सुसंस्कृति परिहार
फिर आ गया है वैलेंटाइन डे ।इधर बसंत की भी बहार है आम बौरा रहे हैं महुआ गदरा गए हैं कोयलों की कूक और वासंती हवा में जियरा बल्लियों उछलने मचल रहा है । लड़कों पर तो जोर नहीं बेचारी लड़कियों के प्यार पर सदैव पहरा रहा है सदियों से ज़माना उनका दुश्मन रहा है लेकिन इन सबके बावजूद प्यार करने वाले कम नहीं हुए ।शीरी -फरहाद,हीर-राझां, लैला-मजनूं के किस्से प्यार करने वालों के आदर्श रहे हैं ।भले ही उनका प्रेम असफल रहा हो ।लोक में उनके किस्से बढ़ चढ़ के सुनाए जाते रहे ।उन पर बनी फिल्में भी लोक में सराही गईं ।इतना ही नहीं प्यार करने वालों को लैला मजनूं आदि भी कहने का भी चलन है ।प्यार होता कैसे है उस बारे में भी हमारे समाज में लड़कियों से ये कहा जाता रहा है कि हंसी और फंसी ।माने लड़कियों के हंसने पर भी प्रतिबंध और फंसी याने प्यार को फंसने की संज्ञा दी जाती रही ।पर प्यार भी कितना ताकतवर है कि उसे किसी का खौफ लेशमात्र भी नहीं होता ।खाप पंचायतों के कठोर निर्णयों से भी हम भली-भांति वाक़िफ है पर प्यार की तासीर ही ऐसी है उस पर दुनिया भर के जुल्मों सितम बेअसर साबित हुए हैं । इसीलिए कहा गया है कि इश्क आग का दरिया है और डूब के जाना है ।
हमारे यहां मिथक है कि भगवान कृष्ण ने अपनी बहिन सुभद्रा को अर्जुन के साथ भागने का इशारा किया था क्योंकि वे जानते थे दोनों परस्पर प्रेम करते हैं वहीं स्वत: कृष्ण जी और राधा जी का प्रेम जगजाहिर करते सैंकड़ों मंदिर हैं । क्योंकि लोक ने प्रेमिका राधा का नाम ही कृष्ण के साथ जोड़ा और पूजा गया रुक्मणी का नहीं ।इस तरह प्रेम को प्रतिष्ठित किया । इतिहास में देखें तो संयोगिता और पृथ्वीराज , जोधाबाई और अकबर के प्रेम की कथायें हमें रोमांचित करती रही हैं । फिल्मों ने तो प्रेमी दिलों को अकूत ताकत दी ।साथ ही साथ फिल्म के नायक नायिकाओं के प्रेम विवाह भी आम लैला-मजनूं के लिए आदर्श बने । यहां जाति और धर्म के बंधनों को तोड़ा गया ।शर्मिला और नवाब पटौदी ने यदि हिंदु मुस्लिम के बीच ब्याह रचाया तो वहीं हेमा मालिनी और धर्मेन्द्र ने तो शादी करने मुस्लिम धर्म ही अपना लिया ।जाति बंधन और धर्म का बंधन तो कलाकारों , साहित्यकारों के बीच कभी रहा ही नहीं ।इसी तरह राजा महाराजाओं और उच्च अधिकारियों , नेताओं ने भी इसे तोड़ा है। इसी लीक पर आम प्रेमी प्रेमिकाएं चल रहे हैं और सबसे बड़ी बात इसे हमारा संविधान इज़ाजत देता है । बशर्ते आपकी वय विवाह की हो ।जाति और धर्म कभी आड़े नहीं आती ।
अब इस मौलिक और संवैधानिक अधिकार पर कुठाराघात की ख़बर से प्रेमियों में हड़कंप है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक हालिया फ़ैसले में कहा है कि दो विभिन्न धर्मों के व्यक्तियों के परस्पर विवाह के लिए धर्मपरिवर्तन करना अनुचित है क्योंकि विशेष विवाह अधिनियम में अलग-अलग धर्मों के व्यक्तियों के बीच विवाह का प्रावधान है। मामला एक मुस्लिम महिला के हिन्दू पुरुष से विवाह करने के लिए धर्मपरिवर्तन करने का था।
इस निर्णय के उपरांत उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुस्लिम पुरुषों के विरूद्ध एक अभियान छेड़ दिया है। उनके अनुसार, मुस्लिम युवक अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर हिन्दू लड़कियों को अपने जाल में फंसाते हैं और फिर उन्हें इस्लाम स्वीकार करने के लिए मजबूर करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी और उनकी अर्थी निकाली जाएगी (राम नाम सत्य है)। सख़्त चेतावनी देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की घटनाएं नहीं होने दी जाएंगी और इसके लिए शीघ्र ही एक कानून बनाया जाएगा। उन्होंने यह घोषणा भी की कि जो लोग इस तरह की गतिविधियों में संलग्न होंगे उनके पोस्टर सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाएंगे। उनसे प्रेरित होकर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने भी इस तरह के अंतर्धार्मिक विवाहों पर प्रतिबंध लगाने के लिए शीघ्र एक कानून बना लिया है।अभी हाल में तृणमूल कांग्रेस की सांसद नुसरत जहां ने एक हिन्दू से शादी की। इसका विरोध करते हुए उन्हें ट्रोल किया गया। इसी तरह का एक मामला निकिता तोमर का है जिनकी एक मुस्लिम युवक ने हत्या कर दी थी ‘क्षत्रिय लाईव्स मैटर’ हैशटैग के साथ इस घटना को लव जिहाद बताते हुए प्रचारित किया जा रहा है। यहां यह उल्लेखनीय है कि संसद में आधिकारिक वक्तव्य देते हुए केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा था कि लव जिहाद जैसी कोई चीज नहीं है। उन्होंने यह बात केरल के एक सांसद द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कही थी। मुस्लिम युवकों और हिन्दू युवतियों के विवाह को अपमानित करने के लिए इन्हें ‘लव जिहाद’ कहा जाता है। इस तरह की शब्दावली के प्रयोग के चलते ऐसे विवाहों के बाद हिंसक घटनाओं को प्रोत्साहित किया जाता हैं। ऐसा ही कुछ सन् 2013 में उत्तरप्रदेश के मुज़फ्फरनगर में हुआ था। लेकिन भाजपा नेता चाहे जो कहें, हकीकत यह है कि अंतरधार्मिक विवाहों की संख्या उंगलियों पर गिनने लायक है। तनिष्क के विज्ञापन वाली घटना भी आप भूले नहीं होंगे । इस धमकी के चलते कंपनी ने घुटने टेक दिए और विज्ञापन वापस ले लिया। यह आरोप लगाया गया कि इस तरह के विज्ञापन लव जिहाद को प्रोत्साहित करते हैं।
‘ ”लवजिहाद’ को रोकने के लिए उत्तरप्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने अनेक कदम उठाने की घोषणा करने के साथ-साथ लगे हाथों हिन्दू अभिवावकों को यह सलाह भी दी कि वे यह नज़र रखें कि उनकी बेटियां किससे मिल रही हैं और मोबाइल पर किन लोगों से बात कर रहीं हैं। वे यह भी देखें कि उनकी लड़कियां कहां आती-जाती हैं। कुल मिलाकर, हिन्दू युवतियों पर महिलाओं पर नियंत्रण रखने की रणनीति तैयार की जा रही है। राम पुनियानी जी स्पष्ट रुप से मानते है कि यह साम्प्रदायिक राजनीति का प्रमुख एजेंडा है हिन्दू महिलाओं और लड़कियों पर पूर्णनियंत्रण हो । नहिलाओं को पुरुषों के नियंत्रण में रखना साम्प्रदायिक राजनीति का अभिन्न अंग है। चाहे साम्प्रदायिकता मुस्लिम हो या ईसाई, पुरुषों का महिलाओं पर नियंत्रण सभी का अभिन्न अंग है। नागपुर मुख्यालय से भी यह आवाज बुलंद हुई है कि महिलाओं को घर-गृहस्थी के कामों तक स्वयं को सीमित रखना चाहिए और पुरुषों को कमाई करनी चाहिए।
और तो और अब तो सार्वजनिक वाहनों पर” पगली हंस मत -प्यार हो जाएगा ” पढ़कर दिल कांपने लगा है ।उसकी हंसी पर भी सचमुच विराम ना लग जाए । मोनालिसा और सुरैया की ख़ूबसूरत हंसते खिलखिलाते चित्रों को प्रतिबंधित ना कर दिया जिए । मुस्कान बिना कैसा समाज हम बनाने जा रहे हैं ।कहते हैं कानून तोड़ने के लिए ही बनते हैं विश्वास है और हम देखेंगे फिर भी मोहब्बत करने वाले कम ना होंगे !प्यार है ही ऐसा बावला ।ऐ मोहब्बत ज़िंदाबाद ।





