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कानून के शासन को रौंदता पुलिस महकमा

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मुनेश त्यागी 

       देश दुनिया में तिरंगा लहरा कर हिंदुस्तान का नाम रोशन करने वाली महिला पहलवानों द्वारा, जंतर मंतर पर यौन शोषण की घटनाओं को लेकर दर्ज की गई एफआईआर के बाद भी पोक्सो कानून और बलात्कार जैसे संगीन आरोपों में दुर्दांत अपराधी को गिरफ्तार न करना और इसमें लगातार टालमटोल करने की पुलिस की हरकतें, लगातार पुलिस कार्यप्रणाली और पुलिस व्यवस्था, कानून और कानून के शासन की धज्जियां उड़ा रही है।

       शासन-प्रशासन और पुलिस की नाकामी के बाद, यौन शोषण की शिकार महिला पहलवानों को अपनी मांगों के समर्थन में और शीघ्र न्याय पाने के लिए धरने प्रदर्शन की कार्रवाई अपनाने को मजबूर होना पड़ा और हालात यहां तक बिगड़े कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में असाधारण कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है। कानून के जानकार अनेक लोगों का कहना है कि अगर भारत का सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में दखलअंदाजी ना करता तो इस मामले में कुछ भी होने नहीं जा रहा था।

     सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कड़े कदम उठाने के बाद, दिल्ली पुलिस को इस मामले में आरोपी के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराने को करने को मजबूर होना पड़ा। विचारणीय प्रश्न यह है कि आखिर इतने संगीन मामलों में पुलिस, केंद्र सरकार की आंखों के नीचे होते हुए भी, इतनी उदासीन, पक्षपाती और निष्क्रिय क्यों बनी रही?

        उसने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल एफ आई आर दर्ज करके आरोपियों को समय से और कानून के प्रावधानों के अनुसार गिरफ्तार क्यों नहीं किया? पहले तो समय से एफ आई आर दर्ज नहीं की गई और अब एफ आई आर होने के बाद भी आरोपी बृजभूषण शरण सिंह को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? उसे क्यों और किस लिए बचाया जा रहा है? क्या इसी तरह के दूसरे मामलों में भी पुलिस आरोपियों के साथ ऐसा ही बर्ताव करती है? यहां पुलिस का दोहरा रवैया पूरी तरह से उजागर हो गया है।

        पता चला है कि आरोपी बृजभूषण के खिलाफ अनेकों अनेक, लगभग 86 मामले, गंभीर धाराओं में दर्ज हैं। उसने बहुत सारे लोगों के खिलाफ हत्या, अपहरण, डराने धमकाने, हत्या के प्रयास आदि अपराध किए हुए हैं। वह एक बहुत बड़ा अपराधी है। वह पांच संसदीय सीटों और तीस से ज्यादा विधानसभा सीटों को जिताने हराने की स्थिति में आ गया है।

       पिछले कई सालों का इतिहास दिखा रहा है की अधिकांश पूंजीवादी दल, येन केन प्रकारेण अपनी सरकार बनाने और सरकार कायम रखकर सत्ता में बने रहकर, पूंजीपतियों, अपने दल और अपने परिवार के लिए धन इकट्ठा करना और सत्ता प्राप्त करना चाहते हैं। इसी कारण वे अपराधियों और माफियाओं से मदद हासिल करते हैं, इन्हें पालते पोसते हैं, इनके खिलाफ कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं करने देते और अपनी हवस के तहत, पुलिस कार्रवाई में दखलअंदाजी करते रहते हैं, पुलिस को कानून के अनुसार अपना काम नहीं करने देते और पुलिस को अपना पिछलग्गू बनाने की पूरी कोशिश करते हैं।

      हालात यहां तक खराब हो गए हैं कि इस बिगडे माहौल में, पुलिस के अधिकांश अधिकारियों, कर्मचारियों ने कानून और कानून के शासन को धता बता दिया है। वे सरकार का खिलौना बन गए हैं। उन्होंने संविधान, कानून और कानून के शासन को ताक पर दिया है। अब तो जैसे पुलिस धनी वर्ग की हिमायती सरकारों का मोहरा और पिछलग्गू ही बनकर रह गई है।

       महिला पहलवानों के आरोपों के बाद एफ आई आर दर्ज होने के बाद भी आरोपी को गिरफ्तार न करने की दिल्ली पुलिस की इस हरकत से, पुलिस विभाग पूरी तरह से बदनाम हो गया है। दिल्ली पुलिस की इस बदनामी, निष्क्रियता और पक्षपात के पीछे केंद्र सरकार की सबसे बड़ी भूमिका है। भारत का गृह मंत्रालय इस मामले में पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए हैं, जिसका पूरा लाभ आरोपी को मिलता दिख रहा है और पुलिस की इस नाकामी के पीछे गृह मंत्रालय और केंद्र सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार हैं।

       उपरोक्त सारी घटनाओं से यह साबित हो गया है कि भारत की पुलिस व्यवस्था ईमानदार और निष्पक्ष व्यवस्था नहीं रह गई है। उसका भारतीय संविधान, कानून और कानून के शासन और प्रशासन की नैतिकता और मर्यादा में कोई यकीन नहीं है। वह सरकार का एक खिलौना बन कर रह गई है। जनता का पुलिस की ईमानदारी और निष्पक्षता से पूरी तरह विश्वास उठ चुका है। अब तो पुलिस व्यवस्था कानून की धज्जियां उड़ाने का सबसे बड़ा महकमा बनकर, जनता के सामने और देश दुनिया के सामने आ गया है।

      जब इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर विभिन्न लोगों से बात की गई तो उन सब का मानना था कि इस मामले में पुलिस की भूमिका पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना, पक्षपाती और संविधान, कानून और कानून के शासन के खिलाफ है। पुलिस को अपनी छवि सुधारने के लिए और कानून के शासन के हिसाब से आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करके, इन्हें सख्त से सख्त सजा दिलवाने की कोशिश करनी चाहिए। तभी जाकर पुलिस की छवि सुधर सकती है और उसका जनता में विश्वास कायम हो सकता है। यह सारा मामला इस बात को पुख्ता कर रहा है कि पुलिस व्यवस्था में आज सबसे ज्यादा जनहितकारी सुधारों की जरूरत है।

Ramswaroop Mantri

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