देर से ही सही, लेकिन न्याय मिलता ज़रूर है। गुरुवार को हिंदुस्तान और पाकिस्तान दोनों देशों में अदालतों ने न्याय किया।
पहले हिंदुस्तान की बात। दिल्ली वाले केजरीवाल वर्षों से चिल्ला रहे हैं – हमारी सरकार का मतलब क्या है? केंद्र सरकार ने जो LG बैठा रखे हैं, हर बात में अड़ंगा लगा देते हैं। कोई काम करने नहीं देते। न जन कल्याण का, न सरकार का। उनके इशारे पर तमाम अफ़सर दिल्ली सरकार की फ़ाइलों को अटकाने के सिवाय कुछ नहीं करते। आख़िर हम करें तो क्या करें? किस तरह जनता से किए वादे पूरे करें और किस तरह लोगों के हितों की योजनाओं को लागू करें?

सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने कहा- पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और जमीन छोड़कर उपराज्यपाल सभी मामलों में दिल्ली सरकार की सलाह पर ही काम करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को न्याय कर दिया। पाँच जजों की संविधान पीठ ने कहा- पब्लिक ऑर्डर, पुलिस और ज़मीन के मामलों को छोड़कर तमाम मामलों में LG को अब दिल्ली सरकार की सलाह पर ही काम करना होगा। इसके पहले दिल्ली सरकार और विधानसभा के कामकाज में भी LG की सलाह के बिना कुछ नहीं किया जा सकता था। कोर्ट के आदेश के बाद अब यह सब खेल ख़त्म हो गया है।
तमाम अफ़सर अब दिल्ली सरकार के अधीन ही रहेंगे। कोर्ट का कहना था कि चुनी हुई सरकार उसके अफ़सरों को आदेश दे सकती है। इसमें LG की कोई भूमिका नहीं होगी। कल को कोई दूसरी सरकार भी आए तो उसे भी यह अधिकार हर हाल में मिलेगा। आख़िरकार केजरीवाल की वर्षों की मुराद पूरी हो गई।
उधर पाकिस्तान, जहां पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की गिरफ़्तारी के कारण पूरा देश सड़क पर है। देशभर में अराजकता फैली है और कोई किसी की सुनने को तैयार नहीं है, वहाँ भी कोर्ट ने न्याय किया। आख़िर कोर्ट के आदेश से इमरान रिहा कर दिए गए। हो सकता है अब एक- दो दिन में पाकिस्तान में अमन लौट आए! दरअसल, हुआ यह कि इमरान के वकील एक अर्ज़ी लेकर कोर्ट पहुँचे। उन्होंने कहा- साहेब, कोई फ़ौज या कोई पुलिस, कोर्ट में सुनवाई चलते वक्त किसी को गिरफ्तार कैसे कर सकती है?

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए।
यह तो कोर्ट की अवमानना है। कोर्ट ने आदेश दिया कि तुरंत इमरान खान को कोर्ट में पेश किया जाए। जैसे ही इमरान को कोर्ट में लाया गया, कोर्ट ने कहा- अब इन्हें यहीं से तुरंत रिहा कर दें। मनमानी चल रही है। आप कोर्ट से ऊपर हैं क्या? बस, इमरान खान रिहा हो गए।
तीसरा मामला महाराष्ट्र की नई और पुरानी सरकार का भी है। उद्धव सरकार के गिरने और शिंदे सरकार के गठन के कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल की ग़लतियाँ गिनाई। स्पीकर की ग़लतियाँ भी बताईं लेकिन कहा- कि ये सरकार तो बनी रहेगी। कोर्ट का कहना था कि उद्धव विधानसभा के फ़्लोर पर आए ही नहीं। उन्होंने पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया तो ऐसी स्थिति में कोर्ट क्या कर सकता है?

कोर्ट ने विधायकों की अयोग्यता के मामले में ज़रूर कहा कि इस बारे में समय रहते स्पीकर को निर्णय लेना होगा। अब समय रहते का मतलब कोई डेडलाइन तो होता नहीं, इसलिए माना यही जा रहा है कि सरकार चलती रहेगी।





