मुनेश त्यागी
आजकल पठान फिल्म के बेशर्म गाने को लेकर बीजेपी के लोगों ने शाहरुख खान और दीपिका पर काफी कमेंट किए हैं और उनकी फिल्म का बहिष्कार करने की अपील की है। मगर अभी अभी जो वीडियोस और नाच गाने के दृश्य सामने आए हैं, उनको लेकर बीजेपी फंस गई हैं और उसके लगभग सभी भाषणकर्ता चुप हो गए हैं, उन्होंने मौन धारण कर लिया है। बीजेपी के लोग अपनी इन पक्षपाती, एकतरफा और अटपटे बयानों को लेकर फंस गई है और बैकफुट पर चली गई है और इन बयानों ने बीजेपी का चिंतन, चाल, चेहरा और चलन बेनकाब कर दिया है।
कई वीडियो में स्मृति ईरानी जो वर्तमान सरकार में मंत्री हैं फेमिना मिस इंडिया 1998 का वीडियो है जिसमें वे अटपटे तरीके से भगवा कपड़े पहनकर रैंप पर चल रही है यह फोटो और वीडियो काफी वायरल हो रहा है क्या यह वीडियो सही है इसे लेकर बीजेपी कहां है और क्या कह रही है? क्या वह स्मृति ईरानी का बहिष्कार करेगी?
कंगना राणावत जो बीजेपी की कट्टर समर्थक हैं और परम भक्त हैं, एक पोस्टर में और वीडियो में भगवा रंग के कपड़े पहने हुए आदमी के ऊपर पैर रखकर खड़ी हैं। क्या यह भगवा रंग का अपमान नही है? अब तो चोर मचाए शोर वाली कहावत चरितार्थ हो रही है। यहीं पर पूछा जा सकता है कि बीजेपी भक्त क्या कर रहे है? क्या वे कंगना राणावत का बहिष्कार करेंगे?
बीजेपी के कई सांसद अजीब तरह के भगवा कपड़े पहन कर कई वीडियो में देखे गए हैं। बीजेपी की पूर्व कलाकार नवनीत नवल का वीडियो बेहद अफसोसजनक है जिसमें वे साधु के साथ नाच रही हैं और बड़े अटपटे तरीके से नाच रही हैं। यह इनका दोहरा चरित्र है। बीजेपी के लोग आजकल फिल्मी सेंसर बोर्ड को शिक्षा दे रहे हैं। इन्हें अपने लोगों के वीडियो पर कोई अफसोस नहीं है। बीजेपी सांसद निरहुआ जो भगवा रंग के कपड़ों में दिखाई दे रहे हैं और इनका वीडियो भी काफी अफसोसजनक है और किसी भी दशा में असम्मानीय और अफसोसजनक नजर आ रहा है। क्या वे इन दोनों का भी बहिष्कार करेंगे?
अक्षय कुमार जो बीजेपी के कट्टर पक्षधर हैं, का भगवा रंग का अपमान और भी चौंकाने वाला है कि कैसे अक्षय कुमार हीरोइन के साथ नाच रहे हैं। यह दृश्य भूल भुलैया फिल्म का है। मनोज तिवारी भाजपा के सांसद हैं, वह भी भगवा रंग के कपड़े पहनकर भगवा रंग को अपमानित कर रहे हैं। क्या यह सब अंध भक्तों की परिभाषा में गलत नहीं है? क्या भगवा रंग के नाम पर नाटक करने वाले इन दोनों का भी बहिष्कार करेंगे?
साध्वी प्रज्ञा भगवा रंग का अपमान करने वालों का बहिष्कार करने की अपील कर रही हैं। पठान फिल्म को तो केंद्रीय सेंसर बोर्ड ने प्रमाणित किया है, तो फिर इसमें शाहरुख खान का क्या दोष है? यहीं पर अहम सवाल उठता है कि क्या यह भगवा रंग को पसंद करने वाले लोग फिल्म सेंसर बोर्ड से भी ऊपर हो गए हैं? क्या अब सेंसर बोर्ड भी इन्हीं से पूछकर रंगों का चयन करेगा? आज भगवा रंग को लेकर हो-हल्ला मचा है तो क्या कल को लाल रंग, हरे रंग, पीले रंग, नीले रंग को लेकर हो-हल्ला मचाना उचित लगेगा?
यहां पर प्रश्न उठता है कि क्या अंधभक्त उपरोक्त सभी लोगों का बहिष्कार करेंगे? क्या इन सब लोगों को लात मारकर भगाया जाएगा? क्या यह अंध भक्तों का दोहरा और पक्षपाती रवैया नहीं है? इन लोगों को रंगों से कुछ लेना-देना नहीं है। इन्हें बस मुसलमानों को निशाना बनाना है और वोट की खातिर उनकी बेज्जती करनी है, उनके खिलाफ नफरत फैलानी है।
अगर शाहरुख खान की जगह कोई हिंदू होता तो इन्हें कुछ भी कहना या करना नहीं था। जब हिंदू नायक नायिकाएं भगवा रंग के कपड़े पहनकर अरुचिकर नाच, गाना करके वीडियो दिखा रहे थे, तो ये सारे के सारे हिंदुत्ववादी सांप्रदायिक अंध भक्त गूंगे और अंधे क्यों हो गए थे? इन्होंने तब भी कुछ नहीं किया था और आज भी इन्होंने इन लोगों का बहिष्कार करने की कोई मांग और घोषणा नहीं की है।
अब शाहरुख खान की अदाकारी को देखकर इनकी आत्माएं लहूलुहान और घायल हो गई हैं। यह सब और कुछ नहीं है, बल्कि अंध मुस्लिम विरोध है ताकि जनता में हिंदू मुसलमान की नफरत फैलाकर वोट हासिल किया जा सके और सत्ता में बना रहा जा सके। देश में फैली गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी, महंगाई और अपराधों की सुनामी पर इन्हें कुछ नहीं कहना है, कुछ भी नहीं करना है। बस इन्हें मौका मिलते ही हिंदू मुसलमान के नफरत को अभियान को आगे बढ़ाना है ताकि फिर से वोट और सत्ता हासिल की जा सके और जनता में हिंदू मुसलमान की खाई को और गहरा किया जा सके और जनता की बुनियादी समस्याओं से उसका ध्यान हटाया जा सके।





