चन्दशेखर शर्मा (चंद काका)
क्या आपने कभी यह जानने की कोशिश की कि आपका युवा बेटा कहीं धूम्रपान या घूंट लगाना (शराब पीना) तो शुरू नहीं कर चुका ? जी हां, यह सवाल आपको नाराज या परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि ख़बरदार करने के लिए ज्यादा है। एक रपट के अनुसार अभी हर पांच में से एक युवा धूम्रपान का शौक फरमा रहा है ! फिर बात सिर्फ धुआं उड़ाने तक सीमित नहीं है।
अपने इंदौर की ही कुछ दिन पहले की बात है। मेरे एक मित्र को पुलिस थाने से फोन आया। उन्हें कहा गया कि आप थाने आ जाइए, आपके बेटे को लेकर बात करना है। मित्र छोटे-मोटे कारोबारी हैं और उनका बेटा महज बीस वर्ष का है। पुलिस का फोन आने के बाद जाहिर है वो मित्र तनाव में आ गए कि उनका जीवन में पुलिस से कभी कोई वास्ता न पड़ा था। उन्होंने मदद के लिए मुझे फोन लगाया और फिर हम दोनों थाने पहुंचे। वहां यह जानकर हम हक्का-बक्का रह गए कि पुलिस ने उनके बेटे को गांजे से भरी सिगरेटों के साथ पकड़ा था ! गांजा तो दूर, मित्र को यह तक पता न था कि उनका बेटा सिगरेट पीना शुरू कर चुका है। इसके उलट हकीकत सामने थी कि वो गांजा पीने लगा था ! यही कारण है कि लेख की शुरुआत में वो सवाल पूछना जरूरी लगा।
असल में बात इसी नशे, उसके कारोबार और नशाखोरी की है। आप चाहे माने या न माने, लेकिन हमारे युवा इसका तेजी से शिकार हो रहे हैं, जो कि बहुत अधिक चिंताजनक बात है। इंदौर-भोपाल आदि जगह श्रीशुध्दि नशा मुक्ति केंद्र चलाने वाले राजेन्द्र तिवारी बताते हैं कि उनके केंद्र में दर्जनों नशेड़ी उपचाररत हैं। खास बात यह कि इनमें से ज्यादातर की उम्र 22 से 45 बरस के बीच है। फिर इनमें सबसे ज्यादा संख्या शराब, गांजा और ब्राउन शुगर का नशा करने वालों की है। इंदौर की बात करें तो बेहद डरावनी हकीकत यह है कि पिछले कुछ महीनों में यहां नशीले पदार्थों की बहुत बड़ी-बड़ी खेप पकड़ी गई हैं। उसमें क्विंटलों से गांजा और ड्रग्स शामिल है। इसने पुलिस और प्रशासन ही नहीं, बल्कि सरकार की आंखें खोलकर रख दी हैं। यही कारण है कि कुछ माह पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को कहना पड़ा कि प्रदेश में नशे के कारोबार को हर हाल में नेस्तनाबूद किया जाएगा। इसके लिए उन्होंने प्रदेश के पुलिस और प्रशासन को हरसंभव कदम उठाने और कोई कोताही नहीं बरतने के निर्देश जारी किए हैं। इसी के बाद इंदौर कलेक्टर मनीष सिंह और पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने कमर कसी है। नतीजतन शहर में देर रात चलने वाले पबों पर सख्त कार्रवाई के साथ नशे के सौदागरों पर भी खासी कार्रवाई की गई है। नशे के कई बड़े सौदागरों का पर्दाफाश कर उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है। हैरत यह कि इंदौर में पबों से लेकर जिम में आने वाले युवाओं को बड़ी चालाकी से नशे की लत लगाकर उनको शिकार बनाये जाने के मामले सामने आए हैं !
यहां बताना लाजिमी है कि अकेले भारत में अवैध नशीले पदार्थों का कारोबार प्रति वर्ष दस लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा का है। फिर सिर्फ युवा ही नहीं, बल्कि बच्चे और महिलाएं भी बड़ी तादाद में नशाखोरी में शामिल हैं। नशे के कारोबार में पहले नम्बर पर अफीम है और दूसरे नम्बर पर गांजा। एक रपट के अनुसार देश में पिछले कुछ वर्षों में अफीम का उपयोग पांच गुना से अधिक बढ़ गया है। अफीम का सबसे ज्यादा उत्पादन अफगानिस्तान में होता है और बताते हैं कि भारत के रास्ते यह दुनिया के कई मुल्कों तक पहुंचती है। गांजे की जहां तक बात है तो देश में हर साल सैकड़ों टन गांजा जप्त होता है। जो हो।
इंदौर की बात करें तो पिछले कुछ समय में यहां से जिस तादाद में नशीले पदार्थ पकड़े गए हैं वो बहुत कुछ कहने वाला है और चिंतित करने वाला भी। जाहिर है इंदौर नशीले पदार्थों की खपत और कारोबार का नया केंद्र बनकर उभरा है। इसे देखते हुए इंदौर को उड़ता इंदौर कहना भी नावाजिब नहीं। हालांकि कलेक्टर मनीष सिंह और पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र बहुत जुनूनी, दबंग और सख्त अधिकारी माने जाते हैं और कई उपलब्धियां इनके नाम हैं। फिर भी देखने लायक बात यही होगी कि नशे के इस खतरे से वो इंदौर को कैसे महफूज रखेंगे। अलबत्ता सिर्फ पुलिस, प्रशासन या सरकार के कुछ करने से बात नहीं बनेगी, बल्कि समाज यानी हमें भी सतर्क होना होगा। खासकर अपने नौनिहालों और युवाओं को लेकर !
उड़ता इंदौर ! बात नशे, उसके कारोबार और नशाखोरी की






