,मुनेश त्यागी
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं आचार्य चार्वाक के भौतिकवादी दर्शन और नास्तिकता में विश्वास करता हूं जब उन्होंने यहां आता कि यहां पर धरती के अलावा और कोई शौक नहीं है यहां पर स्वर्ग नरक का कोई प्रमाण नहीं है।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं महात्मा गौतम बुध की सम्यक दृष्टि और सम्यक वाणी में विश्वास करता हूं और यह मानता हूं कि वे एक महान त्यागी और तपस्वी थे और उन्होंने सबसे पहले भगवान की कल्पना का विरोध किया था।
मैं देशभक्त हूं क्योंकि मैं अकबर और महाराणा प्रताप सिंह को एक समान समझता हूं क्योंकि उन दोनों की सेनाओं में हिंदू और मुसलमान सेनापति, सिपेहसालार और सिपाही शामिल थे।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं संत रविदास के समता और समानता के विचारों में विश्वास करता हूं।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं कबीर की वाणी में विश्वास करता हूं क्योंकि वह हिंदू और मुसलमान दोनों अंधविश्वासियों और पाखंडियों को बराबर से लताडते हैं जब वह कहते हैं,,,,
कांकर पाथर जोड़ि के मस्जिद लई चुनाय
ता चढि मुल्ला बांग दे क्या बहरा हुआ खुदाय?
और
पाहन पूजे हरि मिले तो मैं पूंजू पहार
याते तो चाकी भली पीस खाए संसार
मैं तुलसीदास को एक महान कवि समझता हूं क्योंकि वह ब्राह्मणवाद और मनुवाद की पोल खोलते हैं जब वे कहते हैं कि,,,,
पूजिए ना शूद्र गुण ज्ञान प्रवीणा
पूजिए विप्र ज्ञान गुण हीना।
और
जासु राज प्रिय प्रजा दुखारी
सो नृप अवस नरक अधिकारी।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं टीपू सुल्तान को एक महान देशभक्त समझता हूं क्योंकि उन्होंने अपने राज्य में सबसे पहले “आजादी का पौधा” लगाया था और उन्हें उसके प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कृष्ण राव और पूनिया ने अंग्रेजों के साथ मिलकर धोखा दिया था। इस धोखे में आकर वे अंग्रेजों से जान की बाजी लगा कर लड़े और मैदाने जंग में लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 के महान स्वतंत्रता सेनानी बहादुर शाह जफर के देश प्रेम में विश्वास करता हूं क्योंकि उन्होंने अंग्रेजों से लड़ते हुए अपने दो पुत्रों और एक पौत्र की अपनी आंखों के सामने, अंग्रेजों द्वारा हत्या करते हुए देखा था।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैंने रानी झांसी महारानी लक्ष्मी बाई और बेगम हजरत महल को अट्ठारह सौ सत्तावन के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपना सब कुछ स्वाह करते हुए देखा है और क्योंकि उन दोनों की सेनाओं में हिंदू और मुसलमान सेनापति, सिपेहसालार और सिपाही शामिल थे जो भारत की आजादी के लिए अंग्रेजों से लड रहे थे और लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गए।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं नानासाहेब और अजीमुल्ला खान को महान स्वतंत्रता सेनानी समझता हूं क्योंकि यह दोनों अट्ठारह सौ सत्तावन की क्रांति के प्रणेता,नायक और नेता थे। इन दोनों ने भारत के आजादी के लिए लड़ते लड़ते अपना सब कुछ स्वाह कर दिया और वीरगति को प्राप्त हो गए।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं यह खुले आम कहता हूं कि अंग्रेजों ने भारत की जनता की एकता तोड़ने के लिए, और हमारे देश में सांप्रदायिकता की नफ़रत की नीतियों की शुरुआत की थी और भारत की जनता की एकता तोड़ने के लिए विभाजन के बीज बोए थे, जब उन्होंने 1996 मुस्लिम लीग और 1907 में हिंदू महासभा का निर्माण किया था और इन दोनों हिंदू और मुसलमान साम्प्रदायिक ताकतों का, भारत की आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं था और ये दोनों देश विरोधी ताकतें मिलकर अंग्रेजों का साथ दे रही थीं और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का विरोध कर रही थीं।
मैं असली देश देशभक्त हूं क्योंकि मैं काकोरी काण्ड के हीरो राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाकउल्ला खान, राजेंद्र नाथ लाहिडी और ठाकुर रोशन रोशन सिंह को असली क्रांतिकारी देशभक्त समझता हूं जिन्होंने फांसी के फंदे पर चढ़कर कहा था कि हमारी देशवासियों से अपील है कि वे जैसे भी हो, इस देश में हिंदू मुसलमान एकता कायम रखें, और देश की आजादी के लिए लड़े़, यही हमारे लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं यह मानता हूं कि भगत सिंह हमारे देश के सबसे बड़े क्रांतिकारी शहीद हैं जिनकी यह मान्यता थी कि देश के असली हीरो नायक किसान और मजदूर हैं, खेत और कारखाने में काम करने वाले मजदूर हैं और हमारी नौजवानों से यह अपील है कि वे देश के कारखानों में, गांवों में और झोंपड़ियों में जाएं और वहां देश की जनता को क्रांति के लिए जागृत करें, एकजुट करें।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं भगत सिंह को इस देश का सबसे बड़ा क्रांतिकारी समाजवादी समझता हूं, जिन्होंने अदालत के कटघरे में खड़ा होकर रहा था कि इस देश के समस्त किसानों, मजदूरों, नौजवानों और जनता की समस्याओं का समाधान मार्क्सवादी सिद्धांतो पर आधारित समाजवादी समाज व्यवस्था में हो सकता है और जिन्होंने सबसे पहले राजगुरु सुखदेव के साथ मिलकर “इंकलाब जिंदाबाद” के नारे को देश और दुनिया में बुलंद किया था।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं सुभाष चंद्र बोस की उस शपथ में विश्वास करता हूं जिसमें उन्होंने कहा था कि “मैं किसी भी दशा में, किसी भी प्रकार से, अपनी मातृभूमि, भारत देश को, अंग्रेजो की गुलामी से आजाद कराना चाहता हूं” और जिन्होंने अंग्रेजों से युद्ध करने के लिए आजाद हिंद फौज का गठन किया था और उन्होंने एक अंतरिम सरकार का गठन किया था जिसमें 4 हिंदू थे और 4 मुसलमान थे।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं महात्मा गांधी के उन विचारों में विश्वास करता हूं, जिन्होंने भारत की सोई हुई और डरी हुई जनता को जगाया, उसके दिलो-दिमाग से खौफ निकाला और अंग्रेजों से लड़ना सिखाया और अंग्रेजों को यहां से भगाने के लिए नॉन कॉर्पोरेशन और सिविल डिसओबिडिएंस आंदोलन शुरु किए और अंग्रेजों को भारत देश से भगाने के लिए “करो या मरो” और “अंग्रेजों भारत छोड़ो” का नारा दिया।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं धर्मनिरपेक्ष और महान देशभक्त और आजादी के दीवाने नेहरू के बलिदानों में विश्वास करता हूं जो-3200 से भी ज्यादा दिनों तक जेल में रहे और जो एक महान लेखक थे और जिन्होंने भारत के आधुनिक धर्मनिरपेक्ष राज्य की शुरुआत की और भारत को आधुनिक राष्ट्र बनाने में और आधुनिक उद्योग धंधे स्थापित करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं डॉक्टर बीआर अंबेडकर के विचारों और सिद्धांतों से सहमत हूं और मैं मानता हूं कि भारत के गरीबों, शोषितों, वंचितों और पीड़ितों को हजारों साल की गुलामी अन्याय शोषण जुल्मों और भेदभाव से निजात दिलाने के लिए अम्बेडकर ने भारत के संविधान का निर्माण किया, जिसमें समता समानता धर्मनिरपेक्षता जनवाद समाजवाद और आपसी भाईचारे की बात की और तमाम तरह की गुलामियों, शोषण, अन्याय, जुल्मो सितम, गैरबराबरी और तमाम तरह के भेदभावों को खत्म करने की वकालत की।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं भारत की जनता को हजारों साल से बौद्धिक रूप से गुलाम बनाते आ रहे अंधविश्वास, धर्मांधता, पाखंडों, अज्ञानता रूढ़िवादिता और तमाम तरह के पाखंडों के खिलाफ हूं। मैं मानता हूं इन बौद्धिक विकास विरोधी मान्यताओं और परम्पराओं व परिस्थितियों का विनाश सबसे पहले जरूरी है। केवल तभी जाकर भारत को एक बुद्धि संपन्न राष्ट्र बनाया जा सकता है और मैं बौद्धिक गुलामी के खिलाफ भारत में ज्ञान विज्ञान, अनुसंधान को बढ़ाने वाली नीतियों में और संविधान के मुताबिक भारत में ज्ञान विज्ञान और वैज्ञानिक संस्कृति का प्रचार प्रसार करके भारत की जनता को बौद्धिक रूप से आजाद करने और आत्मनिर्भर बनाने के अभियान में जुड़ा हुआ हूं और इस अभियान को जनोन्मुखी और ज्ञान विज्ञान और वैज्ञानिक संस्कृति से सराबोर करने में अपना पूरा वक्त और तन मन धन और बौद्धिक रूप से, लेखन और कविता के माध्यम से, अपना पूरा सहयोग दे रहा हूं।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं वामपंथी और समाजवादी विचारधारा में विश्वास करता हूं और मानता हूं कि जब तक यहां की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में आमूलचूल और क्रांतिकारी परिवर्तन करके, इस देश के एक अरब से ज्यादा गरीब किसानों मजदूरों नौजवानों विद्यार्थियों और महिलाओं को रोटी रोटी कपड़ा शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और सुरक्षा की गारंटी नहीं दी जाती और जब तक यहां किसानों और मजदूरों की सरकार कायम नहीं की जाती, तब तक हमारा भारत देश एक विकसित, आत्मनिर्भर, वैज्ञानिक और आधुनिक मुल्क नहीं बन सकता।
मैं असली देशभक्त हूं क्योंकि मैं अपने साथियों के साथ इस देश में हजारों साल पुराने शोषण जुल्म अन्याय भेदभाव अत्याचार गरीबी और गैरबराबरी को खत्म करके, इस देश में समता समानता न्याय भाईचारा और सामाजिक आर्थिक राजनीतिक आजादी का समाज कायम करना चाहते हैं जिसमें सबको मुफ्त शिक्षा मिलेगी, सबको मुफ्त इलाज मिलेगा, सबको रहने को घर मिलेगा, सबको उपयुक्त रोजगार मिलेगा और हम सब मिलकर असली भारतीयों की तरह से रहेंगे और तब हम सब मिलकर कहेंगे कि,,,
सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा
और
शहीदे आजम भगत सिंह का प्यारा नारा
इंकलाब जिंदाबाद।





