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ऐतिहासिक फलक : डॉग्स और मैन्स का कल्चर

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पुष्पा गुप्ता 

विदेशियों, विशेष तौर पर ईसाईयों का कुत्तों के प्रति प्रेम हम सबको दिखता ही रहता है. और “डॉग्स आर मैन्स बेस्ट फ्रेंड” हम सबने किताबों में पढ़ा ही हुआ है। 

       देखने सुनने में यह बहुत ही साधारण बात लगती है. लेकिन इस एक बात के पीछे पूरी सांस्कृतिक और धार्मिक कहानी छिपी हुई है. और इसमें पूरी सांस्कृतिक यात्रा शामिल है.

        बाइबल की बुक ऑफ जेनेसिस के अनुसार स्वर्ग में सभी जानवरों का जोड़ा और एडम व ईव रहते थे. और सभी को सबकी भाषा समझ में आती थी. यानी सब बात करते थे.

      और जब एडम और ईव का फॉरबिडेन फ्रूट खाने के बाद स्वर्ग से निष्कासन हुआ तो सभी जानवरों में से कुत्तों का जोड़ा ही था जो स्वर्ग से मानवों के साथ धरती पर आया.

       अर्थात् कुत्तों ने मनुष्य की मित्रता में स्वर्ग को ठुकरा दिया. इसी कथा के चलते ही यह कहावत, “डॉग्स आर मैन्स बेस्ट फ्रेंड” बनी थी. यहूदी में इसी कथा को नकारात्मक रूप से लेते हैं.

लेकिन क्या वास्तव में ऐसा जीसस की धरती पर था? नहीं, जीसस की धरती पर तो ऐसा प्रेम कुत्तों के लिए नहीं था. इसके विपरीत कुत्तों पर भी ईश्वर का श्राप माना जाता है. 

    जो यहूदियों से कॉपी करके इस्लाम में आया और वहाँ सर्वाधिक सनक से लागू है. वही यहूदी बाइबल और टालमुंड में तो कुत्तों को नकारात्मक हिंसक दिखाया गया है. 

     इसके पीछे भी एक कारण है, क्योंकि यहूदी जिस संस्कृति से आते थे, अर्थात् मिस्र की, वहाँ तो अनूबिस का चेहरा कुत्तों से मिलता था और वह मौत के देवता थे.

      हालाँकि कुत्तों को लेकर यहूदियों में कोई सनक नहीं है. जैसी मुसलमानों में है, लेकिन वह प्यार भी नहीं है, जैसा ईसाईयों में दिखता है. इसके बारे में कभी बाद में बात करेंगे.

एक बात और है कि यहूदी तोराह में ही मसीहा की सेकेंड कमिंग का गधे पर बैठकर आना लिखा था. जानवर के रूप में मसीहा का वाहन गधा होना था.

     इसी कथा का सहारा जीसस ने लिया था. पासओवर में वह गधे पर ही बैठकर आए थे. वैसे गधा अधिक बड़ा प्रतीक होना चाहिए था, लेकिन वह बन नहीं पाया.

     अब मुख्य बात पर आते हैं, कुत्तों की इस स्वीकृति के पीछे दो बड़े कारण थे. पहला यह कि जिस रोमन साम्राज्य से ईसाई धर्म को यह विस्तार मिला उसके सभी नोबल, शिकारी थे.

     और रोमन साम्राज्य में शिकार और हिंसा का बोलबाला था. शिकारियों और कुत्तों की दोस्ती तो पुरानी होती है. शिकार में रास्ता बताने और शिकार झपटने के लिए कुत्ते सधाए जाते थे.

इसके अतिरिक्त एक सबसे बड़ा कारण और था, वह था शीप डॉग की बहुत अधिक उपस्थिति होना. शीपडॉग अर्थात् भेड़ों के रखवाले कुत्ते.

     यूरोप में भेड़, बकरियों का पालन बहुत होता था, उनकी रखवाली के लिए शीपडॉग बहुत ही आवश्यक थे. यह चरवाहों के मुख्य साथी होते थे.

     आज भी पुराने इंग्लिश और फ्रांस के इलाके में शीपडॉग की परंपरा है, और ग्रामीण इलाकों में इसकी प्रदर्शन भी दिखाए जाते हैं कि कैसे कमांड सुनकर कुत्ते भेड़ों को खेलकर लाते थे.

      भेड़िए से मुकाबला करने और जानवरों को बचाकर अर्थव्यवस्था को जिंदा रखने में कुत्तों का अहम स्थान था. मशीनी युग तक कॉट्सवुल, शीपडॉग का केंद्र था.

इसी ऐतिहास साथ के कारण जब कांस्टैटीन की बुलाई निकारसिया या नीसिया की काउंसिल में बाइबल तय हुई, तो इसका ध्यान रखा गया.

     कुत्तों को मानवों का सबसे अच्छा दोस्त बताने से शीपडॉग के मालिकों और स्थानीय आम लोगों को बाइबल की कथाओं से जोड़ना आसान था, और वहीं से यह कुत्तों का जोड़ा  सांस्कृतिक यात्रा पर चल पड़ा जो आज भी जारी है. अब तो ब्रिटिश की देखा-देखी अमेरिका और भारत में प्रमुख हो चुका है.

Ramswaroop Mantri

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