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किस तरह यूरोप स्वयं को दफन कर रहा है*

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स्कॉट रिटर

अभी अमेरिका के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके पास रूसी मामलों के विशेषज्ञ नहीं हैं। उनके पास केवल बेवकूफ हैं, जो सिर्फ बकवास कर सकते हैं कि पूतिन कितने बुरे हैं।
उन लोगों ने जरा भी नहीं सोचा कि रूसियों ने पश्चिमी मुल्कों के बैंकों में अपने धन का बड़ा हिस्सा क्यों जमा करके रखा था। किसी ने नहीं सोचा था कि यह चूहेदानी में फँसाया गया पनीर का एक बड़ा टुकड़ा है। और इस पैसे की चोरी करके हमने खुद को जोखिम में डाल लिया है, और रूस को मौका दिया कि वह भी हमारे साथ जो चाहे सो करे। क्रेमलिन ने हमारे जाल को अब अपने जाल में बदल लिया है, यह घोषणा करके कि यूरोपीय संघ को अब रूबल में गैस खरीदनी होगी।
हाल ही में, बाइडेन ने यूरोपीय नेताओं से कहा था: “चिंता नहीं करो दोस्तों, हम आपको उतनी गैस और तेल देंगे जितनी आपको जरूरत होगी।” लेकिन जब समय आया तो वाशिंगटन ने घोषणा की: “क्षमा करें, गैस नहीं है, तेल नहीं है।” और इसके कारण पूरे यूरोप की अर्थव्यवस्था अब चौपट हो रही है। अब हमारे लिए कच्चे मालों की इस बढ़ी हुई कीमतों पर काम करना लाभहीन है। संपूर्ण पश्चिमी जीवन शैली,  हमारी सभी महान उपलब्धियां इन कच्चे मालों की कम कीमतों पर टिकी हुई हैं। शीत युद्ध के दौरान भी, सोवियत संघ के साथ हमारा एक अनकहा समझौता था कि वह हमें बिना किसी परेशानी के कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति करता रहेगा। लेकिन अब यह रुक गया है।
अमेरिका अब दुनिया भर में ‘ताम्र पात्र’ लेकर भिक्षा मांगने के लिए निकल पड़ा है। और यूरोपीय उस निकोलस मादुरो (वेनेजुएला के राष्ट्रपति) के सामने घुटनों के बल बैठ कर तेल के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं, जिसकी सरकार को हमने कई बार उखाड़ फेंकने की कोशिश की थी, और उसकी अर्थव्यवस्था पर प्रतिबंध लगाकर बर्बाद कर दिया था। आज ईरान, जिसे हम “दुनिया का सबसे खराब देश” कहते हैं, के साथ परमाणु समझौता करना चाहते हैं, क्योंकि हमें उनसे तेल चाहिए।
यूरोपीय देश अब दो आग के बीच फंस गए हैं। या तो हम प्रतिबंधों का समर्थन करना जारी रखेंगे – और रूस कहेगा: “आप दिवालिया हैं।” या उन्हें गैस का भुगतान करने के लिए हमें रूबल खरीदना होगा, और इस तरह हम रूसी अर्थव्यवस्था को मजबूती देंगे। और यूरोप तो वैसे भी हार जाएगा। यूरोपीय लोकतंत्र इतना संरचित है कि यदि मतदाताओं के हितों का तिरस्कार किया जाता है, तो कई यूरोपीय देशों की सरकारें लंबे समय तक सत्ता में नहीं बनी रहेंगी। इस गर्मी में कई यूरोपीय देशों की सरकारों को अविश्वास मतों का सामना करना पड़ेगा। उन्हें ऐसे विकल्प चुनने को मजबूर किया जाएगा जो रूस विरोधी प्रतिबंधों को बेकार कर देगा, क्योंकि कोई भी राजनेता अपनी “राजनीतिक बलि” चढ़ाने को तैयार नहीं होगा।
*लेखक – स्कॉट रिटर, अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक एवं संयुक्त राष्ट्र मामलों के पूर्व विशेषज्ञ / थोड़े बदलाव के साथ गौतम कश्यप द्वारा रूसी से अनूदित/ साप्ताहिक रूसी अखबार “तर्क और तथ्य” संख्या 14 में प्रकाशित / तिथि 06/04/2022 *

Ramswaroop Mantri

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