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रोबॉट की दुनिया में दखल

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प्रणव प्रियदर्शी

फोर्ड मोटर कंपनी की सबसिडियरी लैटिट्यूड AI में टेक्निकल लीड हैं आस्था कुकरेजा। उनकी मुख्य जिम्मेदारी है ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेक्नॉलजी का विकास करना। लेकिन कंट्रोल इंजीनियरिंग एक्सपर्ट के तौर पर वह सेंसर्स रीडिंग और डिसिजन मेकिंग एल्गोरिदम से जुड़े काम भी देखती हैं। यही नहीं कोबॉट (कोलैबरेटिव रोबॉट) भी उनका पसंदीदा क्षेत्र है, जिसमें वह सुनिश्चित करती हैं कि रोबॉट और इंसान सुरक्षित रूप से साथ-साथ काम करें।

इस बेहद तकनीकी फील्ड में आस्था की ये उपलब्धियां चकित करने के साथ ही यह सवाल भी पैदा करती हैं कि आखिर उन्हें इस फील्ड में आने की सूझी कैसे। और, वे कौन से फैक्टर रहे जिनसे वह इस अपरिचित फील्ड में लगातार आगे बढ़ने की ताकत लेती रहीं। असल में नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी (जो तब दिल्ली यूनिवर्सिटी का ही हिस्सा थी) से मैन्युफैक्चरिंग प्रॉसेसेज और ऑटोमेशन इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री लेने के ठीक बाद आस्था ने कुछ समय के लिए मारुति सुजुकी के गुड़गांव प्लांट में काम किया था। यहां उन्होंने रोबॉट को काम करते देखा और रोबॉटिक्स में उनकी दिलचस्पी जगी। बकौल आस्था, उन्हें अहसास हो गया कि रोबॉटिक्स भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग पावरहाउस बना सकता है।

इसके बाद ही उन्होंने इस फील्ड में हाथ आजमाने का फैसला किया। पहला कदम था खुद को इस फील्ड के लायक बनाना यानी स्किल पर काम करना। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन में मास्टर डिग्री के कोर्स में दाखिला ले लिया और उसके बाद पलटकर नहीं देखा। कमिंस, रीथिंक रोबॉटिक्स, ऑप्टिमस राइड जैसी कंपनियों में योगदान देते हुए और एक्सपीरिएंस हासिल करते हुए वह इन दिनों लैटिट्यूड AI में टेक्निकल लीड की भूमिका में हैं। आस्था ने सेंसर डेटा की मदद से ऐसा मैथेमेटिकल मॉडल विकसित किया है, जिससे रोबॉट के इर्दगिर्द के परिवेश की जानकारी मिल जाती है। उन्होंने रोबॉट का मूल्यांकन करने वाला सेंसर चेक एल्गोरिदम भी विकसित किया है।

उनका एक इनोवेशन 2020 में ही अमेरिका में पेटेंट भी हो चुका है जिसके जरिए पंप का प्रदर्शन कमजोर होने पर उसकी गड़बड़ियां पकड़ में आ जाती हैं। किसी डिवाइस के खराब होने पर उसकी गड़बड़ियों को पकड़ना आसान है, लेकिन आस्था का यह इनोवेशन गड़बड़ियों को परफॉरमेंस में गिरावट के दौरान ही पकड़ लेता है। बहरहाल, आस्था की यात्रा जारी है। नई लड़कियों के लिए उनका मूल मंत्र है कि न तो नए-नए स्किल सीखते हुए अपनी कपैबिलिटीज बढ़ाने में कोई संकोच करें और न ही कभी खुद को कम करके आंकें।

Ramswaroop Mantri

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