नीलम ज्योति
(संचालिका : ज्योति अकादमी)
(1). बेड-टी हैबिट :
बेड टी की आदत से शरीर में एसीडिटी और गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए बेड टी की जगह कुनकुने पानी में शहद या नीबू का रस(आपकी प्रकृति अनुसार), या दालचीनी उबालकर पिएं।
इससे पाचन क्रिया सही रहेगी, रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि होगी और ब्लड सर्क्यूलेशन भी संतुलित रहेगा। इसके एक घंटे बाद चाय का सेवन करें।
इस आदत को छोड़ने के बाद जब तक आप श्योर न हो जाएं तब तक दूसरी आदत को बदलने का न सोचें।
(2). जंक फूड लव :
शाम के समय नमकीन, पिज्जा, बर्गर व पेटीस खाना भी एक बुरी आदत है। इनके सेवन से शरीर को किसी प्रकार का न्यूट्रीशन प्राप्त नहीं होता है केवल पेट भरता है।
यह मोटापा बढ़ने व भोजन में रूचि कम होने की समस्या भी पैदा करते हैं।
शाम को यदि भूख महसूस हो तो फास्ट फूड या जंक फूड क जगह फलों का सेवन करें जो शरीर के लिए लाभदायक होते हैं।
(3). जलपान में कंजूसी :
कम पानी पीने से कॉन्स्टिपेशन, बदहजमी, पेट की समस्या, जलन, थकान जैसी बीमारियां उत्पन्न होती हैं।
दिन भर में कम से कम तीन से चार लीटर पानी पीना चाहिए।
(4). फाइबर से परहेज :
आटा बारीक़ लेना, उसकी ज़रामरा सी बची भूशी भी छान देना और फिर अलग से इसबगोल खरीदकर पेट में ठूसना : ये समझदारी तो नहीं है.
भोजन में रेशेदार पदार्थों का सेवन न करना भी आहार की दृष्टि से बुरी आदतों में शुमार होता है। आलू वेगैरह छिलकायुक्त खाएं. ब्रेड, बिस्किट आदि की जगह-रोटी व दलिया, सब्जियों के सूप की जगह-कच्ची सलाद व फलों के रस की जगह-पूरे फल का सेवन करें।
(5). मॉर्निग वॉक में आलस :
सुबह की हवा नेचुरल दवा. रातभर में धूल-मिट्टी-प्रदूषण से मुक्त हो चुकी होती है हवा. सुबह ऑक्सीजन शुद्ध रुप में सुलभ होती है. तेज चलने पर स्वास-गति तीब्र होती है. ऑक्सीजन सीधे फेफड़ों तक रन करती है.
इस नेचुरल ऑक्सीजन से बचना और हॉस्पिटल में भरती होकर सिलेंडर वाली ऑक्सीजन लेने की दशा में आना ख़ुद को सृष्टि के सर्वोत्तम प्राणी में शुमार करने वाले मनुष्य के लिए शोभनीय नहीं है.
[लेखिका निजी साधनों से अनाथ बच्चों को बचपन-शिक्षार्जन का अनुभव देने में संलग्न हैं.)





