अग्नि आलोक
script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

सियासत : बन्द सोसायटी में षड्यंत्री नेतृत्व

Share

सुधा सिंह 

    बड़के वाले उतने नफ़रती नहीं होते हैं, जितने दिखते हैं, दरअसल ये सिर्फ़ मतलबपरस्त होते हैं। ये नफ़रत को इस्तेमाल करते हैं, समूह की गोलबंदी के लिए जो कि लोकतंत्र में बोटबैंक के रूप में उनके राजनीतिक प्राप्तियों में सहायक होता है।

      धर्मांधता युक्त समाज फिर चाहे वह किसी धर्म से जुड़ा हो, स्वतंत्र सोच का विरोधी होता है।   वह अतीतजीवी होता है। वह धर्म को कवच के रूप में देखता है। उसको लगता है कि इसके अभाव में अन्य धार्मिक सत्ताएं उसके समाज को खत्म कर देंगी। यह असुरक्षाबोध उसमें और कट्टरता पैदा कर देता है।

      ऐसे कट्टरपंथी यद्यपि अधुनातन प्रगति से लाभ उठाते हुए अपने जीवन को आधुनिक सुविधाओं से लैस रखते हैं तो भी पुरानी मान्यताओं/परंपराओं को छोड़ते नहीं है। ये AC में बैठकर कंदराओं के जीवन की कल्पना कर उसकी मुग्धता पर जान छिड़कते हैं। ये 21 वीं शताब्दी में कबीलाई समाज की पुनर्स्थापना चाहते हैं।

 पुराने धर्म ग्रन्थों में लिखे एक-एक हर्फ़ के हिसाब से चलना चाहते हैं। ऐसे अतीतजीवी बन्द समाज को धर्म के नाम पर आसानी से लामबंद किया जा सकता है। इसलिए बड़े नेता नफ़रत के जरिये एक खास समुदाय को गोलबंद करने में सफल हो जाते हैं।

      ये बड़के वाले तो सिर्फ़ आग लगाकर दूर खड़े होने वाले लोगों में होते हैं। चूंकि ये जाहिल पब्लिक की नब्ज़ कायदे से पकड़ लेते हैं, इसलिए आग लगाकर दूर हट जाते हैं और बाकी का काम तो मानव भेड़ें संभाल ही लेती हैं।   

      ये कब मौलाना के दर पर हाजिरी बजाने पहुंच जाएं, कब रुद्राक्ष धारण कर लें और कब गोली मारों सालों को नारा लगाने लगे, कोई तबक्का नहीं। ये कब किसी को राष्ट्रीयता से खारिज कर दें और कब सबका डीएनए एक घोषित कर दें, कुछ कहा नहीं जा सकता। कभी मुसलमान निशाने पर होते हैं तो कभी यह कहा जाता है कि मुसलमानों के बिना हिंदुत्व नहीं।

इनका स्टैंड राजनीतिक लाभ-हानि से तय होता है। सो इनके स्टैंड अवसरवादी राजनीति की मांग के हिसाब से बदलते रहते हैं। अपने राजनीतिक हितों की पूर्ति के निर्बाध सुनिश्चयन हेतु ध्यान बंटाने के लिए बांटो और राज करो की नीति बहुत लाभकारी होती है।

      दुनियावी शोर के बीच चुपके से माल दबाकर तमाशबीनों के साथ खड़े होने का हुनर कोई मामूली हुनर नहीं होता। ऐसे तमाशबीनों की मासूमियत के राज जान लेना सबके बस की बात नहीं। कश्मीरी पंडितों की ही ले लीजिए। कितने घड़ियाली आंसू बहाए गए। उस समय लग रहा था कि अब कश्मीरी पंडितों के कष्ट दूर करके ही मानेंगे, पर इस बार छोटे साहब कश्मीर गए मगर उनसे न मिले। 

      अब की राजनीति में भावनाओं का कुशल दोहन ही किसी नेता के कुशल राजनीतिज्ञ होने की निशानी है। 

ये राजनेता इसलिए सफल हो जाते हैं कि इनके सामने ऐसा समाज है जो अपनी संकीर्णताओं पर आत्ममुग्ध रहता है। कुएं के मेढ़क की तरह वह श्रेष्ठताबोध में जीता है। धार्मिक और जातीय खांचों में बंटा हुआ समाज दृष्टिदोषव से पीड़ित रहता है।

       क्षैतिज विस्तार को आंकना उसकी नियति में नहीं। वह मनचाहा देखना और सुनना चाहता है। कुंठित वृत्ति आत्मरत रहती है वह यथार्थ से बचना चाहती है। आत्ममुग्धता से पीड़ित इस सामंती समाज  को संतुष्ट करने के लिए मनमाफिक इतिहास सौंपा गया ताकि वह निश्चित दायरे में ही सोच सके।

      छद्म राष्ट्रवाद के माहौल को बनाने के लिए डर और घृणा को बढ़ावा दिया जाता है। चरित्रहनन के जरिये अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी को पटकनी दी जाती है।

खाया-पिया-अघाया वर्ग जो परजीवी होता है, तदर्थवाद का पोषक होता है, वह किसी भी बदलाव के खिलाफ होता है। यह व्यवस्था समर्थक होता है। इसके अलावा जो अन्यायपूर्ण  व्यवस्था का सहायक बन जाता है, वह है धार्मिक कट्टरपंथी वर्ग। अति धार्मिक रूढ़ता उसकी जिज्ञासाओं को उभरने ही नहीं देती।

      वह यह नहीं सोच पाता कि जुलूस में झंडा और डंडा उसके बच्चों को ही क्यों पकड़ाया जाता है। वह यह नहीं सोच पाता कि उसके अपने बच्चे पढ़ाई की उम्र में जुलूस का भाग बनकर अपना भविष्य चौपट कर रहे हैं जबकि बड़े नेताओं के लड़के विदेशों में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। आपके बच्चे दंगाई बनते हैं और उनके बच्चे भविष्य के नेतृत्वकर्ता।

     वह यह नहीं जान पाता कि असमर्थता और अभाव की वजह क्या है, उसके जिम्मेदार तत्व कौन हैं ? वे नहीं जान पाते कि त्याग का  इकतरफा पाठ मौजूदा समस्याओं से ध्यान भटकाने के लिए ही पढ़ाया जाता है जिसका उपदेशकर्ता खुद पालन नहीं करते। 

    इसलिए जनता को जागरूक करना बहुत जरूरी है अन्यथा वोट के सौदागर लोकतंत्र के अर्थ की अर्थी निकाल कर ही रहेंगे।

Ramswaroop Mantri

Recent posts

script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-1446391598414083" crossorigin="anonymous">

प्रमुख खबरें

चर्चित खबरें