पुष्पा गुप्ता
1- शासन करना राजा का आनुवंशिक अधिकार है। 2- वह केवल ईश्वर (पुरोहित) के ही प्रति उत्तरदायी है। 3- राजा का विरोध नहीं करना चाहिए। 4- राजतन्त्र ही शासन का उचित रूप है।
यह राजा के दैवी अधिकार का सिद्धांत है। यही दक्षिणपन्थ है।
जो अपने राजा, उस राजा के राज्य, उस राजा की भाषा, उस राजा के धर्म को ही सर्वश्रेष्ठ मानता है। उसे फॉलो करने को कहता है। न करो, तो बुलडोजर के दम पर करवाता है।
राजा को हटाकर, अगर जनता खुद राज्य चलाने लगे तो?
जनता खुद की पुलिस बनाए, सेना बनाये, अपने न्यायालय चलाएं। अपने सुख सुकून के लिए सड़के, स्कूल हस्पताल बनाये। इन छोटी संस्थाओं को एक बड़ी संस्था आदेश दे, याने संसद आपस मे विचार विमर्श करके। यही वामपन्थ है। लेकिन यही लोकतंत्र है। तो लोकतंत्र, वामपन्थ है।
भारत मे एक विदेशी कॉन्सेप्ट है। आप वज्जि और लिच्छवी गणतंत्र के अपवाद छोड़ दीजिए। (वह भी ओलिगोर्की थी, लोकतंत्र नही) तो हिंदुस्तान की धरती पर लोकतंत्र पहली बार 1947 में आया है।
हम, हमारी पीढ़ी, 3000 साल में लोकतंत्र की खुली हवा में जीने वाले पहले बाशिंदे हैं।
क्या ही विडम्बना है, कि लोकतंत्र के रास्ते चुने हुए आदमी को, राजा की तरह निरंकुश अधिकार दिलाने के तमाम जतन हो रहे हैं।
इसमे ईश्वर का नाम शामिल है, बाबा-पुरोहित-पंडे शामिल हैं। राजा के अफसर, उसके खजाने से खरीदे गए प्रोपगंडा फैलाने वाले शामिल हैं। गुस्सा, नफरत, रेसिज्म शामिल है।
इस प्रोपगेंडे से ब्रेनवॉश होकर आप भी शामिल हैं। आपको बताया गया कि वामपन्थ का मतलब नक्सलिज्म है, माओइज्म है।असल वह वामपन्थ का उतना ही विकृत स्वरूप हैं, जैसे दक्षिणपन्थ में फासिज्म है, नाजिज्म है।
ये विकृति जानलेवा है। सत्ता के लिए अति का परिणाम है। वामपन्थ का शुद्ध स्वरूप, एकता, समानता और आजादी देने वाला लोकतंत्र है।
मेरी-आपकी रुचि वामपन्थ में नही, लोकतंत्र में होनी चाहिए। जो हमारे देश मे विदेशी कॉन्सेप्ट है।
लेकिन सौभाग्य हमारे यहां मौजूद है। अभी जिंदा है।लेकिन धराशायी है,अंतिम सांसे ले रहा है।
किसी राम का इंतजार न कीजिए। किसी गांधी का इंतजार मत कीजिए। कांग्रेस, राहुल, सपा, केजरीवाल प्रशांत किशोर का इंतजार न कीजिए। किसी व्यक्ति का इंतजार न कीजिए। सलीब पर लटकने वाले, या सफेद घोड़े पर सवार, किसी मसीहा का इंतज़ार न किजीए।
जैसे भी हो,जहां भी हो,शासन करने के खुद के अधिकार की रक्षा कीजिए। इसे किसी नाचीज के दैवत्व के प्रोपगेंडे में आकर कतई खोइए मत।
इसलिए कि एक बार खोकर आप उसे पाने के लिए दोबारा लड़ पाएंगे। ऐसा माद्दा आपमे नही। इस कौम में नही। यहां कभी क्रांतियां नही होती। कोशिश हो, तो सफल नही होती। भारत का इतिहास यही कहता है।
[चेतना विकास मिशन]





