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Exit poll हिंदी पोलम पोल?

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शशिकांत गुप्ते

Exit का हिंदी अनुवाद होता है बाहर जाएं। राजनीति में इसे समझा जाता है, “बहार” आना। बाहर और बहार में फर्क है।
बाहर शब्द में ब व्यंजन के साथ आ स्वर लगता है। बहार शब्द में ह व्यंजन पर आ स्वर लगता है। यदि बहार से ब अक्षर को हटा दे तो सिर्फ हार बचता है। यहाँ हार मतलब फूलमाला नहीं पराजय समझना चाहिए।
गीतकर आंनद बक्शी रचित गीत की पंक्तिया याद आ गई।
जब जब बाहर आई और फूल मुस्कुराए,
मुझे तुम याद आए

गीत की पंक्ति में प्रेमिका को याद किया गया है।
सियासत में कुर्सी याद आती है।
प्रायः Exit poll के अनुमान गलत होने पर सियासत में फूल और चेहरा दोनों ही मुस्कुरातें नहीं है,मुरझा जातें हैं।
कईं बार सियासत में Exit Poll हिंदी का पोल ही साबित होता है। हिंदी में पोल का मतलब खोखलापन।
इस खोखलेपन को समझने के लिए गीतकार शकील बदायुनी लिखित गीत की यह पंक्तियां प्रासंगिक है।
ये दुनिया गोल है, ऊपर से खोल है
अंदर जो देखो प्यारे बिलकुल पोलम-पोल है
कितने ही दुनिया वाले, रहते हैं घेरा डाले
कोई मुराद माँगे, कोई औलाद माँगे
कोई मुहब्बत चाहे, कोई हुक़ूमत चाहे
सबके गले में भैय्या अरमानों का ढोल है

ऊपर से खोल है। खोल का मतलब आवरण होता है।
सरलता से जानने के लिए इस उक्ति को समझना चाहिए। गीदड़ पहने शेर की खाल
गीत के पंक्ति में लिखा है,
कोई हुकूमत चाहे, यदि व्यक्ति के चाहने से सब मिल जाता तो आदमी भगवान को भी नहीं मानता?
भगवान से याद आया वर्तमान सियादत के दौर में बहुत से सियासतदान स्वयं भगवान राम को ला रहें हैं। युग के आने के कर्मानुसार त्रेतायुग के बाद द्वापरयुग,द्वापरयुग के बाद कलयुग और कलयुग के बाद सतयुग आता है। ये सियासतदान इतने सक्षम है कि, कलयुग के बाद सतयुग को सुपरसीट कर सीधे त्रेतायुग ला सकतें हैं?
एक व्यंग्य का स्मरण होता है। साठ और सत्तर के दशक में एक स्लोगन से देशभर की सार्वजनिक दीवारों पर लिखा हुआ पढ़ने में आता था।
कलयुग जाएगा सतयुग आएगा जय गुरुदेव। इस स्लोगन पर एक व्यंग्यकार ने व्यंग्य किया था। कलयुग की
सतयुग से बात हुई। कलयुग ने सतयुग से पूछा? सुना है, तुम आ रहे हो? सतयुग ने कहा आने की तो हम सोच रहें हैं,यदि अभी जाएँगे तो सारा श्रेय जय गुरुदेव को मिलेगा।
बहरहाल चर्चा का मुद्दा है Exit Poll. Exit poll के अनुमान थोड़े समय के लिए Excitement मतलब उत्साह दे सकतें हैं। लेकिन जब Exact माने एकदम सही परिणाम प्रकट होतें हैं,तब यही कहना पड़ता है।
न पूछो सियासत की
हमने जो हकीकत देखी
वफ़ा के नाम पे
बिकते हुई उल्फ़त देखी
किसी ने लूट लिया और
हमें खबर न हुई
खुली जो आँख तो हमने हक़ीक़त देखी
सब कुछ लुटा के होंश में आए तो क्या किया

एक कहावत है “झूठ के पाँव नहीं होतें हैं” झूठ बोलने वालों की जुबान लड़खड़ाती है। झूठ बोलने वालों को अपना वक्तव्य बार बार बदलना पड़ता है।
ऐसे लोगों को Exit सही मतलब समझ में आता है। Exit मतलब बाहर जाना।
बाहर जाने का मतलब समझ जाना चाहिए।
समझने वाले समझ गए हैं
जो ना समझें वो अनाड़ी हैं

शशिकांत गुप्ते इंदौर

Ramswaroop Mantri

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