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मानवता पर हमला है नोबेल (अ)’शांति’ पुरस्कार

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 पुष्पा गुप्ता

      _2009 में बराक ओबामा को नोबेल का शांति पुरस्कार दिया गया. इस पुरस्कार से उत्साहित होकर 2016 में  ओबामा ने एक रिकार्ड ही बना डाला. इस साल अमेरिका ने विदेशी धरती पर कुल 26171 बम गिराए. यानी 72 बम प्रतिदिन. प्रत्येक घंटे 3 बम. जिस साल ओबामा को यह शांति पुरस्कार मिला उस साल भी ओबामा के नेतृत्व में विदेशी घरती पर कुल 6915 बम गिराए गए._

       मानवता को इससे कितना नुकसान हुआ, यह एक अलग भयावह और दुःखद महागाथा है.

      बहुत सी मानवाधिकार संस्थाओं ने इसे दर्ज किया है और अमेरिकी साम्राज्यवाद के क्रूर चेहरे को दुनिया के सामने लाया. लेकिन इस बार जिस मानवाधिकार संस्था [Memorial] को नोबेल शांति पुरस्कार मिला है, उसका काम आज से 70-75 साल पहले स्टालिन काल में हुए ‘अत्याचारों’ को दर्ज करना रहा है.

इस संस्था का जन्म गोर्वाचेव के पेरेसत्रोइका/ग्लासनोस्त [Perestroika/Glasnost] के दौरान 1989 में हुआ था.

     _यह ‘इतिहास के अंत’ और समाजवाद/स्टालिन पर भयानक हमले का समय था. ‘मेमोरियल’ को यह काम सौपा गया कि वह स्टालिन काल में हुए ‘अत्याचारों’ को दर्ज करे और समाजवाद-स्टालिन विरोधियों को वह ‘गोला बारूद’ मुहैया कराये ताकि वे जोर-शोर से समाजवाद/स्टालिन पर कुत्सा प्रचार और झूठ का हमला बोल सकें._

      बाद के दिनों में जब रूस मजबूत हो गया और अमेरिका/योरोप के साथ एक नये तरह का शीत युद्ध शुरू हो गया तो इस संस्था का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका ने रूस द्वारा किये जा रहे मानवाधिकार हनन के मामले को दुनिया के सामने लाकर उसे बदनाम करना शुरू कर दिया.

         यानी  यह ‘मेमोरियल’ संस्था अब रूस व रूस के सहयोगी देशों के खिलाफ अमेरिका प्रचार युद्ध का एक जरूरी हिस्सा हो गया. इसने कभी भी अमेरिका द्वारा पूरे विश्व में किये जा रहे मानवाधिकार हनन को मुद्दा नहीं बनाया. लिहाजा दिसम्बर 2021 में इसकी विभिन्न शाखाओं को रूस ने बैन कर दिया. और साल भर बाद ही इसे नोबेल शांति पुरस्कार मिल गया.

2022 के नोबेल शांति पुरस्कार की दूसरी संस्था उक्रेन की ‘सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ [center for civil liberties] का भी इतिहास यही है. यह भी अमेरिकी प्रचार युद्ध में अमेरिका का मोहरा है. 

       _यूक्रेन में रूस समर्थित विक्टर यानुकोविच (Viktor Yanukovych) को 2014 में सत्ता से हटाने में इस ‘सेंटर फॉर सिविल लिबर्टीज’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस सत्ता पलट में अमेरिकी भूमिका किसी से छिपी नही है।_

       पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए ओलिवर स्टोन की ‘यूक्रेन ऑन फायर’  देखी जा सकती है। और यही बात बेलारूस के ‘Ales Bialiatski’ के बारे में भी सही है.

       _नोबेल शांति पुरस्कार अब पूरी तरह अमेरिकी प्रचार युद्ध का हिस्सा हो चुका है. इस शांति पुरस्कार से शांति नहीं बल्कि अशांति ही बढ़ती है. पाश से शब्द उधार लेकर कहें तो- ‘’आज मानवता को तुम्हारी ‘शांति’ से खतरा है.”_

     (चेतना विकास मिशन)

Ramswaroop Mantri

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