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परमाणु हथियारों की फिर से गलाकाट प्रतियोगिता और संयुक्त राष्ट्र संघ की नपुंसकता !

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निर्मल कुमार शर्मा,

आज से ठीक 72वर्षों पूर्व जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर क्रूर,वीभत्स,अमानवीय और नरपिशाच अमेरिकी साम्राज्यवादियों ने क्रमशः 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को प्रातः काल में ही अपने दो अत्यंत संहारक लिटिलबाय और फैटमैन नामक परमाणु बमों को गिराकर मिनटों में 333000 बच्चों,औरतों,वृद्धों और आमजन को राख में मिलाकर इस कथित सभ्य दुनिया को परमाणु बमों से दिलदहला देनेवाली एक परिघटना को अंजाम देने के बाद दुनिया भर में मानवीय और इंसानियत तथा करूणा से भरे संवेदनशील लोगों ने इस अति दु:खद घटना की पुनरावृत्ति न होने देने के लिए 50देशों की सदस्यता वाली टीम ने 24अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना की !

             लेकिन विद्रूपता की हद देखिए कि इस संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना उसी हत्यारे देश अमेरिका के जमीन और एक शहर सैनफ्रांसिस्को में हुई जिसके कर्णधार राष्ट्रपति नरपिशाच हैरी एस ट्रूमैन के आदेश पर क्रमशः दो परमाणु बमों लिटिल ब्वाय और फैटमैन को जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर गिराकर पलक झपकते ही 333000 निरपराध लोगों को मौत के घाट उतारने का निराधम काम किया था ! दूसरे शब्दों में “भेड़ों के रेवड़ की रखवाली का काम फिर से भेड़ियों को दे दिया गया ! ”  

 अमेरिकी राष्ट्रपति हेरी एस ट्रूमैन बनाम एडोल्फ हिटलर !

            वैसे निष्पक्ष और तटस्थ तथा न्यायोचित्त ढंग से सोचा जाय तो हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाण्विक हमला करके मिनटों में 3,33,000 निरपराध लोगों को मौत के घाट उतार देने वाले कथित लोकतंत्रिक ढंग से चुनकर आए और राष्ट्रपति बनने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन और उसके अमेरिकी सलाहकारों तथा दुनिया के इतिहास में सबसे कुख्यात और बदनाम तानाशाह और करोड़ों निरपराध लोगों के हत्यारे के रूप दर्ज विख्यात जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर में कोई ज्यादे फर्क नहीं है ! जहां जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर कई सालों में 6000000 लाख यहूदियों को,जिनमें 1500000 छोटे बच्चे थे अपने गैस चैंबर में घोंट-घोंटकर मारा,लेकिन कथित लोकतांत्रिक व्यवस्था से चुनकर आया अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ने हिरोशिमा और नागासाकी पर ऐटम बम गिराकर यह घिनौना काम कुछ सेकेण्ड्स में ही कर दिया था !

 सबसे बड़े नरपैशाचिक देश में संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना !

विडम्बना देखिए कि इस दुनिया को प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्धों जैसी विभीषिकाओं से बचाने के लिए जिस संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना 24अक्टूबर 1945 को अमेरिका जैसे देश में हुई,वही अमेरिका संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना के उद्देश्यों की धज्जियां उड़ाते हुए ठीक 5 वर्ष बाद ही वर्ष 1950में कोरिया युद्ध छेड़ दिया,जिसमें 400000लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, ज्ञातव्य है कोरिया युद्ध वर्ष 1950से वर्ष 1953 तक तीन वर्ष तक चला,इसके मात्र 3वर्ष बाद वर्ष ही यह देश वर्ष 1955 में पूर्वी एशिया के एक अत्यंत छोटे से देश वियतनाम पर युद्ध थोप दिया, जिसमें 3000000 वियतनामी लोगों को जबरन निर्ममता पूर्वक मौत की नींद सुला दिया गया ! यह युद्ध वर्ष 1955 से वर्ष 1975 तक पूरे 21साल जारी रहा ! इसके बाद चिली,बोलिविया,क्यूबा आदि दर्जनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों की हत्या और उन देशों में तख्तापलट का कुकृत्य करता रहा ! यही अमेरिका वर्ष 2001में एक निहायत गरीब देश    अफगानिस्तान पर युद्ध थोप दिया,जिसमें 240000 लोग मारे गए ! यह युद्ध भी वर्ष 2001से वर्ष 2021तक,मतलब पूरे 21वर्ष तक चला ! अफगानिस्तान में चल रहे युद्ध के बीच ही इसी अमेरिका ने वर्ष 2003 में इराक पर युद्ध थोप दिया,जिसमें 1000000निरपराध लोगों का निर्ममता पूर्वक कत्ल कर दिया गया,यह युद्ध    वर्ष 2003से वर्ष 2011तक,मतलब पूरे 9साल चला,अंततः इस युद्ध की परिणति इराकी राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को यही अमेरिका फांसी पर लटका दिया ! 

              उक्त हृदय विधायक घटनाओं का संक्षिप्त में बताने का उद्देश्य यह है कि उक्त युद्धों में पिछले वर्ष 1950 से वर्ष 2021तक मतलब पूरे 72 वर्षों तक इन्हीं अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा लगभग दुनिया के हर हिस्से में मानव रक्त की होली खेली जाती रही,लेकिन कथित शांति स्थापित करने के लिए बनी अंतर्राष्ट्रीय सुप्रतिष्ठित संस्था संयुक्त राष्ट्र संघ की उक्त वर्णित युद्धों को रूकवाने में कोई भूमिका ही नहीं रही,ये संस्था दुनिया भर में करोड़ों लोग बेमौत मरते रहे और इस कथित वैश्विक शांति स्थापना के उद्देश्य से बनी संस्था कुंभकर्णी नींद सोता रहा ! इसके अतिरिक्त क्या वैश्विक स्तर पर लब्धप्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का यह परम् कर्तव्य नहीं बनता था कि हिरोशिमा और नागासाकी में मिनटों में 3300000 निरपराध लोगों का सरेआम कत्ल करनेवाले नरपिशाच अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन पर मुकदमा चलाकर उसे सरेआम फांसी पर लटका कर मौत की सजा दिलवाता !

           कल्पना करिए द्वितीय विश्वयुद्ध में अगर जर्मनी,जापान और इटली विजयी होते तो एडोल्फ हिटलर की जगह सबसे बड़ा नरपिशाच और वहशी अमेरिकी राष्ट्रपति हैरी एस ट्रूमैन ही घोषित होता ! और निश्चित रूप से हैरी एस ट्रूमैन या तो अपने सिर में हिटलर की तरह गोली मारकर आत्महत्या करने को बाध्य होता या उसे अंतर्राष्ट्रीय अदालत में मुकदमा चलाकर उसे कठोरतम् से कठोरतम् सजा देकर उसे फांसी पर लटका कर या गोली मारकर मौत की सजा दी जाती !

 फिर से परमाण्विक हथियारों की होड़ शुरू कराने का असली खलनायक अमेरिका है !   

आज सोवियत संघ के जमाने के मुकाबले लगभग निस्तेज हो चुके रूस को उसकी घेरेबंदी करके इस दुनिया के सभी देशों को परमाणु, हाइड्रोजन,नाइट्रोजन और जैविक बम बनाने की गलाकाट प्रतियोगिता में झोंकने का काम इसी अमेरिका के नरपिशाच कर्णधार कर रहे हैं ! युद्ध विशेषज्ञों के अनुसार वर्तमान समय में भी अभी तक सांसों की स्पंदन से युक्त ज्ञात इस इकलौती धरती को एकबार नहीं अपितु कई बार अपने परमाणु,हाइड्रोजन,नाइट्रोजन और जैविक बमों से नष्ट करने की क्षमता रखनेवाले ये हिंसक देश अगले दशक में और अधिक परमाणु,हाइड्रोजन, नाइट्रोजन और जैविक बमों के निर्माण करने जा रहे हैं,यह कुकृत्य इस धरती और इस पर मानव प्रजाति सहित इसके समस्त जैवमण्डल के लिए बहुत ही अशुभ और अमंगलकारी है ! इसे हर हाल में रोका जाना चाहिए ।

 वर्तमान नाकारा हो चुके संयुक्त राष्ट्र संघ का पुनर्गठन हो   

          इस दुनिया में अमन-चैन और शांति स्थापना के उद्देश्य से बने संयुक्त राष्ट्र संघ     अपनी स्थापना के समय से ही लगभग नपुंसक और नाकारा बन चुका है ; अब इसकी जगह किसी और सशक्त अंतर्राष्ट्रीय संस्था का पुनर्गठन किया जाय जो अमेरिका जैसे निरंकुश,लोभी और दंभी देश की युद्ध जीजीविषा और वैश्विक अशांति फैलाने की मंशा की नकेल कसकर उसे अपने नियंत्रण में रखकर इस धरती पर मनुष्य प्रजाति सहित समस्त जैवमण्डल को युद्ध की विभीषिका से बचा सके

  -निर्मल कुमार शर्मा, जी-181-ए,एचआईजी फ्लैट्स,डबल स्टोरी, ( शहीद भगतसिंह लेन ) आलोकी अस्पताल के पास, सेक्टर-11, प्रताप विहार गाजियाबाद, उप्र,

Ramswaroop Mantri

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