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आठ घण्टे काम ,आठ घण्टे आराम ,और आठ घण्टे मनोरंजन बनाम नौकरी करनी है तो  12 घण्टे काम करो

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उदय नारायण

जेम्स वाट ने भाप के इंजन बनाकर पूंजीवादी व्यवस्था की नींव रख दी ।प्राकृतिक संसाधनों पर जहाँ राजा महाराजा सामन्तो क् कब्जा था वह कब्जा पूंजीपतियों का हो गया ।पूंजीपति की सारी नैतिकता पूजी की सुरक्षा के इर्दगिर्द रहती है मानवता उनके लिए पागलपन है ।इसीलिए जब मार्क्स ने आठ घण्टे काम ,8 घण्टे आराम और 8 घण्टे मनोरंजन का नारा दिया और मज़दूरों ने जब मांग की तो उनको गोलियों से छलनी कर दिया गया ।पर आखिर पूंजीवाद झुका और हफ्ते में 48 घण्टे काम को विश्व स्तर पर मान्यता मिली ।

ताजुब है यह नियम गांव के मजदूर पर तो कायम है पर जागरूक शहरी मजदूर अब बारह घण्टे काम को मजबूर है ।आराम और मनोरंजन तो गया तेल लेने । एक पूंजीपति ने तो एलान किया है कि अगर नौकरी करनी है तो 699 फार्मूला पर काम करना होगा मतलब हफ्ते में 6 दिन सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक ।आगे चलकर यह एकदम 133 साल पहले जैसा भी हो सकता है सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक और हफ्ता 7 दिन का भी हो सकता है ।महीने में एक दिन की छुट्टी तो काफी होगी आराम के लिए।
अगर समाजवाद नहीँ आएगा तो इंसान मर नहीँ जाएगा बल्कि जिंदा रहेगा पूजी और पूंजीपतियों के इच्छाओ का गुलाम बनकर उसे खाना कपड़ा रात में 200 ग्राम शराब भी मिलेगा पर मेमना बनकर रहना पड़ेगा जिसके सामने एक भेड़िया हमेशा गुर्राता रहेगा ।
क्या 12 घण्टे या 8 घण्टे से अधिक काम अवैज्ञानिक या अमानवीय है ???
जी हा बिलकुल है जीव विज्ञान ने सिद्ध किया है कि 8 घण्टे से अधिक काम करने पर एंडोक्राइन ग्लैंड का secrection बढ़ने लगता है और मेटाबोलिक बीमारियां होने लगती है ।और भी शारीरिक क्षति होती है । मतलब कार्ल मार्क्स सही थे
8 घण्टे आराम पर तो कोई मतभेद नही और ये सबको समझ आ भी गया है
8 घण्टे मनोरंजन पर आए ।कार्ल मार्क्स कहते है हर व्यक्ति के अंदर कुछ न कुछ कलात्मकता होती है उस कलात्मकता से आदमी को स्वस्थ मनोरंजन अति आवश्यक है मतलब हर आदमी कुछ गा सकता है नाच सकता है चित्र बना सकता है मतलब अपने मनोरंजन के लिए रुचिपूर्वक कार्य चयन कर सकता है उसे समय देना चाहिए ।लेकिन 12 घण्टे काम मे उसे समय कब मिलेगा ।9 बजे काम के लिए 6 बजे उठना होगा ।नहाने खाने में 8 बज जाएगा 1 घण्टे रास्ते मे ।रातके 9 बजे छुट्टी 10 बजेघर 11 बजे खाना फिर घर्र घर्र ।
याद रखे पूंजीपतियों ने राजतंत्र से भयानक युद्ध और रक्तपात कर के राजतंत्र को हराया है ।अब पूंजीवाद को हराने के लिए विश्व स्तर परमोर्चाबंदी कर के कार्ल मार्क्स को प्रेरणा स्रोत मानकर पूंजीवाद को परास्त किया जा सकता है ।कोई जरूरी नही की वो मोर्चा सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टियां ही बनाये ।जन संगठन के माध्यम से प्राकृतिक संसाधनों पर आम जन क् कब्जा और उसका वैज्ञानिक और तार्किक उपयोग ही मार्क्सवाद है या समाजवाद है ।
समाजवाद के लिए लड़ते रहे सोचते रहे एक दिन सपना पूरा हो सकता है
1 मई के दिन शहीद हुए मज़दूरों को लाल सलाम जिनके वजह से दुनिया बहुत कुछ बदल गयी

उदय नारायण

Ramswaroop Mantri

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