अग्नि आलोक
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फिर से ‘कश्मीर फाइल्स’!

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(वरिष्ठ साहित्यकार जितेंद्र भाटिया की फेसबुक पोस्ट)

गोवा फिल्म उत्सव में जूरी के अध्यक्ष इसराइल के नदाव लैपिड ने जब इस फिल्म को अपनी सही जगह दिखाते हुए ‘अशोभन (vulgar) प्रोपगेंडा’ करार दिया तो गोदी मीडिया में खलबली मच जाना स्वाभाविक था! सबसे पहले अनुपम खेर मैदान में आ कूदे और फिर फिल्म के निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने खम्भे नोचते हुए कहा– ‘मैं दुनिया के बौद्धिकों, ‘अर्बन नक्सलों’ और इसराइल से आने वाले उस महान फिल्मकार को चुनौती देता हूँ और यदि वे सिद्ध कर सकें कि ‘कश्मीर फाइल्स’ फिल्म का एक भी  शॉट, संवाद या घटना  सम्पूर्ण सत्य नहीं है तो मैं फिल्में बनाना छोड़ दूंगा!’ दक्षिण के अखबार डेक्कन हेराल्ड ने उनकी उक्ति को ज्यों का त्यों छापते हुए उसके ठीक नीचे  जोश बिलिंग्स की उक्ति जोड़ी–‘ कुछ लोगों को अतिशयोक्ति की इस कदर लत हो जाती है कि उन्हें सच बोलने के लिए भी झूठ का सहारा लेना पड़ता है!’

सच यह है कि जब आप किसी ख़ास इरादे से एक घटना के कुछ हिस्सों को दिखाकर पूरी तस्वीर बनाने वाले उसके बाकी असुविधाजनक  हिस्सों को जानबूझकर गोल कर जाते हैं  तो आप ‘सम्पूर्ण सत्य’ नहीं, बल्कि एक ज़हरीला झूठ बोल रहे होते हैं!        

विवेक अग्निहोत्री ही नहीं, आज समूचा गोदी मीडिया लगातार हमें यही ‘सम्पूर्ण सत्य’ दिखाकर असहिष्णु , ज़हरीला और कट्टर बनाता जा रहा  है!

लैपिड ने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके विचार सिर्फ उस फिल्म को लेकर हैं, वे कश्मीर या किसी राजनीतिक स्थिति के बारे में नहीं हैं. 

लेकिन इसके बावजूद गोवा में लैपिड के बयान के तुरंत बाद इस्राइल के राजदूत ने जिस तरह घुटने टेकते हुए माफी मांगी, वह सचमुच अजीब  था.  इस बयान को पढ़ने के बाद लैपिड का जवाब उनके मूल बयान से भी अधिक आक्रामक था–

“अपने देश के राजनयिक के विचार पढ़कर मुझे बेहद शर्मिंदगी महसूस हो रही है!  मैं अपने आपसे पूछता हूँ, कि यह व्यक्ति, जो काफी अनुभवी राजनयिक है, उस समय क्या कर रहा था जब कक्षा में लोकतंत्र और बोलने की स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया जा रहा था! मैं इस राजनयिक या इसराइल राज्य की निजी संपत्ति  नहीं बल्कि एक  (स्वतंत्र) व्यक्ति हूँ — ठीक उसी तरह जैसे कोई भारतीय व्यक्ति भारत (सरकार) की संपत्ति नहीं है! जब मैं कुछ देखता और महसूस करता हूँ तो  राज्य के स्वार्थों की खातिर उसका ठीक उलट बोलने से बड़ा फासीवादी विचार और क्या हो सकता है?”

विवेक चाहे जितनी भी सफ़ाई देते रहें, लैपिड की लताड़ के बाद इस फिल्म के बारे में कुछ भी और कहना शेष नहीं रह जाता!

Ramswaroop Mantri

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