दिवंगत समाजवादी साथी सुनील द्वारा अपनी बेटी शिउली वनजा को लिखा गया यह पत्र पढिए l शिउली की प्रारंभिक पढ़ाई आदिवासी ग्राम केसला के सरकारी स्कूल और नवोदय विद्यालय पँवारखेड़ा में हुई l BHU से स्नातक व JNU से स्नातकोत्तर किया l अमेरिका से पी एच डी करने के बाद वर्तमान में Shiuli Vanaja Shiuli Vanaja अज़ीम जी प्रेम जी यूनिवर्सिटी बैंगलोर में अर्थशास्त्र विषय की प्राध्यापक हैं l अपने बाबा (पिता ) की तरह शिउली का विषय भी अर्थशास्त्र था l प्रस्तुति -गोपाल राठी पीपरिया इटारसी 27-10-05
प्रिय शिउली,
कैसी हो? नवोदय विद्यालय,पवारखेड़ा में 6 नवंबर को एक सम्मान समारोह रखा है,उसका पत्र आया है।उसकी एक फोटोकापी तुम्हें भेज रहा हूँ। मैं आज रात को रामपुरा के लिए निकल रहा हूँ। माँ वहाँ पहुँच गई है।हम लोग कोटा होते हुए 5 नवम्बर को केसला वापस लौटेंगे।
इस बीच मैं 23 अक्तूबर को कुक्षी (जिला धार) गया था।वहाँ पर किसानों की जनसुनवाई थी।उनहोंने विदेशी कंपनियों का बीटी-कपास का बीज बोया था,जो जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा तैयार किया जाता है।इसमें कपास में एक बैक्टीरिया (Bt) का जीन डाला जाता है,जो विषैला प्रोटीन तैयार करता है,जिससे कपास में लगने वाली एक इल्ली खत्म हो जाती है। किंतु इस बार बीटी कपास की फसल काफी ज्यादा सूख गई और किसानों को काफी नुकसान हुआ। कंपनी इसकी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। नई तकनालॉजी के बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा अपने मुनाफे की इस्तेमाल की छूट देने से यही होगा।कल और आज मैं बैठकर इसी जनसुनवाई की रपट तैयार कर रहा था।इसलिए रामपुरा जाने में एक दिन की देरी भी हो गयी।
बनारस में तुम गयी,उसके अगले ही दिन दै. हिन्दुस्तान में स्कूलों में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के बारे में एक छोटा लेख पढ़ने को मिला।दिलचस्प है।तुम्हें भेज रहा हूँ,शायद तुम्हे भी दिलचस्प लगे। भारतीय अर्थव्यवस्था वाला विषय तुम्हे बोरिंग लग रहा है, यह मुझे याद आ गया।यह सही है की जिस ढंग से अभी स्कूल कॉलेजों में पढ़ाया जाता है,उससे सिर्फ सूचनाओं व आंकड़ों का ढेर होता है, कोई विश्लेषण नहीं होता है। न ही सिद्धांतों (थ्योरी) से उसका कोई तालमेल होता है।इस में कुछ गलती अर्थशास्त्र के सिद्धांतों की भी है,जो हमारे चारों और के वास्तविक जीवन से कटे हुए होते हैं।लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की पढ़ाई इसलिए महत्वपूर्ण है की हम अपने देश की आर्थिक तस्वीर को तो जानें-समझें,नहीं तो अर्थशास्त्र के सिद्धांत तो यूरोप-अमरीका की दुनिया पर ज्यादा आधारित हैं।
माइक्रो के साथ मेक्रो अर्थशास्त्र की पढ़ाई का महत्त्व इसलिए है, क्योंकि बड़े व समग्र स्तर पर जो शक्तियां काम करती हैं,वे भी व्यक्ति या फर्म के व्यवहार को प्रभावित और तय करती हैं।
तुम्हारा स्वास्थ्य,पेट कैसा है? शाम को कुछ खेलकूद,साइकिलिंग या ऐसा कुछ शुरू करो।पढ़ाई कैसी चल रही है।जो हंट और शेरमेन की अर्थशास्त्र की किताब तुम लाईं वह कैसी है?
– सुनील





