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ध्यान-तंत्र आधारित मैथुन से मंज़िल

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 नयना जोशी (पुणे)
         _पंचम मकार मैथुन यानी मेडिटेटिव सेक्स/ध्यान आधारित सम्भोग। अन्नमय कोश और प्राणमय कोश के सम्मिलित मंथन से यह महत्वपूर्ण क्रिया होती है। इसमें अगणित गुप्त अन्तरंग शक्तियों के अनुलोमविलोम क्रम से आकर्षण, विकर्षण, घूर्णन, चूर्णन, आकुंचन, विकुंचन, प्रत्यारोहण, अभिवर्द्धन, ऋणीकरण, अत्यावर्तन आदि सूक्ष्म मंथन होते हैं।_   परिणाम स्वरूप जोड़े में/स्त्री पुरुष के शरीरों में इंटर्नल और महत्वपूर्ण आदान प्रदान होता है।

       _रति क्रिया एक अत्यन्त साधारण शारीरिक क्रिया ही दिखाई देती है, पर उसका सूक्ष्म महत्व अत्यधिक है क्योंकि वह बहुत लम्बी चलती है. इतनी लम्बी की मादा बेसुध होकर आनंद के अनंत लोक मे खो जाती है।_ 

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  _स्त्री की यौनऊर्जा के समग्र विस्फोट और उसकी तृप्ति के महत्व को नहीं समझते हुए ही हमारे समाज में सर्वसाधारण की कथित सुरक्षा का, उनके हितों का ध्यान रखते हुए इस सम्बन्ध में अनेक मर्यादाएं/ज़ज़ीरें बांधी गई हैं। दमन सिखाया गया है, ख़ासकर स्त्री क़ो._
         मस्तिष्क, हृदय और जननेन्द्रिय शरीर में यह तीन शक्ति पुंज हैं। इन्हीं स्थानों में ब्रह्मग्रन्थि, विष्णुग्रन्थि, रुद्रग्रन्थि हैं। प्रयोगकर्ता इंसान रुद्रग्रन्थि से जब शक्ति संचय करने के लिए कूर्मप्राण को आधार बनाता है तो वह मैथुन द्वारा सामर्थ्य का भण्डार जमा करता है। 

    जननेन्द्रिय {योनिलिंग) के सूक्ष्म प्रभाव क्षेत्र में मूलाधार चक्र, स्वाधिष्ठान चक्र, वज्र पेरु, तड़ित कच्छप, कुण्डल सर्पिणी, रुद्र ग्रन्थि, समान, कृकल, अपान, अलम्बुषा, सुषुम्ना आदि के अवस्थान हैं। 

    _इनका आकुंचन, प्रकुंचन जब ध्यान-तंत्र के आधार पर होता है तो यह शक्ति उत्पन्न होती है और वह शक्ति दोनों ही दिशा में उलटी-सीधी चल सकती है । इस विद्या के ज्ञाता जननेन्द्रिय को उचित रीति से प्रयोग करके आशातीत लाभ उठाते हैं।_    जो लोग इस विषय में अनभिज्ञ हैं यानी आम लोग स्वास्थ्य और जीवनी शक्ति को खो बैठते हैं।
साधारणतः रति क्रिया में क्षय ही अधिक होता है। अधिकांश पुरुष प्रकृति उसमें अपने बल को खोते ही हैं. ध्यान-तंत्र के विधान द्वारा अन्नमय और प्राणमय कोशों की सुप्त शक्तियां जगाई जाती हैं।      मैडिटेशन में मैथुन यानी सम्भोग क़ो महज इन्द्रियभोग की क्षुद्र सरसता के रूप में नहीं लिया जाता।   

         _शक्तिकेन्द्रों के जागरण एवं मंथन द्वारा अभीष्ट सिद्धि के लिए उसका उपयोग होता है। सुप्तप्राणों का जागरण कर एक की सामर्थ्य का दूसरे शरीर में प्रवर्तन, हस्तान्तरण करने के लिए, इस मिक्सप का रतिसाधना के रूप में प्रयोग होता है।_   (लेखिका चेतना विकास मिशन की संयोजिका हैं.)

Ramswaroop Mantri

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