थलों पर अब
लोगों की संख्या बढ़ने लगी है।
पर्यटन किसी भी राष्ट्र और समाज के समावेशी समृद्धि का परिचायक होता है। यही वजह है कि बीते कुछ वर्षों में केंद्र
सरकार ने घरेलू और विदेश नीति में सुधार से पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल की है। पर्यावरण, परिवहन और पर्यटन इसका
आपस में गहरा रिश्ता है। इसलिए पूर्वोत्तर के क्षेत्र हों या फिर आस्था, आध्यात्म के क्षेत्र, आदिवासी पहचान के क्षेत्र हों या
कंचनजंगा की सबसे ऊंची चोटी और कैलाश मानसरोवर की यात्रा, पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने
ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म को ट्रांसफोर्मेशन यानी परिवर्तन का साधन बनाया है। इको-टूरिज्म पर फोकस के साथ सतत पर्यटन के
लिए एक राष्ट्रीय रणनीति और रोडमैप का मसौदा तैयार हो चुका है।
बेहतर बुनियादी ढांचे से बढ़ता पर्यटन का आधार
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी का सबसे अधिक लाभ पर्यटन क्षेत्र को होता है। यह एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें हर
किसी के लिए कमाई के साधन हैं। कम से कम निवेश में अधिक से अधिक आमदनी टूरिज्म के माध्यम से संभव है। इसी सोच
के साथ, देश, लोकल टूरिज्म के लिए वोकल हो, इसके लिए अनेक स्तरों पर काम चल रहा है। जब एयर कनेक्टिविटी बढ़ती
है, तो पर्यटन भी उतना ही ज्यादा फलता-फूलता है। माता वैष्णो देवी की यात्रा हो या फिर केदारनाथ यात्रा, हेलीकॉप्टर
सेवा से जुड़ने के बाद वहां श्रद्धालुओं की संख्या में निरंतर बढोतरी हो रही है। हाल ही में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की
पहल भी यही काम करने वाली है। बीते कुछ वर्षों में जो प्रयास हुए हैं, उनका प्रभाव भी नजर आने लगा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के
विकास की वजह से विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने में उत्तर प्रदेश देश के टॉप तीन राज्यों में आ चुका है। उत्तर प्रदेश में
पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाओं के साथ-साथ आधुनिक कनेक्टिविटी के साधन भी बढ़ाए जा रहे हैं। भविष्य में अयोध्या का
एयरपोर्ट और कुशीनगर का इंटरनेशनल एयरपोर्ट, देशी-विदेशी टूरिस्ट के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगे। कनेक्टिविटी से
जीवन और आजीविका पर कितना सकारात्मक असर पड़ता है, कोविड काल में देश ने अनुभव किया है। कनेक्टिविटी चाहे
रोड की हो या रेल की, हवाई कनेक्टिविटी हो या फिर इंटरनेट कनेक्टिविटी, आज देश की ये सबसे बड़ी प्राथमिकताएं हैं।
ऐसी ही सशक्त होती कनेक्टिविटी का सीधा लाभ पर्यटन को भी मिल रहा है, फल-सब्जी का उत्पादन करने वाले किसान-
बागबानों को भी स्वाभाविक रूप से मिल रहा है। गांव-गांव इंटरनेट पहुंचने से हिमाचल की युवा प्रतिभाएं, वहां की संस्कृति
को, पर्यटन की नई संभावनाओं को देश-विदेश तक पहुंचा पा रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत में भी 71 लाइट
हाउस चिन्हित किए गए हैं। इन सभी लाइट हाउस में उनकी क्षमताओं के मुताबिक म्यूजियम, थियेटर, कैफेटेरिया, बच्चों के
लिए पार्क, पर्यावरण के अनुकूल कॉटेज का निर्माण हो रहा है। देश के चयनित बंदरगाहों पर 2023 तक अंतरराष्ट्रीय समुद्रीय
पर्यटन को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
गोवा के टूरिज्म सेक्टर को आकर्षक बनाने के लिए, वहां के किसानों, मछुआरों और दूसरे लोगों की सुविधा के लिए, विशेष
रूप से कनेक्टिविटी से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर गोवा में अभूतपूर्व काम हो रहा है। ‘मोपा’ में बन रहा ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट
अगले कुछ महीनों में बनकर तैयार होने वाला है। इस एयरपोर्ट को नेशनल हाइवे से जोड़ने के लिए लगभग 12 हजार करोड़
रुपए की लागत से 6 लेन का एक आधुनिक कनेक्टिंग हाईवे बनाया जा रहा है। सिर्फ नेशनल हाईवे के निर्माण में ही बीते
सालों में हजारों करोड़ रुपए का निवेश गोवा में हुआ है।
इसी तरह, 2014 में देश ने इसी तरह तीर्थ स्थानों के विकास के लिए ‘प्रशाद स्कीम’ की भी घोषणा की थी। इस योजना के
तहत देश में करीब-करीब 40 बड़े तीर्थस्थानों को विकसित किया जा रहा है, जिनमें 15 प्रोजेक्ट्स का काम पूरा भी कर लिया
गया है। गुजरात में भी 100 करोड़ से ज्यादा के 3 प्रोजेक्ट्स पर प्रशाद योजना के तहत काम चल रहा है। गुजरात में सोमनाथ
और दूसरे पर्यटन स्थलों और शहरों को भी आपस में जोड़ने के लिए कनेक्टिविटी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके
पीछे सोच है कि जब पर्यटक एक जगह दर्शन करने आए तो दूसरे पर्यटक स्थलों तक भी जाए। इसी तरह, देश भर में 19
प्रसिद्ध पर्यटन केंद्रों (Iconic Tourist Destinations) की पहचान कर आज उन्हें विकसित किया जा रहा है। ये सभी
परियोजनाएं पर्यटन उद्योग को आने वाले समय में एक नई ऊर्जा देने वाले हैं। 15 थीम सर्किट में 76 सेक्टर को शामिल करते
हुए केंद्र सरकार 900 से अधिक पर्यटन स्थलों को आपस में जोड़ रही है। इनमें से 35 पर काम पूरा तो 15 जगहों पर 80
फीसदी काम हुआ है। अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देश ने इन 7 सालों में कई नीतिगत फैसले भी लिए हैं, जिनका
लाभ देश को आज हो रहा है। देश ने ई-वीजा और वीजा ऑन अराइवल जैसी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया है, और वीजा की
फीस को भी कम किया है। इसी तरह, पर्यटन सेक्टर में हॉस्पिटैलिटी के लिए लगने वाले जीएसटी को भी घटाया गया है।
एडवेंचर को ध्यान में रखते हुये देश ने 137 माउंटेन पीक्स को भी ट्रेकिंग के लिए खोला है। पर्यटकों को नई जगह पर
असुविधा न हो, नई जगहों की पूरी जानकारी मिले इसके लिए भी प्रोग्राम चलाकर गाइड्स को भी प्रशिक्षित किया जा रहा
है। दुनिया के देशों के पर्यटकों के मनोविज्ञान का अध्य्यन कर उनकी पसंद-नापसंद की मैपिंग कर भारत लगातार नए-नए
काम कर रहा है। पर्यटन स्थलों पर विशेष साइनेज, विदेशी भाषा वाले गाइड की सुविधा आदि की व्यवस्था से भारतीय
पर्यटन को नए आयाम मिल रहे हैं।
सांस्कृतिक-आध्यात्मिक पर्यटन:
भारतीय परंपरा का वाहक
आज पूरी दुनिया भारत के योग, दर्शन, आध्यात्म और संस्कृति की ओर आकर्षित हो रही है। नई पीढ़ी में भी अब अपनी जड़ों
से जुड़ने की नई जागरूकता आई है। इसीलिए, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में आज राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय
संभावनाएं हैं। इन संभावनाओं को आकार देने के लिए देश न केवल आधुनिक इनफ्रास्ट्रक्चर बना रहा है बल्कि प्राचीन गौरव
को भी पुनर्जीवित कर रहा है। रामायण सर्किट से भगवान राम कैसे पूरे भारत के राम हैं, इन स्थानों पर जाकर अनुभव करने
का मौका मिल रहा है तो बुद्ध सर्किट पूरे विश्व के बौद्ध अनुयायियों को भारत में आने की, पर्यटन करने की सुविधा दे रहा है।
अयोध्या के विकास की परिकल्पना एक आध्यात्मिक वैश्विक पर्यटन केंद्र और स्थाई स्मार्ट सिटी के रूप में की जा रही है। बीते
कुछ सालों में देशभर में इतिहास, आस्था, आध्यात्म, संस्कृति से जुड़े जितने भी स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है, उनका
बहुत बड़ा लक्ष्य पर्यटन को बढ़ावा देने का भी है। उत्तर प्रदेश तो पर्यटन और तीर्थाटन, दोनों के मामले में समृद्ध भी है और
इसकी क्षमताएं भी अपार हैं। चाहे वह भगवान राम का जन्म स्थान हो या कृष्ण का वृंदावन, भगवान बुद्ध का सारनाथ हो
या फिर काशी विश्वनाथ, संत कबीर का मगहर धाम हो या वाराणसी में संत रविदास की जन्मस्थली का आधुनिकीकरण, पूरे
प्रदेश में बड़े पैमाने पर काम चल रहा है। इनके विकास के लिए भगवान राम, श्रीकृष्ण और बुद्ध के जीवन से सम्बन्धित स्थलों
जैसे अयोध्या, चित्रकूट, मथुरा, वृन्दावन, गोवर्धन, कुशीनगर, श्रावस्ती आदि तीर्थ स्थलों पर रामायण सर्किट, आध्यात्मिक
सर्किट, बौद्ध सर्किट का विकास किया जा रहा हैं। भारत में सदियों से चारधाम यात्रा का महत्व रहा है, द्वादश ज्योतिर्लिंग के
दर्शन, शक्तिपीठों के दर्शन, अष्टविनायक के दर्शन की यह सारी यात्रा को जीवन काल का हिस्सा माना गया है। यह तीर्थाटन
सिर्फ पर्यटन भर नहीं है, ये भारत को जोड़ने वाली और उसका साक्षात्कार कराने वाली एक जीवंत परंपरा है। इसी को ध्यान
में रखते हुए हाल ही में उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम में पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण, इस इलाके के लोगों की सुविधा
के लिए आधुनिक अस्पताल, रेन शेल्टर जैसी सभी सुविधा श्रद्धालुओं की सेवा का माध्यम बनने वाली है। चारधाम सड़क
परियोजना पर तेजी से काम हो रहा है, चारों धाम हाईवे से जुड़ रहे हैं। भविष्य में यहां केदारनाथ जी तक श्रद्धालु केबल कार
के जरिए आ सकें, इससे जुड़ी प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। पवित्र हेमकुंड साहिब जी के दर्शन आसान हों, इसके लिए वहां भी
रोप-वे बनाने की तैयारी है। इसके अलावा ऋ षिकेश और कर्णप्रयाग को रेल से भी जोड़ने का प्रयास हो रहा है।
हाल ही में गुजरात के सोमनाथ मंदिर में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए अब यहां समुद्र दर्शन पथ, प्रदर्शनी, शॉपिंग
कॉम्प्लेक्स भी पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। इससे, यहां नए अवसरों और नए रोजगार का भी सृजन होगा और स्थान की
दिव्यता भी बढ़ेगी। आजादी के अमृत महोत्सव के समय देश भर में 10 जनजातीय संग्रहालय के निर्माण के जरिए जनजातीय
शौर्य गाथा और संस्कृति से परिचित कराने की पहल हो रही है। हाल ही में रांची में भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित ऐसे
संग्रहालय की शुरुआत हो चुकी है तो बहुत जल्द, गुजरात के राजपीपला, आंध्र प्रदेश के लांबासिंगी, छत्तीसगढ़ के रायपुर,
केरल के कोझिकोड, मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा, तेलंगाना के हैदराबाद, मणिपुर के तामेन्ग-लॉन्ग, मिजोरम के केलसिह, गोवा
के पौंडा में ऐसे म्यूजियम को साकार रूप दिया जाएगा। इन म्यूजियम से न केवल देश की नई पीढ़ी आदिवासी इतिहास के
गौरव से परिचित होगी, बल्कि इनसे इन क्षेत्रों में पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। उत्तर प्रदेश में महाराजा सुहेलदेव की 40
फीट की कांस्य प्रतिमा पर्यटकों को उनके जीवन से परिचित कराएगी। इस स्थल पर अनेक सुविधाओं का निर्माण पर्यटकों के
लिए आकर्षण का केंद्र होगा। ये सारे प्रयास, बहराइच की सुंदरता ही नहीं बढ़ाएंगे बल्कि यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या
में भी वृद्धि करेंगे।
हेल्थ-वेलनेस टूरिज्म को नए आयाम
कुछ लोग सोच सकते हैं कि हेल्थ केयर के प्रोग्राम का टूरिज्म से क्या लेना देना? लेकिन हेल्थ का टूरिज्म के साथ एक बड़ा
मजबूत रिश्ता है क्योंकि जब किसी देश का हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होता है, तो उसका प्रभाव टूरिज्म सेक्टर पर भी
पड़ता है। फिक्की की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के मेडिकल टूरिज्म में भारत का हिस्सा 20 फीसदी से ज्यादा है। भारत में
अमेरिका और यूरोप के मुकाबले 50 फीसदी तक सस्ता इलाज इसकी मुख्य वजह है। केंद्र सरकार की ओर से लगातार इस
दिशा में ध्यान देने का नतीजा है कि 2014 की तुलना में कोविड के ठीक पहले तक मेडिकल टूरिज्म सेक्टर में आने वाले
पर्यटकों की संख्या में 350% से ज्यादा की वृद्धि देखने को मिली। 2014 में इससे होने वाली कमाई 1.23 लाख करोड़ रुपये थी
तो 2019 में यह बढ़कर 2.10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई। यानी जिन-जिन जगहों पर हेल्थ इंफ्रा बेहतर होगा, वहां
टूरिज्म की संभावनाएं और ज्यादा बेहतर होंगी। हॉस्पिटल और हॉस्पिटैलिटी एक दूसरे के साथ मिलकर चलेंगे।
भारत आज हेल्थ टूरिज्म के मानक में दुनिया के तीन बड़े देशों में शामिल है। हेल्थ-वेलनेस टूरिज्म का मूल सिद्धांत है-
बीमारी का इलाज और आगे की तंदुरुस्ती। इसका सबसे मजबूत स्तंभ आयुर्वेद व पारंपरिक चिकित्सा है। आयुर्वेद से जुड़े पूरे
इकोसिस्टम के विकास से देश में हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़े टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल रहा है। भारत की विविधता की कल्पना
ही, मसलन- केरल के हरे-भरे वातावरण में डिटॉक्स लेना, उत्तराखंड में पहाड़ पर हवाओं के झोंकों के बीच खूबसूरत नदी के
तट पर योग करना, पूर्वोत्तर के हरे-भरे जंगल के बीच भ्रमण, अलग ही अनुभूति का अहसास कराता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी हेल्थ-वेलनेस टूरिज्म के बारे में कहते हैं, “यदि आप अपने जीवन के तनाव से परेशान हैं तो समझ लीजिए कि आपको
भारत की कालातीत संस्कृति को अपनाने का समय आ गया है। जब कभी आप अपने शरीर का इलाज करना चाहते हैं अथवा
अपने मन का उपचार करना चाहते हैं तो भारत आएं।” इस क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत ने राष्ट्रीय आयुष
मिशन की स्थापना की है। आयुर्वेद एवं अन्य भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के बारे में भारत की नीति पहले से ही विश्व
स्वास्थ्य संगठन की पारंपरिक चिकित्सा रणनीति 2014-2023 के अनुरूप है। डब्ल्यूएचओ ने भी भारत में ग्लोबल सेंटर फॉर
ट्रेडिशनल मेडिसिन की स्थापना की भी घोषणा की है। आज आयुर्वेद एवं चिकित्सा पद्धति के बारे में अध्ययन करने के लिए
विभिन्न देशों के छात्र पहले से ही भारत आ रहे हैं।
हालांकि कोविड महामारी की वजह से पर्यटन क्षेत्र पर काफी असर पड़ा है। लेकिन वैक्सीनेशन की बढ़ती गति ने घरेलू और
विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। भारत ने अपने वैक्सीनेशन अभियान में टूरिज्म सेक्टर से जुड़े राज्यों
को बहुत प्राथमिकता दी है। भारत सरकार ने इस क्षेत्र के लिए प्राथमिकता के आधार पर वैक्सीनेशन की पहल की और
उसका परिणाम है कि पर्यटन क्षेत्र इस महामारी के बुरे दौर से बाहर निकलता दिख रहा है। कोविड से सुरक्षा के साथ-साथ
स्वच्छता और मूलभूत सुविधाओं का विकास पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण है।
स्वच्छता से पर्यटन को मिली नई राह
अगर आप याद करें तो, 2014 से पहले देश में शहरों की साफ-सफाई को लेकर अक्सर नकारात्मक चर्चाएं ही सुनने को
मिलती थी। गंदगी को शहरी जीवन का स्वभाव मान लिया गया था। साफ-सफाई के प्रति बेरुखी से शहरों की सुंदरता, शहरों
में आने वाले पर्यटकों पर तो असर पड़ता ही है, शहरों में रहने वालों के स्वास्थ्य पर भी ये बहुत बड़ा संकट है। इस स्थिति को
बदलने के लिए देश में स्वच्छ भारत मिशन और अमृत मिशन के तहत बहुत बड़ा अभियान चलाया गया। बीते वर्षों में शहरों
में 60 लाख से ज्यादा निजी टॉयलेट और 6 लाख से अधिक सामुदायिक शौचालय बने हैं। देश में 7 साल पहले तक जहां सिर्फ
18 प्रतिशत कचरे का ही निष्पादन हो पाता था, वो आज बढ़कर 70 प्रतिशत हो चुका है। अब स्वच्छ भारत अभियान 2.0 के
तहत शहरों में खड़े कूड़े के पहाड़ों को हटाने का भी अभियान शुरू कर दिया गया है। शहरों की भव्यता बढ़ाने में एलईडी
लाइट ने एक और अहम भूमिका निभाई है। सरकार ने अभियान चलाकर देश में 90 लाख से ज्यादा पुरानी स्ट्रीट लाइट को
एलईडी से बदला है।
आजादी के इस 75वें साल में देश ने ‘सबका साथ, सबका विकास, और सबका विश्वास’ के साथ ‘सबका प्रयास’ का आह्वान
भी किया है। सबका प्रयास की ये भावना, स्वच्छता के लिए भी उतनी ही जरूरी है। स्वच्छता से सुख और पर्यटन का गहरा
संबंध होता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में ही नरेंद्र मोदी ने प्रगति के लिए पर्यटन की संभावनाओं को निखारना शुरू
किया था तो सबसे बड़ा फोकस स्वच्छता पर दिया है। निर्मल गुजरात अभियान जन आंदोलन बना तो राज्य में पर्यटन को
भी बढ़ावा मिला।
धरोहरों को सहेज पहचान बन रहा भारत
परंपरा और पर्यटन, ये दो ऐसे विषय हैं जिनका भारतीय विरासतों, भावनाओं और पहचान से सीधा जुड़ाव है। केंद्र सरकार
का सदैव ये प्रयास रहा है कि भारत के सांस्कृतिक सामर्थ्य को दुनिया के सामने नए रंग-रूप में रखे, ताकि भारत दुनिया में
हैरिटेज टूरिज्म का बड़ा केंद्र बनकर उभरे। इसी भावना के साथ ऐतिहासिक इमारतों का पुनरुद्धार कर फिर से आकर्षक
बनाया जा रहा है। शुरुआत कोलकाता, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद और वाराणसी की धरोहरों से हुई है। इन इमारतों में नई
गैलरी, नई एक्जीबिशन, थियेटर, ड्रामा और म्यूजिक कॉन्सर्ट के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। केंद्र
सरकार ने ये भी तय किया है कि देश के 5 आदर्श संग्रहालयों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया जाएगा। इसकी
शुरुआत विश्व के सबसे पुराने म्यूजियम में से एक, कोलकाता के भारतीय संग्रहालय से की गई है। इसके अलावा दिल्ली,
चेन्नई, हैदराबाद, श्रीनगर में मौजूद संग्रहालय को भी अपग्रेड किया जा रहा है। बीते सात वर्षों में 10 नए स्थलों को विश्व
धरोहर का दर्जा मिलना यह बताता है कि पर्यटन स्थलों के विकास को लेकर भारत सरकार कितनी गंभीर है।
देश की इन धरोहरों को संजोने, संवारने और इनका सुंदरीकरण तो जरूरी है ही, इनकी देखरेख और मैनेजमेंट के लिए जरूरी
संसाधनों का भी निर्माण करना होगा। इसी को देखते हुए ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ हैरिटेज कंजरवेशन’ का निर्माण और
उसको डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देने पर विचार किया जा रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में धोलावीरा में विरासत
संरक्षण और जीर्णोद्धार से संबंधित पहलुओं पर काम हो या अब प्रधानमंत्री के रूप में भारत में स्थित विश्व धरोहरों की
संख्या में बढ़ोतरी के प्रयास, इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए समन्वित विकास हो रहे हैं।
सर्किट ट्रेनों के माध्यम से पर्यटन स्थल जुड़ रहे हैं तो अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जैसे समारोहों से विदेशों में भी भारतीय
संस्कृति गूंज रही है। देश से चोरी हुई सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के काम में भी अभूतपूर्व तेजी आई है। वर्ष 1976 से
2014 तक जहां केवल 13 चोरी की धरोहरें वापस लाई जा सकी थी, वहां 2014 से 2021 तक 41 नई धरहोरों को वापस
लाया गया है।
निश्चित तौर से कोविड के बाद भारत का पर्यटन क्षेत्र तेजी से अपने पुराने स्वरूप में वापस लौटने का सामर्थ्य रखता है। मार्च
2022 तक 5 लाख विदेशी पर्यटकों को मुफ्त वीजा की सुविधा, वैक्सीनेशन की गति, स्वास्थ्य सुविधाओं की सुलभता और
तकनीक के बेहतर प्रयोग से भारतीय पर्यटन दुनिया में अपनी विशेष पहचान बनाने को आतुर है। लेकिन भारत को दुनिया में
सर्वश्रेष्ठ पर्यटन स्थल के रूप में पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्धता के साथ जरूरत है सामूहिक प्रयास की, ताकि एक भारत-
श्रेष्ठ भारत की भावना विश्व भर में गूंजे
बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर कनेक्टिविटी का सबसे अधिक लाभ हमारे टूरिज्म सेक्टर को होता है। टूरिज्म एक ऐसा सेक्टर है,
जिसमें हर किसी के लिए कमाई के साधन हैं। इसी सोच के साथ, देश, लोकल टूरिज्म के लिए वोकल हो, इसके लिए अनेक
स्तरों पर काम चल रहा है।
-नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
वीजा सुविधा से बढ़ी सैलानियों की संख्या
n• विदेशी सैलानियों की भारत यात्रा को सुगम और सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार ने नवंबर 2014 में 44
देशों के नागरिकों के लिए ई-वीजा की शुरुआत की थी। 2018 में 44 से बढ़कार 165 देशों के नागरिकों तक इस सुविधा का
विस्तार किया गया है। देश के 25 एयरपोर्ट और 5 समुद्री पोर्ट पर ई-वीजा सुविधा की शुरुआत की जा चुकी है।
nएक साल के ई-टूरिस्ट वीजा के अलावा मल्टीपल एंट्री सुविधा के साथ 5 साल के ई-टूरिस्ट वीजा सुविधा की शुरुआत।
इसके अलावा दोहरी प्रवेश सुविधा के साथ 1 माह का ई-टूरिस्ट वीजा, सरकारी/पीएसयू कर्मचारियों के लिए ई-कॉन्फ्रेंस
वीजा सुविधा शुरू की गई है। इसके साथ ही वीजा शुल्क में भी छूट दी गई है।
विश्व रैंकिंग में बढ़ता भारत
पर्यटन के क्षेत्र में केंद्र सरकार के लगातार प्रयासों का नतीजा है कि विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की 140 देशों के रिपोर्ट में
भारत का स्थान 34वां है।
केवड़िया पर्यटन विकास
का अनूठा प्रयोग
गुजरात में केवड़िया कभी सुदूरवर्ती इलाके में केवल एक छोटा सा ब्लॉक था। लेकिन अब यह दुनिया के सबसे बड़े पर्यटन
स्थल के रूप में सामने आया है। केवड़िया की विकास यात्रा का प्रतीक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी, स्टैचू ऑफ लिबर्टी से भी अधिक
पर्यटकों को आकर्षित कर चुका है। राष्ट्र को समर्पित किए जाने के बाद 50 लाख से अधिक पर्यटक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को देख
चुके हैं। कोविड काल के दौरान बंद रहने के बाद अब यह लोकप्रिय हो रहा है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जैसे-जैसे
कनेक्टिविटी में सुधार होगा, केवड़िया में प्रति दिन लगभग एक लाख पर्यटकों के आने की उम्मीद है। पर्यावरण की रक्षा करते
हुए केवड़िया अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिकी के नियोजित विकास का एक अच्छा उदाहरण बन गया है।
nजब शुरू में, केवड़िया को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तावित किया गया था, यह पहुंच के बाहर दिखाई देता था। काम
करने के पुराने तरीके को देखते हुए, इसमें संदेह था क्योंकि उस समय न तो सड़कों की कनेक्टिविटी थी, न ही सड़क पर
लाइट, रेल, पर्यटक आवास थे।
n अब केवड़िया सभी सुविधाओं के साथ एक पूर्ण पारिवारिक पैकेज में बदल गया है। यहां के आकर्षण में शामिल हैं, स्टैच्यू
ऑफ यूनिटी, सरदार सरोवर, विशाल सरदार पटेल प्राणी उद्यान, आरोग्य वन और जंगल सफारी और पोषण पार्क। इसमें
ग्लो गार्डन, एकता क्रूज और पानी के खेल भी हैं।
nबढ़ते पर्यटन के कारण आदिवासी युवाओं को रोजगार मिल रहा है और स्थानीय लोगों को आधुनिक सुविधाएं मिल रही हैं।
एकता मॉल में स्थानीय हस्तशिल्प वस्तुओं के लिए नए अवसर हैं। आदिवासी गांवों में होम स्टे के लिए लगभग 200 कमरे
विकसित किए जा रहे हैं।
nकेवड़िया रेलवे स्टेशन को इस तरह बनाया गया है कि इसमें बने ट्राइबल आर्ट गैलरी और व्यूइंग गैलरी से स्टैच्यू ऑफ
यूनिटी की झलक देखी जा सकती है।
nइसी तरह गुजरात का कच्छ जो कभी वीरान रहता था, वही कच्छ देश और दुनिया के पर्यटकों का प्रमुख केंद्र बन रहा है।
कच्छ का रणोत्सव पूरी दुनिया को आकर्षित करता है। औसतन 4 से 5 लाख टूरिस्ट रण-उत्सव के दौरान यहां आते हैं, सफेद
रेगिस्तान और नीले आसमान का आनंद उठाते हैं।





