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बलात्कारी बोले ‘हमें न्याय पाने हेतु मनपसंद वकील करने का संवैधानिक अधिकार है !

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निर्मल कुमार शर्मा

इस देश में वर्तमान समय में बलात्कारियों, हत्यारों,माफियाओं,गुंडों और अपराधियों का मनोबल आजकल बहुत ही बढ़ा हुआ है ! उदाहरणार्थ अभी पिछले दिनों कथित योगी मुख्यमंत्री के कथित रामराजवाले प्रदेश उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में तीन दरिंदों,शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों जिनका नाम क्रमशः विपिन तिवारी,रोहित और शैलेंद्र नाथ पाठक है,ने एक अबला,मजबूर और असहाय लड़की से रूपये छीने,उससे सामूहिक बलात्कार किए,बलात्कार करते समय का विडियो बनाए !
मामला पुलिस तक पहुंचा, पुलिस ने उन तीनों को धर दबोचा,इस खौफनाक घटना का स्थानीय झांसी जिले के कोर्ट में मुकदमा दर्ज हुआ, संयोग से झांसी जिले के उसी कोर्ट में बलित्कृता लड़की के पिता वकील हैं,उनके प्रभाव से झांसी कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे अन्य हजारों वकीलों में से कोई एक भी वकील इन दरिंदों, शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों जिनका नाम क्रमशः विपिन तिवारी,रोहित और शैलेंद्र नाथ पाठक है, की तरफ से झांसी कोर्ट में केस लड़ने को तैयार नहीं है !
अब इस केस में इन दरिंदों, शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों जिनका नाम क्रमशः विपिन तिवारी,रोहित और शैलेंद्र नाथ पाठक है,की तरफ से इलाहाबाद कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई है कि ‘चूंकि बलात्कार पीड़िता लड़की के पिता झांसी जिला कोर्ट में वकील हैं, इसलिए झांसी कोर्ट का कोई भी वकील उनकी तरफ से कोर्ट में पेश होने के लिए तैयार नहीं है ! उन्हें अपना मुकदमा लड़ने के लिए अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन बलित्कृता लड़की के वकील पिता के प्रभाव के कारण उन्हें मतलब इन दरिंदों, शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों को न्याय मिलने से वंचित किया जा रहा है ! ‘
हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन तीनों दरिंदों,नरपिशाचों तथा बलात्कारियों द्वारा स्थानांतरण याचिका को यह कहते हुए कि ‘यदि किसी मामले को स्थानांतरित किया जाता है तो यह सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता का घोर अपमान होगा,यदि यह मामला जिला झांसी से किसी अन्य जिले में स्थानांतरित किया जाता है तो सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को दूसरे जिलों की यात्रा करनी पड़ेगी,जिसके चलते अंततः पीड़िता को कठिनाई और मानसिक पीड़ा हो सकती है,इतना ही नहीं औपचारिक गवाहों को छोड़कर अन्य सभी गवाह जो झांसी के हैं, उन्हें भी दूसरे जिलों की यात्रा करनी पड़ेगी, जहां मामले को स्थानांतरित किया जाएगा,यह पीड़िता,गवाहों, अभियोजन पक्ष और पूरे समाज के लिए असुविधाजनक होगा, क्योंकि यह मामला सामूहिक दुष्कर्म से संबंधित है ‘ रद्द कर दिया !
इस दुष्कर्म मामले के दुष्कर्मियों ने तीन याचिकाएं दायर की गईं थीं,दो दरिंदों क्रमशः विपिन तिवारी और रोहित पर आरोप है कि वे पीड़िता के साथ दुष्कर्म के दौरान अपनी मोबाइल पर उसकी विडियो बनाए थे ! जबकि तीसरे बलात्कारी शैलेंद्र नाथ पाठक पर आरोप है कि उसने पीड़िता,असहाय लड़की से 2000 रूपये जबरन छीन लिया !
इस अकथनीय दरिंदगीभरे, नरपैशाचिक,दुष्कर्म और बलात्कार केस में पीड़ित लड़की के शरीर से ही ब्लात्कार नहीं हुआ है, अपितु उसकी आत्मा,उसकी रूह,उसकी सामाजिक मानमर्यादा,उसकी मानसिक शांति आदि सबकुछ तहस-नहस व धूलधूसरित होकर रह जाता है,बलात्कार के बाद भुक्तभोगी लड़कियों या औरतों का सबकुछ ही पूरी तरह बर्बाद होकर रह जाता है,जिसकी आजीवन भरपाई हो ही नहीं सकती ! वे आजीवन एक चलती-फिरती लाश बनकर रह जातीं हैं ! इस केस के दरिंदों,शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों का यह अतिअसंवेदनशील और बेहूदा तर्क कि ‘चूंकि बलात्कार पीड़िता लड़की के पिता झांसी जिला कोर्ट में वकील हैं,इसलिए झांसी कोर्ट का कोई भी वकील उनकी तरफ से कोर्ट में पेश होने के लिए तैयार नहीं है ! उन्हें अपना मुकदमा लड़ने के लिए अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार है,लेकिन बलित्कृता लड़की के वकील पिता के प्रभाव के कारण उन्हें मतलब इन दरिंदों, शैतानों और नरपिशाचों तथा बलात्कारियों को न्याय मिलने से वंचित किया जा रहा है ! ‘ की जितनी भी भर्त्सना और निंदा की जाय,कम है !
इलाहाबाद हाईकोर्ट को इन दरिंदों शैतानों और नरपिशाचों से पूछना चाहिए था कि ‘क्या इन शैतानों और नरपिशाचों को एक अबला और कमजोर लड़की से सामूहिक बलात्कार करने का भी संवैधानिक अधिकार था ! उससे बलात्कार और दरिंदगी करते समय विडियो बनाने का भी संवैधानिक अधिकार था ! जाहिर है कतई नहीं था ! तो उस दारूण और हतप्रभ कर देनेवाली दु:स्थिति के जिम्मेदार इन वहशी व नरपिशाचों के बचाव के लिए उन्हें अपना मुकदमा लड़ने के लिए अपनी पसंद के वकील को नियुक्त करने का संवैधानिक अधिकार कहां से मिल जाता है ?
आजकल भारतीय समाज में ‘ताक़त प्रदर्शित करने और धमकाने के लिए बलात्कार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का चलन बढ़ा है और इसके ज़रिए समाज के दबे कुचले और सामाजिक तथा आर्थिक तौर पर कमजोर समाज की लड़कियों, महिलाओं को भयभीत करने के लिए भी बलात्कार किया जाता है ‘भारत में बलात्कार के मामलों को दर्ज करने के लिहाज़ से स्थिति बेहतर हुई है,लेकिन भारत में अभी भी न्यायिक व्यवस्था काफ़ी हद तक राजनीतिक और सामाजिक दबाव में काम करती है इसमें कई बार राजनैतिक तौर पर दबंग और रसूखदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले बलात्कारियों और अभियुक्तों को सज़ा ही नहीं मिलती है,वे अपने राजनैतिक व सामाजिक रसूख के बल पर न्यायालयों से बेदाग बरी होकर शान से बाहर आ जाते हैं ! यही वजह है कि बलात्कार के बहुत ही कम मामलों में ही सज़ा हो पाती है । ‘
इसलिए इस विरल से विरलतम् नरपैशाचिक कुकृत्य को अंजाम देने वाले इन तीनों शैतानों, नरपिशाचों और बलात्कारियों को कठोरतम् सजा देने के लिए झांसी के कोर्ट के विद्वान जज को बगैर किसी राजनीतिक या सामाजिक दबाव के निष्पक्ष न्यायोचित कार्यवाही करनी ही चाहिए,यही न्याय का तकाजा भी है।

     -निर्मल कुमार शर्मा 'गौरैया एवम् पर्यावरण संरक्षण तथा देश-विदेश के सुप्रतिष्ठित समाचार पत्र-पत्रिकाओं में वैज्ञानिक,सामाजिक, राजनैतिक,पर्यावरण आदि विषयों पर स्वतंत्र, निष्पक्ष,बेखौफ,आमजनहितैषी,न्यायोचित व समसामयिक लेखन,संपर्क-9910629632, ईमेल

Ramswaroop Mantri

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