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स्ट्रेस और एंजाइटी की कारण बन रही है स्लीपिंग मेडिसिन

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~ डॉ. प्रिया

    स्लीपिंग पिल की बढ़ती मांग के बीच अनिद्रा को बढ़ावा देने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी अन्य स्थितियों के जोखिम भी बढ़ रहे हैं। नींद की गोलियों का साइड इफेक्ट आपके लिए खतरनाक हो सकता है.

       खराब जीवनशैली, तनाव, एंग्जायटी जैसे तमाम मानसिक हालात लोगों को अनिद्रा का शिकार बना रहे हैं। ऐसी स्थिति में लोग उचित नींद लेने के लिए नींद की गोलियां खा रहे हैं। धीरे-धीरे स्लीपिंग पिल्स की मांग काफी बढ़ती जा रही है।

     हालांकि, डॉक्टर द्वारा उचित समय के लिए नींद की गोलियों को खाने से स्वास्थ्य को नुकसान नहीं पहुंचता। यदि कोई इसका आदी हो जाता है और हर रोज सोने से पहले नींद की गोलियां लेता है तो यह सेहत को कई रूपों में हानि पहुंचा सकता है। 

        नींद की गोलियां अत्यधिक नशीली हो सकती हैं। जो लोग नियमित रूप से इसे लेते हैं वो आसानी से इसके आदि हो जाते हैं और लंबे समय तक इसका उपयोग लोगों को इसपर निर्भर कर देते हैं।

      इस स्थिति में जब लोग इसे छोड़ना चाहते हैं तो उनके लिए यह काफी कठिन हो जाता है। इन गोलियों को लिए बिना उन्हें सोने में तकलीफ होती है।

*नींद की गुणवत्ता पर भी पड़ता है असर :*

      नींद की गोलियां लोगों को जल्दी सोने में मदद करती हैं, परंतु दूसरी और यह नींद की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से भी प्रभावित कर देती हैं।

        इसका मतलब यह है कि भले ही नींद की गोली लेने वाले लोग आम लोगों की तुलना में अधिक सोते हों परन्तु उनका शरीर और मस्तिष्क पूरी तरह से आराम की मुद्रा में नहीं होता जिसकी वजह से अगले दिन वे उठने के बाद तरोताजा और एनर्जेटिक नहीं रहते।

*स्लीपिंग पिल्स के साइड इफेक्ट्स :*

      नियमित रूप से स्लीपिंग पिल्स लेने से चक्कर आना, नींद की कमी महसूस होना, सिरदर्द, मुंह सूखना और पाचन संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

     नीद की गोलियां लेने से दिन के समय स्लीपिनेस्स महसूस होती है, जिससे दिन के दौरान काम करना और किसी चीज पर ध्यान केंद्रित रख पाना मुश्किल हो जाता है।

*समय के साथ बढ़ता जाता है इनका डोज :*

      समय के साथ, शरीर नींद की गोलियों के प्रति सहिष्णुता विकसित कर लेता है, जिसका अर्थ है कि लोगों को समान प्रभाव प्राप्त करने के लिए अधिक से अधिक खुराक लेने की आवश्यकता होती है।

      इससे साइड इफेक्ट और निर्भरता का खतरा और अधिक हो जाता है। एक बार जब शरीर इसकी आदि हो जाती है तो कुछ-कुछ समय पर लोगों को अपनी नींद की गोलियों का डोज बढ़ाना पड़ता है इसलिए हमेशा सचेत और सतर्क रहें।

*बढ़ जाता है स्ट्रेस और एंग्जाइटी का खतरा :*

       नींद की गोलियां लेने से नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ता है, जिसकी वजह से अनिंद्रा की समस्या होती है जो स्ट्रेस को बढ़ावा देती है और मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह से प्रभावित कर देती है।

    खासकर बुजुर्गों में इसकी वजह से गिरने, चोट लगने और घायल होने का खतरा बना रहता है.

*एलर्जिक रिएक्शन :*

       कुछ लोगों में स्लीपिंग पिल्स लेने से एलर्जिक रिएक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

    उन्हें इचिंग, रैशेज के साथ अन्य प्रकार के एलर्जी का सामना करना पड़ सकता है।

*पाचन क्रिया पर असर :*

      स्लीपिंग पिल्स लेने से पाचन क्रिया पर नकारात्मक असर पड़ता है।

    इस स्थिति में कब्ज, अपच, डायरिया और उल्टी की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

जो लोग नींद की समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें नींद की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए स्लीपिंग पिल्स की जगह थेरेपी, मेडिटेशन, योग जैसी गतिविधियों में भाग लेना चाहिए।

     साथ ही जीवनशैली में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों के साथ आप इस समस्या को आसानी से खत्म कर सकते हैं।

Ramswaroop Mantri

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