अग्नि आलोक
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ढहता भारतीय लोकतंत्र ! 

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-निर्मल कुमार शर्मा,

 पिछले वर्ष 5 जुलाई 2021को लगभग हर भारतीय समाचार पत्रों में एक बहुत ही कारूणिक तस्वीर प्रकाशित हुई,जिसमें एक बहुत ही अशक्त, वृद्ध और लाचार व्यक्ति अपनी चारपाई से जंजीरों से जकड़ा हुआ था,वे अशक्त, वृद्ध और लाचार व्यक्ति कोई और नहीं,अपितु भारत के आदिवासियों,गरीबों,वंचितों,दलितों के मसीहा फादर स्टेन स्वामी की तस्वीर थी,जिन्हें फर्जी आरोप लगाकर रांची से जबरन मुंबई ले जाकर,जेल में डालकर उक्त वर्णित अवस्था में रखकर तड़पा-तड़पाकर मौत के घाट उतार दिया गया..!

              इसके अतिरिक्त अमेरिका के सुप्रसिद्ध समाचार पत्र वाशिंगटन पोस्ट में 10फरवरी 2021 को प्रकाशित खबर के अनुसार जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के भूतपूर्व रिसर्च स्कॉलर और कमेटी फॉर रिलीफ ऑफ पोलिटिकल प्रिजनर्स के मिडिया सेक्रेटरी रोना विल्सन के कम्प्यूटर को किसी गुमनाम हैकर ने पहले हैक करके उसमें मैलवेयर साफ्टवेयर यानि चोर साफ्टवेयर के जरिए उनके कम्प्यूटर में फर्जी तरीके से 10 दस्तावेज बनाए,जिसमें रोना विल्सन की तरफ से किसी माओवादी संगठन से मोदी की कथित हत्या के लिए बंदूकें और हथियार माँगना दिखाया गया था और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे आरोप लगाए गये थे ! इसी प्रायोजित साक्ष्य के आधार पर रोना विल्सन की तुरंत गिरफ्तारी कर ली गई ! उसके बाद इस देश के अलग-अलग जगहों से 15 अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं, डॉक्टरों,वकीलों आदि की गिरफ्तारियां भी की गई ,इन सभी पर आरोप है कि इन सभी लोगों का सम्बंध उक्त श्री रोना विल्सन से है,इन गिरफ्तार लोगों में इंसानियत पर कविता लिखनेवाले 82 वर्षीय कवि श्री वरवरा राव,आईआईएम अहमदाबाद के 71वर्षीय प्रोफेसर आनन्द तेलतुंबड़े,प्रोफेसर श्रीमती शोमा सेन,आजीवन आदिवासियों और बेसहारा लोगों के अधिकारों के लिए संघर्ष करनेवाले 84 वर्षीय स्टैन स्वामी,विकलांगों की मदद करनेवाले वर्नन गोंजाल्विस और गरीबों के केस लड़नेवाले दयालु वकील अरूण फरेरा,सामाजिक कार्यकर्ता श्रीमती सुधा भारद्वाज,गौतम नवलखा,महेश राउत, नताशा नरवाल,हैनी बाबू,सुधीर ढावले,गौतम गिलानी,देवांगना कालिता,सुरेंद्र गाडगिल आदि जैसे परोपकारी व नेकदिल लोगों को गिरफ्तार करके पिछले दो सालों से उन्हें जेलों में गैरकानून रूप से सड़ाया जा रहा है। अफसोस,हतप्रभ और विस्मित करनेवाली बात यह भी है कि उक्त लोगों में कुछ ऐसे लोग भी हैं,जो शारीरिक और मानसिक रूप से इतने अशक्त,कमजोर,निर्बल, बेबस और लाचार हैं कि वे अपने हाथों से ठीक से पानी तक नहीं पी सकते,न खाना खा सकते हैं यथा जनकवि वरवरा राव,प्रोफेसर आनन्द तेलतुंबड़े और आदिवासियों के लिए अपना समस्त जीवन तक समर्पित कर देने वाले स्टैन स्वामी जैसे लोग ! 

 मोदीजी की हत्यारोपित लोग अपने हाथ से पानी तक नहीं पी सकते ! 

              कितने आश्चर्य और क्षुब्ध कर देनेवाली बात है कि ऐसे वृद्ध,बीमार,लाचार,अशक्त और बेबस लोगों पर मोदी ऐंड कंपनी सरकार के कर्णधारों ने श्री मोदीजी की हत्या की कथित साजिश रचने के आरोप लगाकर पिछले दो सालों से भारत के विभिन्न जेलों में ठूँस रखा है ! ये सभी लोग अपनी शारीरिक व मानसिक अस्वस्थता की वजह से गुहार लगाकर अपनी रिहाई और वृद्धावस्था में अपने परिवार और परिजनों के साथ रहने की अंतिम इच्छा और लालसा हेतु भारत के विभिन्न हाईकोर्ट्स और सुप्रीमकोर्ट तक में बार-बार अपनी जमानत याचिका दाखिल कर रहे हैं,लेकिन भारतीय न्यायपालिका में ऐसे कथित न्यायमूर्ति बैठे हैं,जो सत्ता के कर्णधारों के गुप्त इशारों के दबाव के चलते और उनके डर से इतने बेशर्म और अमानवीय हो गए हैं कि उक्तवर्णित अशक्त बुजुर्गों की जमानत याचिकाओं को बार-बार खारिज किये जा रहे हैं ! वाशिंगटन पोस्ट की यह खबर पिछले दिनों द ट्रिब्यून,इंडिया टुडे,लाईव मिन्ट,एनडीटीवी,वाशिंगटन पोस्ट स्क्रोल और हिन्दुस्तान टाइम्स जैसे लब्धप्रतिष्ठित और सम्मानित भारतीय समाचार पत्रों के साथ दुनिया भर के तमाम विदेशी मिडिया के समाचार पत्रों में भी प्रकाशित हुआ है।

 क्या अब गरीबों,निर्बलों के हित में लड़ना अपराध हो गया है ? 

          अभी कुछ दिनों पूर्व श्रीमान नरेंद्र दास दामोदरदास मोदी जी के मुख्यमंत्रीत्वकाल यानी वर्ष 2002 में हुए भीषण दंगे में बीजेपी और बजरंगदल के गुंडों और अतिवादियों ने भूतपूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी जिनके गले में टायर डालकर उसमें आग लगाकर उन्हें जिन्दा जलाकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया था, इसके अतिरिक्त इस अत्यंत दु:खद घटना में अन्य 68लोगों को भी नृशंसता पूर्वक मौत के मुंह में धकेल दिया गया था। 

            बीजेपी और बजरंगदल के गुंडों और अतिवादियों द्वारा मारे गए भूतपूर्व कांग्रेसी सांसद एहसान जाफरी की विधवा श्रीमती जकिया जाफरी द्वारा भारत के कथित सबसे बड़े न्याय के मंदिर सुप्रीमकोर्ट में अपने प्रति हुए अन्याय के खिलाफ न्याय की आशा में गुहार लगाई थीं, इस केस की वकील प्रख्यात समाजसेवी परिवार की सदस्या श्रीमती तीस्ता सीतलवाड़ पैरवी कर रहीं थीं,अभी पिछले दिनों उनपर भी छद्म आरोप लगाकर श्रीमती तीस्ता सीतलवाड़ को भी जेल भेज दिया गया है !

 गरीब लोगों को बेदखल करके सरकारें खुद उन्हें नक्सली बनातीं हैं !

         इसी प्रकार एक तीसरी घटना में सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और बीसियों साल से दांतेवाड़ा में पूंजीपतियों के लिए उनके रहवासी इलाकों पर प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा जमाने के लिए सत्ता के वर्तमान कर्णधार आदिवासियों के अकथनीय शोषण,उनकी औरतों बच्चियों से बलात्कार और उनकी सामूहिक हत्या तक कर रहे हैं,उनके गांव के गांव जलाए जा रहे हैं,उन्हीं आदिवासियों और जंगलपुत्रों के हक के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले हिमांशु कुमार जी और अन्य की एक याचिका जिसमें उन्होंने 2009 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में हुए एक नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षाबलों द्वारा क़रीब 17 ग्रामीणों के मारे जाने का दावा करते हुए भारतीय सुप्रीमकोर्ट से उस घटना की अपनी निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी,लेकिन अत्यंत दु:खदरूप से सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की बगैर न्यायोचित जांच कराए ही उनकी याचिका को ही ख़ारिज करते हुए श्री हिमांशु कुमार जी पर ही उलटा 5 लाख का जुर्माना लगा दिया है और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार से उन पर कार्रवाई करने को भी कहा है !

           अब भारत में स्थित यह हो गई है कि मोदीजी के फासिस्ट विचारधारा के खिलाफ बोलने और लिखने वाले सैंकड़ों लेखकों,कवियों, पत्रकारों,वकीलों,मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पत्रकारों आदि को मोदीजी के इशारे पर तमाम फर्जीवाड़े आरोप लगाकर उन्हें बदनाम करके उन्हें जेलों में ठूंसा जा रहा है या मारा-पीटा जा रहा है या नृशंसता पूर्वक हत्या तक की जा रही है !

 भारत की सभी स्वायत्त संस्थाएं सत्ता की चाटुकार !

             वास्तविकता यह है कि मोदीजी की सरकार और इसकी पितृ संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लोकतांत्रिक व्यवस्था से विचलित होती सरकारों के नियंत्रण के लिए बनाई गई स्वायत्त संस्थाओं मसलन प्रवर्तन निदेशालय,चुनाव आयोग,राष्ट्रीय सांख्यिकी विभाग,केन्द्रीय जांच ब्यूरो,सुप्रीमकोर्ट यहां तक कि जिलों के कलेक्टर, पुलिस उपायुक्त,अधीक्षक और थानों तक में अपनी विचारधारा के लोगों की बेशर्मी से नियुक्तियां कर रहे हैं ! आजकल इसीलिए उक्त वर्णित सभी संस्थाओं में होनेवाले कार्य और नीतियां आम जनता,किसानों,मजदूरों, कर्मचारियों और दलितों,आदिवासियों, अल्पसंख्यकों व वंचितों के हित में काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं के हित के विरूद्ध धड़ाधड़ निर्णय हो रहे हैं !

यक्षप्रश्न है कि क्या अब निर्बलों,दलितों, अल्पसंख्यकों,पिछड़ों,औरतों की गुंडों, माफियाओं तथा सुरक्षाबलों द्वारा की गई ज्यादतियों के खिलाफ न्यायालय जाना अक्षम्य गुनाह हो गया है ?आखिर गुजरात दंगों में जिस समय उस राज्य के मुखिया श्री नरेन्द्र दास दामोदरदास मोदी जी थे,वहां हुए भीषण दंगे में एहसान जाफरी सहित हजारों बेगुनाह बच्चियों, स्त्रियों, युवकों, वृद्धों की हत्या कोई अंतरिक्ष से आकर एलियन कर गए ? दंगाई तो गुजरात के बजरंग दल जैसे आतंकवादी गुट के गुंडे ही थे,जो ये वीभत्स कार्य किए ! इस बात के भी अकाट्य साक्ष्य अभी भी लिखित में मौजूद हैं कि इस दंगे में श्रीयुत् श्रीमान नरेंद्र दास दामोदरदास मोदी जी और उनके सिपहसालार श्री अमित शाह सीधे-सीधे संलिप्त थे ! 

 ईमानदार लोगों की जघन्यतम् हत्याएं ! 

           ये भी साक्ष्य है कि अमित शाह को क्लिन चिट देने के लिए ईमानदार,निष्पक्ष तथा कर्मठ सीबीआई जज श्री बृजमोहन लोया को अरबों रूपये की रिश्वत और दिल्ली में आलीशान बंगला देने की लालच दी गई, लेकिन जब वह ईमानदार जज इस पेशकश को विनम्रतापूर्वक ठुकरा दिया,तो उन्हें ही चुपचाप ठिकाने लगा दिया गया ! उनके मृत शरीर का कोई पोस्टमार्टम नहीं होने दिया गया,अभी तक कोई न्यायोचित जांच नहीं होने दिया गया ! मोदीजी के विरोध करने पर गुजरात के एक बीजेपी नेता हरेन पांड्या को शूटर तुलसी प्रजापति के द्वारा ठिकाने लगा दिया गया,उसके बाद साक्ष्य को मिटाने के लिए तुलसी प्रजापति और सोहराबुद्दीन दोनों शूटरों की भी प्रायोजित मुठभेड़ कराकर हत्या करा दी गई ! 

 इमर्जेंसी बनाम वर्तमान समय की हकीकत 

आश्चर्य और क्षोभ होता है कि मोदीजी ऐंड कंपनी सरकार,बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा इंदिरा गांधी द्वारा 25जून 1975को लगाई गई इमर्जेंसी को प्रतिवर्ष काला दिवस के रूप में मनाया जाता है लेकिन सच्चाई यह है कि श्रीमान नरेंद्र दास दामोदरदास मोदी जी द्वारा प्रतिदिन किए गए शर्मनाक काम इमर्जेंसी को रोज शर्मिंदा करने का काम करते रहते हैं ! इसके अलावा उक्त वर्णित सारी बातें सारा भारत जानता है ! इतना सब कुछ होने के बावजूद कथित न्याय के सबसे बड़े मंदिर के जजों की विवेक,सत्ता की चाटुकारिता और पक्षपाती निर्णयों पर तरस खाने के सिवा कुछ नहीं कहा जा सकता ! लेकिन भारतीय सुप्रीमकोर्ट के उक्त अविवेकी निर्णयों से भारतीय लोकतंत्र के ताबूत में आखिरी कील ठोकने वाली बात तो हो ही रही है !

-निर्मल कुमार शर्मा, गाजियाबाद, उप्र  

Ramswaroop Mantri

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