शशिकांत गुप्ते
सीतारामजी को आज जंगम शब्द पर चर्चा करनी है।
मैने पूछा जंगम शब्द का अर्थ क्या होता है?
सीतारामजी ने कहा जंगम शब्द का अर्थ होता है Movable जो चल सकता हो। जिसे कहीं भी ले जाया जा सकता है।
मैने सीतारामजी से जिज्ञासावश प्रश्न पूछा आज इसी जंगम शब्द पर ही विचार क्यों कर रहें हैं?
सीतारामजी ने कहा यकायक मेरे ज़ेहन में एक प्रश्न उपस्थित हुआ है कि,काश यदि अचल कहलाने वाली सम्पत्ति भी जंगम मतलब movable होती तो विशालकाय इमारत भी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों जैसा ही सैर सपाटा कर सकती थी? जैसे इमारत को पता चलता कि, इमारत की निर्मिति निर्धारित नियमो को नजरअंदाज कर की गई है? पूर्ण इमारत निर्मित होने के बाद इमारत को ज्ञात होता कि, वह अवैध है? तो इमारत एक राज्य से दूसरे राज्य दूसरें राज्य से तीसरे राज्य की मेहमान नवाजी का लुफ्त उठाती और पाँच सितार होटल में नाचती गाती? इमारत का कुछ ही हिस्सा टूटता या किसी अर्ध निर्माणाधीन इमारत का हिस्सा इस इमारत के साथ जुड़ जाता,और इमारत ज्यों के त्यों खड़ी रहती?
बहुमंजिल इमारत का दुर्भाग्य कि, वह चलायमान नहीं है।
अंतः बहुमंजिला इमारत लगभग सिर्फ अठारह करोड़ खर्च कर गिराई गई।
एक करोड़ रुपयों को अंदर खाने आपसी लेनदेन के समय गोपनीय भाषा में खोका कहतें हैं। महाराष्ट्र की राजधानी मुम्बई में इनदिनों विपक्ष के द्वारा एक नारा बुलंद किया जा रहा है। पचास खोके ok. खग भाषा खग ही जाने।
बहरहाल मुद्दा है,जंगम शब्द पर विमर्श का। इमारत ढहाई गई मतलब गिराई गई या जमीदोंज की गई? यह एक बहुत ही आश्चर्य जनक किंतु सत्य घटना है। यह एक चमत्कार ही है।
इस घटना को चमत्कार इसलिए कहा जा सकता है कि इमारत निर्मित करने वाले व्यक्ति या संस्था ने ज़मीन का सौदा किया होगा। जमीन पर विशालकाय इमारत निर्मित करने के लिए नक्शा भी बनाया होगा। नक्शा मतलब पृथ्वी एवं उसके विशिष्ट अंश पर स्थित मुख्य-मुख्य वस्तु आदि का परिचायक चित्र या मानचित्र बनाना। यह कार्य Architect engineer मतलब वास्तुकार अभियंता का है। वास्तुकार अभियंता बनने के लिए बाकायदा विश्वविद्यालय में पढ़ाई करनी पड़ती है। भवन निर्माण का ठेका लेने के लिए भी लाइसेंस लेना जरूरी होता है।
नक्शा बनने के बाद उसे सम्बंधित विभाग से पास भी करवाना पड़ता है। यह प्रक्रिया पूर्ण करने पर इमारत का निर्माण हो सकता है। क्या इतनी सारी प्रक्रिया को अपनाने के बाद भी इमारत अवैध घोषित हुई होगी?
क्या मंजिल-दर-मंजिल निर्मित होने तक व्यवस्था को यह ध्यान में क्यों नहीं आया कि यह निर्माण अवैध हो रहा है? यह अहम प्रश्न उपस्थित होता है।
सी आई डी धारावाहिक में एसीपी का किरदार निभाने वाले का यह संवाद यहॉ सटीक होगा कुछ तो गड़बड़ है
सीतारामजी ने कहा, कोई कुछ भी कहे मै तो इसे चमत्कार ही कहूंगा। कहा जाता है चमत्कार को ही नमस्कार किया जाता है।
पिछले आठ वर्षों से लगातार चमत्कार को ही नमस्कार किया जा रहा है। जबकी समझदार लोग जानतें हैं कि, चमत्कार जादुई करिश्मा है जो क्षणिक आंनद देता है। इनदिनों जादुई करिश्मे को देखने वाले दर्शक जादूगर द्वारा दिखाए जा रहे चमत्कार का आनंद लेते हुए नाचतें गातें सेल्फी लेते है। तालिया बजाकर आनंद का इजहार करतें हैं।
वर्तमान में चमत्कार भी बहुत कीमती लगभग अठारह करोड़ का प्रस्तुत किया गया है?
पुनः एक व्यवहारिक प्रश्न ज़ेहन में उपस्थित होता है कि, काश इमारत जंगम होती।
शशिकांत गुप्ते इंदौर





